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इन महिलाओं ने सबरीमला में घुसने की उठाई जोखिम, नाकाम रहीं 

बिंदु और कनकदुर्गा नाम की दो महिलाओं ने बुधवार तड़के केरल के सबरीमला स्थित अयप्पा मंदिर में घुस कर इतिहास रच दिया। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बावजूद इस मंदिर में औरतों को नहीं घुसने दिया जा रहा था। उनके पहले कई बार कई महिलाओं ने जोखिम उठा कर मंदिर में दाखिल होने की कोशिश कीं, पर नाकाम रहीं। हम बताते हैं उनमें से कुछ साहसिक महिलाओं के बारे में। 

  • सुप्रीम कोर्ट के फै़सले के बाद 17 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश की 45 साल की माधवी नाम की महिला ने जब मंदिर की ओर जाने की कोशिश की तो उन्हें ज़बरन वापस भेज दिया गया। एक अन्य महिला को सबरीमला जाते वक़्त बस स्टॉप पर रोक कर वापस जाने को कहा गया। तमिलनाडु के एक दंपति को भी वापस जाने को मज़बूर कर दिया गया था। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर हिंसक हुए आंदोलन में दो महिला पत्रकार पूजा प्रसन्ना और सरिता बालन घायल हो गई थीं। 
  • केरल की कार्यकर्ता रेहाना फ़ातिमा और आंध्र प्रदेश की पत्रकार कविता ने 19 अक्टूबर को मंदिर की ओर जाने वाली पहाड़ी पर चढ़ने के लिए सुरक्षा देने की माँग की थी। लेकिन अयप्पा के भक्तों के विरोध की वजह से वे मंदिर की ओर नहीं जा सकीं।
  • 50 साल से ज़्यादा उम्र की एक महिला और कुछ कम उम्र की महिलाओं ने 7 नवंबर को जब मंदिर के पवित्र गर्भगृह की ओर जाने की कोशिश की तो उनके साथ बद्तमीजी की गई। 
  • हिंदू एकतावादी संगठन की अध्यक्ष केपी शशिकला (उम्र 50 वर्ष) को 16 नवंबर की रात 2.30 बजे उस समय हिरासत में ले लिया गया जब उन्होंने मंदिर में रात को रुकने की अनुमति माँगी। उन्हें अगले दिन ज़मानत मिली और कोर्ट ने 'कारण बताओ' नोटिस भी जारी किया। ऐसा इसलिए क्योंकि रात को मंदिर बंद हो जाने के बाद भक्तों को मंदिर में जाने की इजाज़त नहीं है। 
भू माता ब्रिगेड की नेता तृप्ति देसाई को कोच्चि हवाई अड्डे पर ही रोक दिया गया था।
  • मंदिर में महिलाओं को जाने देने की आवाज़ उठाने वाली भू माता ब्रिगेड की नेता तृप्ति देसाई को 17 नवंबर को कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 14 घंटे तक रोक कर रखा गया। मंदिर के दुबारा खुलने के बाद 700 से ज़्यादा महिलाओं ने मंदिर में जाने देने के लिए पुलिस से अनुमति देने की माँग की थी। 
  • 17 दिसंबर को केरल पुलिस ने चार किन्नरों को मंदिर की ओर जाने वाली पहाड़ियों पर चढ़ने और मंदिर में पूजा करने की अनुमति दी थी। इससे पहले उन्हें वापस भेज दिया गया था और इसे लेकर उन्हें अयप्पा के भक्तों का विरोध भी झेलना पड़ा था। 
  • 22 दिसंबर को चेन्नई की 12 महिलाओं को भी मंदिर में जाने से रोक दिया गया। इसके बाद बिंदु और कनकदुर्गा ने 23 दिसंबर को मंदिर के अंदर जाने की कोशिश की, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सकीं। अंत में इन दोनों महिलाओं ने 2 जनवरी को मंदिर के अंदर जाने में सफलता हासिल कर ली। अयप्पा के भक्तों ने 11 और महिलाओं को भी मंदिर में जाने से रोक दिया था। 

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले सबरीमला मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं को जाने की अनुमति नहीं थी। सबरीमला भगवान अयप्पा का मंदिर है। भगवान अयप्पा को ब्रह्मचारी और तपस्वी माना जाता है। इसलिए मासिक धर्म के आयु वर्ग में आने वाली महिलाओं को मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है। यह परंपरा 1500 साल से चली आ रही थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर, 2018 को महिलाओं को सबरीमला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। लेकिन कोर्ट का फै़सला आने के बाद भी महिलाओं के लिए यहाँ प्रवेश करना मुश्किल था। महिलाएँ कोशिश करती रही हैं कि उन्हें भी सबरीमला में प्रवेश मिले। 

लेकिन महिलाओं की राह में और कठिनाइयां हैं। बिन्दु और कनकदुर्गा के मंदिर में घुसने के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं। बड़ी तादाद में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन जारी रहेगा। तो सवाल यह उठता है कि क्या बिन्दु और कनकदुर्गा के दाखिले के बाद भी अयप्पा मंदिर में औरतों को नहीं घुसने दिया जाएगा। इसका जवाब हमें जल्द ही मिल जाएगा। 
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