सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बीजेपी शासित अरुणाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के ठेकों में कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंप दी है। आरोप है कि पिछले 10 वर्षों में 1,270 करोड़ रुपये के ठेके मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी फर्मों को दिए गए। 
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को दो सप्ताह के अंदर जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। साथ ही अरुणाचल प्रदेश सरकार को इन ठेकों से संबंधित सभी दस्तावेज सीबीआई को उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है। जांच एजेंसी को अपनी रिपोर्ट 16 सप्ताह के अंदर अदालत में जमा करनी होगी।
यह आदेश उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि अरुणाचल प्रदेश में पीडब्ल्यूडी के तहत बड़े पैमाने पर ठेके मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों या उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को बिना उचित प्रक्रिया के आवंटित किए गए। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि इन ठेकों की कुल राशि लगभग 1,270 करोड़ रुपये है।

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सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच का आदेश दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह जांच में पूरी सहयोग करे और सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए।
यह मामला अरुणाचल प्रदेश की राजनीति में काफी चर्चा में रहा है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर उनके परिवार के सदस्यों या निकट संबंधियों को सरकारी ठेकों में अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, अब तक इन आरोपों की स्वतंत्र जांच नहीं हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को नई गति मिलने की उम्मीद है। सीबीआई अब इन ठेकों की पूरी प्रक्रिया, बोली प्रक्रिया, कंपनियों के स्वामित्व और संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट आगे की कार्यवाही तय करेगा।

पेमा खांडू के खिलाफ क्या हैं आरोप

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के खिलाफ लगे आरोप गंभीर और चिंताजनक हैं। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात का संज्ञान लिया है कि उनके परिवार और करीबी रिश्तेदारों को अकेले तवांग जिले में 380 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी ठेके दिए गए, जिनमें से 17 करोड़ रुपये बिना प्रतिस्पर्धी बोली के दिए गए। इसके अलावा, 2019 और 2024 के बीच उनकी घोषित संपत्ति में 100 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि हुई है। न्यायालय ने भ्रष्टाचार और पक्षपात के इन आरोपों की जांच के लिए केंद्रीय मंत्रालयों और सीएजी से रिपोर्ट मांगी है। सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना द्वारा दायर एक याचिका में इन आरोपों की एसआईटी जांच की मांग की गई है।
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कई भाजपाई सीएम इस लिस्ट मेंः कांग्रेस

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह तो बस शुरुआत है। कई अन्य भाजपा मुख्यमंत्री भी इसी श्रेणी में हैं- जिनमें पूर्वोत्तर के कम से कम एक भावी मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। 'ना खाऊंगा ना खाने दूंगा' पूरी तरह से एक धोखा था।जिसका पर्दाफाश अब हो रहा है।