असम के धेमाजी जिले में भूमि विवाद असम और अरुणाचल के बीच सीमा विवाद में बदल गया। पहले दोनों राज्यों के लोगों में झड़प हुई। फिर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हवा में गोलियां चलाईं। बॉर्डर पर असम के लोगों की ओर से बेमियादी नाकाबंदी जारी है।
असम और अरुणाचल प्रदेश सीमा पर झड़प
असम और अरुणाचल प्रदेश की अंतर-राज्यीय सीमा पर भूमि अतिक्रमण को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर हिंसक हो उठा है। गुरुवार 13 अगस्त को असम के धेमाजी जिले में दोनों राज्यों के लोगों के बीच ताज़ा झड़प के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अरुणाचल प्रदेश पुलिस को हवा में गोलियां चलानी पड़ीं। यह घटना तब हुई जब अरुणाचल के खिलाफ स्थानीय संगठनों द्वारा बुलाई गई बेमियादी आर्थिक नाकाबंदी (Economic Blockade) दूसरे दिन में प्रवेश कर चुकी है। हालांकि दोनों राज्य केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अगुआई में 2023 में सीमा विवाद हल कर चुके हैं लेकिन दोनों तरफ की जनता में झड़प नहीं रुक रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्से को लेकर चीन गलत बयानबाज़ी कर रहा है। यानी अरुणाचल प्रदेश संवेदनशील बना हुआ है, ऐसे में नॉर्थ ईस्ट के दो राज्यों के लोग आपस में लड़ रहे हैं।
ताज़ा घटनाक्रम और झड़प की वजह
अधिकारियों के अनुसार, यह घटना असम के धेमाजी जिले के सिलापाथार स्थित लिकाबाली (Likabali) एंट्री पॉइंट पर हुई। आर्थिक नाकाबंदी के दौरान अरुणाचल प्रदेश की ओर से कुछ लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें कुछ लोग मामूली रूप से घायल हो गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी हाथापाई और झड़प शुरू हो गई। स्थिति को बिगड़ता देख अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने अपनी सीमा की ओर से भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवा में तीन राउंड हवाई फायरिंग की।क्यों शुरू हुई आर्थिक नाकाबंदी?
यह पूरा विवाद 10 अगस्त (सोमवार) को धेमाजी जिले के गोगमुखा राजस्व मंडल अंतर्गत मिंगमांग बस्ती में हुई घटना से भड़का है। कथित तौर पर सीमावर्ती भूमि अतिक्रमण को लेकर हुए विवाद में अरुणाचल प्रदेश के कथित असामाजिक तत्वों द्वारा की गई गोलीबारी में असम के मिसिंग समुदाय के कम से कम 12 लोग घायल हो गए थे।इस घटना के विरोध में असम के मिसिंग समुदाय के शीर्ष छात्र संगठन 'ताकाम मिसिंग पोरिन केबांग' (TMPK), 'मिसिंग मिमाक केबांग' (MMK) और 'ताकाम मिसिंग महिला केबांग' (TMMK) ने बुधवार से अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ बेमियादी आर्थिक नाकाबंदी का आह्वान किया। यह नाकाबंदी गुरुवार को जारी रही।
असम के प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
असम के बॉर्डर जिले में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि 10 अगस्त की गोलीबारी में शामिल सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी कर उन्हें असम पुलिस को सौंपा जाए। असम की सीमा में कथित अवैध अतिक्रमण पर तुरंत रोक लगाई जाए। दशकों पुराने असम-अरुणाचल सीमा विवाद का स्थायी और शीघ्र समाधान निकाला जाए। प्रदर्शनकारियों ने द्वारमुख-बांदेरदेवा, रुक्सिन, सिलापाथार, सोलेन्गी और पाभोई जैसे प्रमुख अंतर-राज्यीय सीमा मार्गों को बंद कर दिया है। नाकाबंदी से केवल आपातकालीन और स्कूल वाहनों को छूट दी गई है।सरमा और पेमा खांडू ने बात की
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू से बातचीत की है। सीएम सरमा के अनुसार, अरुणाचल के मुख्यमंत्री ने घटना की जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। स्थिति को शांत करने और आर्थिक नाकाबंदी समाप्त कराने के लिए असम के सीमा सुरक्षा एवं विकास मंत्री अतुल बोरा और शिक्षा मंत्री रणोज पेगू ने धेमाजी सर्किट हाउस में TMPK के नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है।
असम-अरुणाचल का सीमा विवाद क्या है
असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच 804.1 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है। दोनों राज्यों के बीच वर्षों से लगभग 1,200 स्थानों पर सीमा को लेकर विवाद रहा है। 15 जुलाई 2022 को दोनों मुख्यमंत्रियों ने 'नामसाई घोषणापत्र' (Namsai Declaration) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत 123 विवादित गांवों के मुद्दों को सुलझाने की प्रक्रिया शुरू हुई। 20 अप्रैल 2023 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिससे 71 गांवों से जुड़ा विवाद हल हो चुका है, जबकि शेष 52 गांवों पर क्षेत्रीय समितियों के माध्यम से बातचीत जारी है।