असम चुनाव में जेन जी वोटरों का रुझान क्या रहेगा? राज्य के गायक ज़ुबीन गर्ग की मौत के बाद जेन जी बेहद मुखर रहा है। तो क्या वे इस बार नतीजों को प्रभावित करेंगे?
असम का जेन जी (फाइल फोटो)
असम में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में जेन जी यानी युवा वोटरों की भूमिका भी बेदह अमह है। आखिर क्या सोच रहा है वोटरों का यह तबका? ऐसे कुछ वोटरों से बात करने पर पता चलता है कि यह वर्ग राजनीतिक दलों की बजाय उम्मीदवारों को तरजीह दे रहे हैं। यानी वो उम्मीदवारों की छवि और कामकाज के आधार पर वोट डालेंगे, भले वह किसी भी राजनीतिक दल का क्यों न हो।
पार्टी देखकर नहीं, उम्मीदवारों को वोट मिलेंगे?
ज़्यादातर जेन जी वोटरों का कहना है कि वो योग्य उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। लेकिन आखिर योग्य उम्मीदवार का पैमाना क्या है? गौहाटी विश्वविद्यालय की छात्रा सुकृति बोरा बताती है कि इसके लिए उम्मीदवारों की सोशल मीडिया प्रोफाइल और उनकी गतिविधियों की जानकारी ली जा रही है। राजनीति में बदलाव के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन ज़रूरी है।
हालाँकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर युवा वोटर पार्टी की बजाय उम्मीदवारों को तरजीह देने के अपने फ़ैसले पर अड़े रहे तो कई सीटों पर नतीजे बदल सकते हैं और राजनीतिक दलों का समीकरण गड़बड़ा सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि असम के जेन जी वोटर इस बार अलग तरीके से सोच रहे हैं और उनके वोट उम्मीदवारों की हार-जीत में अहम भूमिका निभा सकते हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस नेता गौरव गोगोई को भी युवा वोटरों की अहमियत का अंदाजा है।
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़, राज्य के लगभग ढाई करोड़ वोटरों में से 29 फीसदी यानी 73 लाख से ज्यादा वोटर 19 से 29 साल के आयु वर्ग में हैं। इसके अलावा क़रीब 62 लाख वोटरों की उम्र 30 से 39 साल के बीच है।
ऊपरी असम के डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के छात्रों का कहना है कि जनरेशन जेड के मतदाताओं के लिए, पार्टी से ज्यादा प्रामाणिकता मायने रखती है। वे उम्मीदवारों और ठोस विकास को ज्यादा महत्व देते हैं। उनका कहना है कि युवा वोटर इस बार आंख मूंद कर किसी पार्टी का समर्थन नहीं करेंगे। हमारा वोट उस उम्मीदवार को ही मिलेगा जो भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाते हुए प्रशासन में पारदर्शिता का वादा करें और अपनी बात पर कायम रहे।
युवा वर्ग का कहना है कि यह चुनाव जेन जी और पुरानी पीढ़ी के बीच टकराव में बदल सकता है। पुरानी पीढ़ी के लोग अब भी पार्टियों को ज्यादा तरजीह देते हैं। हम पिछली बार जीते विधायकों के पांच साल के कामकाज का आकलन करने के बाद ही तय करेंगे कि उसे वोट देना है या नहीं। युवा तबक़े के वोटरों का कहना है कि विधानसभा में एक मज़बूत विपक्ष का होना भी ज़रूरी है। ऐसा नहीं होने की स्थिति में सत्ता में आने वाली पार्टी निरंकुश हो सकती है।
युवा वोटरों का कहना है कि सरकार की कल्याणमूलक योजनाएं तो ठीक हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखना होगा कि इनकी वजह से लोग कहीं आलसी नहीं हो जाएं। नई सरकार के सामने बाढ़, एनआरसी और जुबीन गर्ग की हत्या मामले में उनके परिवार को न्याय दिलाने के साथ ही घुसपैठ पर अंकुश लगाने जैसी पारंपरिक चुनौती होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जेन जी ऐसे उम्मीदवारों के विधानसभा में पहुंचने के पक्ष में हैं जो प्रशासन में पारदर्शिता का वादा करे और आम लोगों के हित में काम करे। युवा वोटरों का कहना है कि इसी सोच की वजह से पिछले लोकसभा चुनाव में जोरहाट सीट से कांग्रेस के गौरव गोगोई चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। उनकी जीत में युवा वोटरों की भूमिका बेहद अहम रही थी। गोगोई इस बार जोरहाट विधानसभा सीट से मैदान में हैं।
एक युवा वोटर मृणालिनी तालुकदार कहती हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में गोगोई को हराने के लिए राज्य सरकार का पूरा मंत्रिमंडल जोरहाट पहुंच गया था। लेकिन संसद में बेहतर कामकाज के कारण लोगों ने उम्मीदवार के तौर पर गोगोई को वोट दिया था, कांग्रेस को नहीं।