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अयोध्या: मुख्य न्यायाधीश गोगोई से मिले यूपी के आला अफ़सर

अयोध्या विवाद पर आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई से उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी और डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने शुक्रवार को मुलाक़ात की। मुख्य न्यायाधीश ने दोनों अफ़सरों को सुप्रीम कोर्ट में बुलाया था। माना जाता है कि मुख्य न्यायाधीश राज्य में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा करने के लिए बुलाया था। रिपोर्टें हैं कि वह अयोध्या पर आने वाले फ़ैसले को देखते हुए तैयारियों की स्थिति जानना चाहते थे। बता दें कि अयोध्या विवाद काफ़ी पेचीदा मामला है और इस पर आने वाले फ़ैसले से देश और इसकी राजनीति पर दूरगामी असर होंगे। 

इस मामले में 16 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हो चुकी है। 17 नवंबर के पहले फ़ैसले की उम्मीद है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत होने वाले हैं। माना जा रहा है कि सेवानिवृत्त होने से पहले वह फ़ैसला सुना सकते हैं। 

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इसी के मद्देनज़र राज्य में और ख़ासकर अयोध्या में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अयोध्या में सुरक्षा को बढ़ाते हुए अब तक 35 कंपनी पीएसी, 14 कंपनी अर्ध सैनिक बलों की तैनाती की जा चुकी है। अयोध्या की ओर जाने वाले हर रास्ते पर बैरिकैड लगाने का काम शुरू हो गया है और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जा चुकी है। अयोध्या के पड़ोसी ज़िले आंबेडकरनगर में आठ सरकारी स्कूलों को अस्थाई जेल बनाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। अगले दो दिनों में 35 से 40 और भी कंपनियाँ पीएसी व अर्धसैनिक बलों की तैनात की जाएँगी। 

फ़ैसले को लेकर हिन्दू व मुसलिम दोनों पक्षों और सभी धार्मिक संगठन से लेकर नागरिक समाज, सभी संयम बरतने की बात कह रहे हैं और इसकी अपील भी कर रहे हैं। 

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लंबे समय के बाद अयोध्या के आस पड़ोस के ज़िलों में नागरिकों की शांति कमेटियों को पुनर्जीवित करते हुए उनकी बैठकें आयोजित की जा रही हैं। 

इधर प्रधानमंत्री मोदी ने भी हाल ही अपने मंत्रियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे फ़ैसले को लेकर कोई भी अनावश्यक बयानबाज़ी नहीं करें। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बीती रात राज्य के उच्चाधिकारियों के साथ कम से कम तीन घंटे तक बैठक की है और सुरक्षा तैयारियों का जायज़ा लिया है। सभी ज़िले के उच्चाधिकारियों को कहा गया है कि वे छोटे शहरों और गाँवों का दौरा कर स्थिति का जायज़ा लें और लोगों को शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील करें। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट उन केसों की सुनवाई कर रहा था जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के 30 सितंबर 2010 के फ़ैसले के ख़िलाफ़ 14 अपीलें दायर की गई हैं। हाई कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच समान रूप से विभाजित करने का आदेश दिया था। लेकिन हाई कोर्ट का यह फ़ैसला कई लोगों को पसंद नहीं आया। यही कारण है कि इस मामले के ख़िलाफ़ कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर कीं।

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