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अयोध्या फ़ैसला: अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने लिखा- धर्मनिरपेक्ष से हिंदू राष्ट्र की ओर

अयोध्या विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी प्रमुखता से ख़बर की है। अधिकतर बड़े मीडिया समूहों ने इस फ़ैसले को प्रधानमंत्री मोदी और उनके दल भारतीय जनता पार्टी के ‘हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे’ की जीत बताया। इन मीडिया समूहों ने उन घटनाक्रमों का ज़िक्र भी किया है जिसमें बीजेपी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान ‘हिंदुवादी एजेंडे’ को प्रचार का केंद्र बिंदु बनाया था और देश भर में लिंचिंग की जो घटनाएँ हुई हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान के अख़बारों ने भी इस पर प्रमुखता से रिपोर्टिंग की है और इसमें इस फ़ैसले से हिंदू और मुसलमान के बीच रिश्ते ख़राब होने की आशंका जताई गई है। 

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लिखा, ‘भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक पवित्र स्थल पर दशकों पुराने विवाद पर शनिवार को हिंदुओं के पक्ष में फ़ैसला सुनाया। मुसलमान इस पर दावा करते थे। इस फ़ैसले से धर्मनिरपेक्ष आधार वाले देश को ‘हिंदू’ बनाने के प्रधानमंत्री और उनके समर्थकों के प्रयास को बड़ी जीत मिली है।’

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अख़बार ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी ने इसी साल मई में 'हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे' को लेकर अभियान चलाया था। अख़बार ने यह भी लिखा कि बीजेपी भारत को ‘हिंदू’ के रूप में स्थापित करने के लिए मंदिर बनाने के प्रयास को एक महत्वपूर्ण क़दम मानती है। 

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, ‘कई हिंदुओं का मानना ​​है कि विवादित स्थल उनके पूजनीय भगवान राम का जन्मस्थान था और मसजिद बनाने के लिए मुग़ल शासन के दौरान एक पूर्व मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था।...’

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लिखा, ‘कुछ हिंदू राष्ट्रवादी उस इतिहास को मिटाना चाहते हैं और इसे उन प्रतीकों से प्रतिस्थापित करना चाहते हैं जो भारत को एक हिंदू राष्ट्र के रूप में सुदृढ़ करते हों। भारत की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या हिंदू है।’

अख़बार ने यह भी लिखा कि 1992 में मसजिद विध्वंस के बाद उपजा सांप्रदायिक तनाव आज भी बना हुआ है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, ‘भारत के कई मुसलमानों को डर है कि अदालत के फ़ैसले से उन्हें दूसरी श्रेणी का नागरिक समझा जाएगा और हिंदू कट्टरपंथी और मज़बूत होंगे। हालाँकि कई लोग अनिच्छापूर्वक ही इसको स्वीकार करते हुए दिखाई दिए, वे एक ऐसे भारत को देखते हैं जहाँ मुसलमानों की मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मार देना) को सरकार द्वारा शायद ही निंदा की जाती है और जहाँ सत्तारूढ़ दल के सदस्य सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े पाए जाते हैं।’

अख़बार ने यह भी लिखा कि अदालत ने यह भी फ़ैसला दिया है कि अयोध्या में ही एक प्रमुख स्थल पर मसजिद बनाने के लिए मुसलमानों को पाँच एकड़ ज़मीन दी जाएगी।

वाशिंगटन पोस्ट

‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने लिखा है, ‘भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फ़ैसला दिया कि उस विवादित मसजिद के स्थल पर एक हिंदू मंदिर बनाया जा सकता है, जिसने देश को दशकों तक प्रभावित किया है।’

अख़बार के अनुसार, ‘फ़ैसले ने संघर्ष के केंद्र में रही ज़मीन को मुसलिम आपत्तियों के बावजूद हिंदू पक्ष को दे दिया और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर है।’

अख़बार ने लिखा है, ‘अयोध्या में हिंदू भगवान राम के लिए एक मंदिर का निर्माण हिंदू राष्ट्रवादियों का एक दीर्घकालिक लक्ष्य है और भारत की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का एक प्रमुख उद्देश्य है।’

‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने लिखा है, ‘मोदी ने मई में दोबारा एक ज़बरदस्त जीत हासिल की और वह अपने एजेंडे को लागू करने के लिए तेज़ी से आगे बढ़े। मोदी और उनकी पार्टी के लिए, भारत मूल रूप से एक हिंदू राष्ट्र है, न कि देश के संस्थापकों द्वारा लाया गया धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र।’

अख़बार ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया भी प्रकाशित की है। इसने लिखा है, ‘मोदी ने फ़ैसले का स्वागत किया और शांति बनाए रखने का आह्वान किया।’ 

'अल जज़ीरा' की रिपोर्ट

'अल जज़ीरा' ने भी अयोध्या विवाद पर फ़ैसले को प्रमुखता से छापा है। इसने लिखा है कि देश भर में कड़ी सुरक्षा के बीच अयोध्या में विवादित ज़मीन को मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं को दिया गया। इसने यह भी लिखा है कि मुसलिमों को पाँच एकड़ ज़मीन दी जाएगी। इस रिपोर्ट में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील ज़फ़रयाब जिलानी की प्रतिक्रिया को भी प्रमुखता दी गई है और हैदराबाद में नल्सार विश्वविद्यालय के चांसलर फैज़ान मुस्तफ़ा के बयान को भी जगह दी है जिसमें उन्होंने फ़ैसले को 'विवादास्पद' क़रार दिया है। इसमें कई लोगों की प्रतिक्रियाएँ भी छापी गई हैं जिसने इस फ़ैसले से असहमति जताई है। 

गार्डियन में हन्ना एलिस-पीटरसन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, ‘ज़बरदस्त चुनावी जीत के छह महीने बाद आया यह फ़ैसला भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के लिए एक और बड़ी जीत है, जिसने अयोध्या में राम मंदिर की बहाली को अपने हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे के केंद्र में रखा है।’

‘बीबीसी’ 

‘बीबीसी’ ने रिपोर्ट दी है कि उसके संवाददाताओं का कहना है कि उन्होंने फ़ैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत के बाहर ‘जय श्री राम’ के जयकारे सुने। ‘बीबीसी’ के साउतिक बिस्वास ने रिपोर्ट में फ़ैसले का आगे विश्लेषण करते हुए लिखा, ‘यकीनन दुनिया के सबसे विवादास्पद संपत्ति विवादों में से एक का अंत हो गया है।…’

‘सीएनएन’

‘सीएनएन’ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं को विवादित पवित्र स्थल पर निर्माण की अनुमति दी।’ हेलेन रेगन, स्वाति गुप्ता और मनवीना सूरी की इस रिपोर्ट में फ़ैसले को समझाया गया है और राम जन्मभूमि-बाबरी मसजिद भूमि विवाद मामले का संक्षिप्त इतिहास दिया गया है। सीएनएन ने लिखा कि शनिवार को अयोध्या फ़ैसले ने ‘देश के सबसे अधिक राजनीतिक ज़मीन विवाद में से एक’ को ख़त्म कर दिया।

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‘रिश्ते ख़राब होंगे’

इस बीच पाकिस्तान स्थित डॉन ने अपनी रिपोर्ट में भारत के मुसलिम और हिंदू समुदायों के बीच रिश्ते को और ख़राब होने की आशंका जताई है। डॉन ने लिखा, ‘अदालत के सर्वसम्मत फ़ैसले से भारत के हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भयावह संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की आशंका है। इसके 1.3 बिलियन लोगों में से 14 प्रतिशत मुसलिम हैं।’ 

पाकिस्तान के ही ‘जियो’ टीवी ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्युन’ ने भी कुछ ऐसी ही रिपोर्ट दी है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में विवादित स्थल रामलला को और मसजिद के लिए मुसलिम पक्ष को दूसरी ज़मीन देने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि केंद्र सरकार तीन महीने में ट्रस्टी बोर्ड गठित करे। मंदिर के ट्रस्टी बोर्ड में निर्मोही अखाड़ा को उचित प्रतिनिधित्व देने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने ज़मीन को तीन हिस्सों में बाँटने का इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले को भी ग़लत बताया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को आदेश दिया है कि मंदिर निर्माण के लिए वह 3 महीने के भीतर ट्रस्ट बनाए। कोर्ट ने मुसलिमों को भी अयोध्या में 5 एकड़ दूसरी ज़मीन देने का आदेश दिया है।
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