देश अभी राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि बिहार से एक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल के सघन चिकित्सा कक्ष (ICU) में तड़के भीषण आग लग गई। इस हादसे में कई मरीजों के मारे जाने की आशंका है और दर्जनों लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
  • अपडेटः फायर ब्रिगेड के अधिकारी ने मीडिया को दिए गए बयान में 10-15 लोगों के मरने की बात कही है। परिजन तमाम अस्पतालों में अपने मरीजों को तलाशने में परेशान हो रहे हैं। अस्पताल की तरफ से यह जानकारी नहीं दी जा रही है कि गायब मरीज़ कहां हैं।
यह दर्दनाक हादसा मुजफ्फरपुर जिले के ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित प्रसिद्ध 'प्रसाद हॉस्पिटल' (Prasad Hospital) में हुआ। गुरुवार (4 जून 2026) को तड़के करीब 3:00 बजे जब मरीज और उनके तीमारदार सो रहे थे, तब अचानक अस्पताल के ICU वार्ड में आग भड़क उठी।
मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन ने मीडिया को बताया कि फायर ब्रिगेड की टीमों ने तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पा लिया है। आधिकारिक तौर पर शुरुआती रिपोर्ट में 4 मरीजों की मौत की पुष्टि की गई है। हालांकि, स्थानीय सूत्रों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतकों का आंकड़ा 10 तक पहुंच सकता है और 25 से अधिक मरीज गंभीर रूप से झुलस गए हैं। हताहतों की संख्या में अभी और बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है।
आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पूरे वार्ड में घना धुआं भर गया। अस्पताल के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए खिड़कियां तोड़ीं और मरीजों को बाहर निकालने का प्रयास किया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की करीब 8 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और भारी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। झुलसे और प्रभावित मरीजों को तुरंत शहर के अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है, जहां उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।
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मुज़फ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में आग कैसे लगी

शुरुआती जांच और अनुमानों के अनुसार, आग लगने की वजह बिजली का शॉर्ट-सर्किट (Short Circuit) मानी जा रही है। हालांकि, प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय तकनीकी जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में सुरक्षा उपाय की क्या स्थिति है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

दिल्ली और मुज़फ्फरपुर का दर्द ेएक ही- कहां हैं सुरक्षा उपाय

देश में महज 24 घंटे के भीतर बैक-टू-बैक दो बड़े अग्निकांडों (पहले दिल्ली का होटल और अब बिहार का अस्पताल) ने देश की इमारतों, विशेषकर कारोबारी और अस्पतालों में लागू फायर सेफ्टी नियमों (Fire Safety Norms) की पोल खोल कर रख दी है। अस्पतालों के आईसीयू जैसे अति-संवेदनशील वार्डों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और शॉर्ट-सर्किट जैसी घटनाएं सीधे तौर पर प्रशासनिक और प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करती हैं। फिलहाल मुजफ्फरपुर प्रशासन मृतकों और घायलों की शिनाख्त करने तथा प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाने में जुटा हुआ है। 
आग लगने वाले दिन और आग लगने के दो चार दिन तक उस जगह की सेफ्टी लापरवाही पर शोर मचता है लेकिन उसके बाद सब कुछ शांत हो जाता है। मीडिया फिर उस जगह की खबर लेने नहीं जाता है कि वहां बाद में सुरक्षा उपाय दोबारा से किए गए या नहीं। दिल्ली के जिस होटल में बुधवार 3 जून 2026 को आग लगी थी, उसके बाद तमाम कहानियां सामने आईं। होटल मालिक ने 6 की जगह 25 कमरे बना रखे थे। आने-जाने का रास्ता एक ही था। होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार भी कर लिया गया। सवाल ये है कि होटल में अवैध रूप से कमरे किस सरकारी एजेंसी ने बनने दिए। किस एजेंसी पर जिम्मेदारी थी कि होटल में आने-जाने का रास्ता एक ही होने के आधार पर उसे सील कर दिया जाता। लेकिन ये बातें अब हो रही हैं।
बता दें कि बुधवार (3 जून 2026) की सुबह करीब 8:45 बजे दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर (हौज रानी) इलाके में स्थित 'फ्लोरिश स्टे बीएंडबी' (Flourish Stay B&B) नामक एक पांच मंजिला इमारत में भयंकर आग लग गई थी। इस हादसे में 21 लोगों की दम घुटने (Asphyxiation) और जलने के कारण मौत हो गई थी। मृतकों में 17 विदेशी नागरिक शामिल थे, जो मुख्य रूप से मध्य एशिया और अफ्रीका के रहने वाले थे।

दिल्ली के होटल में आग लगने की खबर यहां पढ़ें
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जांच में सामने आया कि इस बीएंडबी (Bed & Breakfast) होमस्टे के पास केवल 6 कमरे संचालित करने की अनुमति थी, लेकिन मालिक ने अवैध रूप से इसे 25 कमरों में तब्दील कर रखा था। इसके अलावा, पूरी इमारत की खिड़कियां सील थीं, जिससे लोगों को भागने का रास्ता नहीं मिला। दिल्ली पुलिस ने लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के आरोप में होटल के सह-मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है।