जन सुराज में शामिल होने वाले अन्य लोगों में पूर्व आरजेडी एमएलसी रामबली सिंह चंद्रवंशी शामिल थे, जिन्हें हाल ही में अनुशासनहीनता के आधार पर विधान परिषद से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा भी शामिल हुए, जिन्होंने भाजपा के टिकट की उम्मीद में आईपीएस से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन लोकसभा बक्सर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। आनंद मिश्रा हार गए थे और जमानत जब्त हो गई थी।
प्रशांत किशोर ने जो राजनीतिक लाइन पकड़ी है, उससे भाजपा को सीधा फायदा है। यानी 37 फीसदी दलित और मुस्लिम वोट आरजेडी और जेडीयू की ताकत है। ये दोनों समुदाय भाजपा को वोट नहीं देते। क्योंकि इनकी नजर मुख्यरूप से इन्हीं दो समुदायों के वोटों पर है। इसीलिए प्रशांत किशोर को भाजपा की बी टीम कहा जाता है। क्योंकि बिहार में जिस तरह की दलित-मुस्लिम राजनीति प्रशांत किशोर करना चाहते हैं, उससे भाजपा को जबरदस्त फायदा होगा। इससे यह भी संकेत मिलता है कि अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा अकेले दम पर सरकार बनाना चाहती है। उसे प्रशांत किशोर की पार्टी के जरिए दलित-मुस्लिम वोट बंटने की उम्मीद है।
प्रशांत किशोर खुद ब्राह्मण हैं, लेकिन वो दलितों और मुसलमानों से जाति और धार्मिक आधार पर मतदान बंद करने और "अपने बच्चों के भविष्य" को ध्यान में रखने की अपील कर रहे हैं। लेकिन प्रशांत किशोर जिस जाति से आते हैं, वो खुद आंख बंद कर भाजपा को वोट देती है, उसके लिए प्रशांत किशोर का कोई संदेश नहीं है।
उनके पास भाजपा के कोर वोटर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य के लिए कोई अपील क्यों नहीं है। हाल ही में, किशनगंज में एक सभा में, उन्होंने क्यों कहा कि जन सुराज पार्टी 2025 के विधानसभा चुनावों में 75 मुसलमानों को मैदान में उतारेगी।