छत्तीसगढ़ में भीड़ हिंसा की गंभीर घटना सामने आई है। अल्पसंख्यक समुदाय के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई, हालात काबू में लाते समय कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के डुटकैया गांव में रविवार को सांप्रदायिक तनाव फैल गया। एक भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के घरों पर हमला कर दिया। भीड़ ने आधा दर्जन से ज्यादा घरों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। पुलिस महिलाओं और बच्चों समेत दो दर्जन से ज्यादा लोगों की जान बचाने के लिए कई घंटों तक ढाल बनकर खड़ी रही। इस दौरान कम से कम सात पुलिसकर्मी घायल हो गए। अल्पसंख्यक परिवारों को गांवों से बाहर शरण लेना पड़ा है।
पुलिस के अनुसार, यह हिंसा इससे कुछ घंटे पहले हुई घटनाओं की वजह से भड़की। रविवार की सुबह आरिफ और रायपुर से आए उसके दो साथियों ने गांव में चार लोगों पर हमला कर दिया। 2024 में डुटकैया गांव के रहने वाले आरिफ खान और उसके दो साथियों पर गांव के चावेश्वर शिव मंदिर को तोड़-फोड़ करने का आरोप लगा था। उस समय आरिफ नाबालिग था, इसलिए उसे माना जुवेनाइल सुधार गृह में रखा गया। बाद में उसी साल उसे जमानत मिल गई, लेकिन वह गाँव नहीं लौटा। रविवार की सुबह आरिफ और रायपुर के अपने दो साथियों के साथ लौटा था। जिनकी पिटाई की गई उनमें से कम से कम एक व्यक्ति मंदिर तोड़-फोड़ मामले का गवाह था।
पुलिस ने आरिफ और उसके साथियों के खिलाफ चार मामले दर्ज किए और गांव वालों को भरोसा दिया कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। लेकिन इसके बाद कुछ लोगों ने आरिफ के घर पर तोड़-फोड़ शुरू कर दी। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस टीम गांव पहुंची और लोगों को समझाया कि कोई और झगड़ा न करें।
लेकिन यह शांति ज्यादा देर नहीं टिकी। जल्द ही डुटकैया और आसपास के गांवों से सैकड़ों लोगों की बड़ी भीड़ इकट्ठा हो गई। वे लाठियां, ईंट-पत्थर, पत्थर और केरोसिन की बोतलें लेकर आए। भीड़ ने गांव में रहने वाले 10 मुस्लिम परिवारों के घरों में घुसने की कोशिश की। इन परिवारों ने खुद को घरों में बंद कर लिया था।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस अधिकारी ने बताया, 'भीड़ ने पहले वाहनों में आग लगा दी और मुस्लिम परिवारों के घरों में घुसने की कोशिश की। हम संख्या में कम थे और राज्य में चल रहे राजिम कुंभ मेले की वजह से पुलिसकर्मियों की कमी थी। कई घंटों तक हमने ढाल बनकर खड़े रहकर महिलाओं और बच्चों को बचाया। भीड़ ने पत्थरबाजी की और पड़ोस के घरों से घुसने की कोशिश की।'
रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने भीड़ को रोकने की पूरी कोशिश की। रात 9 बजे तक अतिरिक्त पुलिस बल दो चरणों में पहुंचा। तब तक पुलिस ने फँसे हुए लोगों को एक जगह इकट्ठा किया। आखिरी बल आने के बाद पुलिस ने बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया और क़रीब 20 लोगों को बस में बिठाकर सुरक्षित जगह ले गई। इन परिवारों में से दो वयस्क घायल हुए।
बाद में पुलिस को पता चला कि मदरसे में 6-7 बच्चे फंसे हैं। उन्हें भी बचाया गया। इस दौरान छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। आधी रात के आसपास स्थिति नियंत्रण में आई। पुलिस जब जाने की तैयारी कर रही थी, तभी भीड़ में से एक महिला ने एक पुलिसकर्मी पर ईंट फेंकी, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई। अन्य पुलिसकर्मियों को भी मामूली या चोटें आईं।
दूसरे दिन दोपहर को जब रिपोर्टर गांव पहुंचे, तो जलते हुए वाहन और आंशिक रूप से जले घर दिखे। गांव में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी। सभी मुस्लिम परिवार गांव छोड़कर कहीं और शरण लिए हुए हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि 2024 की घटना के बाद आरिफ से जुड़े परिवार डर की वजह से गांव छोड़ गए थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें वापस आने के लिए मनाया था। पुलिस ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि घटना के बाद भीड़ इकट्ठा हुई। पुलिस ने तुरंत मौक़े पर पहुँचकर स्थिति संभाली और न्यूनतम बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। घायलों को अस्पताल भेजा गया। दंगा फैलाने के संबंध में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। कुछ रिपोर्टों में तीन लोगों की गिरफ्तारी की बात कही गई है। स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन गांव में पुलिस की भारी तैनाती जारी है।