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फ़िल्म 'मोतीचूर-चकनाचूर' का एक दृश्य।

‘मोतीचूर-चकनाचूर’ दिखाती है रोज़मर्रा की ज़िन्दगी

फ़िल्म- मोतीचूर-चकनाचूर

डायरेक्टर- देव मित्र बिस्वाल

स्टार कास्ट- नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी, आथिया शेट्टी, विभा छिब्बर, नवनी परिहार

शैली- कॉमेडी-ड्रामा

रेटिंग- 3/5

डायरेक्टर देवा मित्रा बिस्वाल ने पहली फ़िल्म डायरेक्ट की है जिसका नाम है ‘मोतीचूर-चकनाचूर’, जो कि 15 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। डायरेक्टर देवा मित्रा ने फि़ल्म में एक कॉमेडी कहानी के साथ फुल ड्रामा का तड़का दिया है। इसके साथ ही इसमें नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी और आथिया शेट्टी लीड रोल में हैं। तो आइये जानते हैं कि क्या ख़ास है इस फ़िल्म में-

‘मोतीचूर-चकनाचूर’ की कहानी भोपाल में रहने वाली अनीता उर्फ़ एनी (आथिया शेट्टी) से शुरू होती है, जो कि अपनी शादी के लिए 10वाँ लड़का रिजेक्ट कर देती है। तो वहीं दूसरी तरफ़ दुबई में नौकरी कर रहे 36 साल के पुष्पेंद्र त्यागी (नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी) अपनी नौकरी छोड़ कर 4 साल बाद अपने घर लौट रहे हैं। मुख्य कहानी है कि पुष्पेंद्र त्यागी अभी तक कुँवारे हैं और उन्हें बस अब कैसे भी शादी करनी है। दूसरी तरफ़ एनी के सपने शादी कर के विदेश जाने के हैं।

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कहानी में आता है ट्विस्ट और एनी पुष्पेंद्र शादी कर लेते हैं। शादी के बाद एनी को पता चलता है कि उसके पति की दुबई वाली नौकरी छूट गई है। तो अब मुद्दा यह है कि जिस लड़की ने विदेश के सपने पूरे करने के लिए 10 रिश्ते ठुकरा दिए वह अब विदेश कैसे जाएगी? इसके अलावा पुष्पेंद्र को अब नौकरी कहाँ मिलेगी और शादी उसकी बची या तबाह होगी? यह सब जानने के लिए आपको सिनेमाघर जाना पड़ेगा, तो जाइये और ये फ़िल्म देख आइये।

कलाकारों की अदाकारी

नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी का वह डायलॉग याद है ‘कभी-कभी लगता है कि अपुन ही भगवान है।’ बस नवाज़ को फ़िल्म में देखकर ऐसा ही लगता है कि ये तो किसी भी रोल में परफ़ेक्ट ही हो जाते हैं। नवाज़ ने अपनी शानदार एक्टिंग और भोपाली भाषा में कमाल का काम किया है। आथिया की एक्टिंग तो काफ़ी हद तक ठीक दिखी लेकिन वह भोपाली टोन को पकड़ने में कामयाब नहीं रहीं। इसके अलावा अन्य रोल में विभा छिब्बर, नवनी परिहार, भूमिका दुबे, संजीव वत्स ने अपने किरदार को मज़बूती से निभाए हैं।

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डायरेक्शन

डायरेक्टर देव मित्र बिस्वाल ने पूरी मेहनत के साथ फ़िल्म 'मोतीचूर-चकनाचूर' को बनाया है और इसमें पहली बार नवाज़ और आथिया साथ में नज़र आए हैं। डायरेक्टर ने दो लोगों के अलग-अलग सपने के साथ दहेज न लेने के मैसेज को भी बीच में दिखाया है। इस फ़िल्म की कहानी थोड़ी-सी कमज़ोर और खींची हुई दिखी लेकिन देव मित्र का डायरेक्शन अच्छा दिखाई दिया।

फ़िल्म 'मोतीचूर-चकनाचूर' का एक दृश्य।

क्यों देखें फ़िल्म?

नवाज़ुद्दीन जिन्हें आपने कुछ दिनों पहले ‘सेक्रेड गेम्ड 2’ में देखा होगा उनकी ज़बरदस्त एक्टिंग के लिए यह फ़िल्म देख सकते हैं। इसके साथ ही अगर आप इस वीकेंड हल्की कॉमेडी ड्रामा फ़िल्म देखना चाहते हैं तो यह फ़िल्म आप फ़ैमिली के साथ देख सकते हैं। फ़िल्म की कहानी और उसमें दिखाए जाने वाले तरीक़े आपको अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जोड़ेंगे। जो आम लोगों के घरों में शादी की चिंता, शादी में दहेज की माँग और नौकरी का तनाव होता है वही इस फ़िल्म में आपको देखने को मिलेगा।

क्यों न देखें फ़िल्म?

फ़िल्म मोतीचूर-चकनाचूर आपको फ़र्स्ट हाफ़ में तो मजेदार लगेगी लेकिन सेकंड हाफ़ में आप थोड़ा बोर हो सकते हैं क्योंकि इसकी कहानी थोड़ी खींच दी गई है। इसमें थोड़ी-सी एडिटिंग की जा सकती थी और यहीं पर आप बोर हो सकते हैं।

दीपाली श्रीवास्तव
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