केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के ख़त्म होने के बाद अब इस मामले में दर्ज एफआईआर को वापस लिए जाने की बारी है। लेकिन पुलिस का कहना है कि उसे अभी तक इन एफआईआर को वापस लेने के संदर्भ में आदेश मिलने का इंतज़ार है। सरकार और 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बीच हुई बातचीत में छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने का आश्वासन दिया गया था।

इस लिहाज से अब 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और 22 जुलाई को दर्ज अन्य मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। हालाँकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह इस संबंध में केंद्र सरकार के आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रही है। आदेश मिलने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली पुलिस के कुछ अन्य अधिकारियों ने साफ़ किया है कि केवल मौखिक घोषणा के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने द हिंदू से कहा कि सरकार की ओर से आधिकारिक सूचना आने का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि आदेश मिलने के बाद मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
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क्या FIR वापस ली जा सकती है?

वैसे, एक बार FIR दर्ज होने के बाद इसे वापस लिए जाने जैसा कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि केस को दूसरे तरीक़े से ख़त्म किया जा सकता है। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा कि कानूनी तौर पर किसी एफआईआर को सीधे 'वापस' नहीं लिया जाता।

रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि किसी एफआईआर के साथ आम तौर पर तीन तरह की कार्रवाई हो सकती है। जाँच पूरी होने के बाद आरोप पत्र दाखिल किया जाए, पर्याप्त सबूत न मिलने पर क्लोजर रिपोर्ट या कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की जाए और राज्य सरकार अभियोजन वापस लेने का फ़ैसला करे। अधिकारी के अनुसार यदि सरकार अभियोजन वापस लेने का आधिकारिक आदेश देती है तो पुलिस आगे की जांच नहीं करेगी और उसी आधार पर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

कॉकरोच जनता पार्टी ने दावा किया है कि सरकार ने एफआईआर वापस लेने का फैसला लिखित रूप में देने का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि यह दस्तावेज मंगलवार तक सौंपा जा सकता है।

15 एफ़आईआर दर्ज हैं

दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई से 23 जुलाई के बीच हुई घटनाओं को लेकर कुल 15 एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई झड़पों में कम से कम 129 सुरक्षाकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। इसके बाद हुई अन्य झड़पों में भी 11 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात कही गई। कर्तव्य पथ थाने में दर्ज एक प्रमुख एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1) यानी हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराएं लगाई गई थीं।

इसके अलावा दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने जैसी धाराएं भी शामिल की गई थीं। एफआईआर के अनुसार, 20 जुलाई की सुबह से संसद मार्ग और रेल भवन के आसपास पुलिस बल तैनात था। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पथराव किया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने दावा किया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 'हल्का लाठीचार्ज' और आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

पुलिस ने पहले बताया था 'बड़ी साजिश'

इससे पहले दिल्ली पुलिस इन घटनाओं को एक 'बड़ी साजिश' का हिस्सा बता चुकी थी। जाँच के दौरान स्पेशल सेल ने पहला मामला अपने हाथ में लेकर आंदोलन की कथित साजिश की जांच शुरू की थी। पुलिस ने बताया था कि वह 15 टेराबाइट से अधिक वीडियो फुटेज की जांच कर रही है।

इसके अलावा जंतर-मंतर के मंच से दिए गए भाषण, सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों की भूमिका, कथित फंडिंग, लॉजिस्टिक सपोर्ट और एक कथित 'टूलकिट' की भी जांच की जा रही थी।

पुलिस का दावा था कि शुरुआती अनुमान 10 से 15 हजार प्रदर्शनकारियों का था, लेकिन वास्तविक संख्या इससे काफी अधिक रही और कई अलग-अलग रास्तों से लोग संसद की ओर बढ़े। इसी आधार पर व्यापक साजिश की जांच शुरू की गई थी।
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जेपी नड्डा ने क्या कहा?

केंद्र सरकार की ओर से छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने वाले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि बैठक में कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि सरकार ने यह भरोसा दिया है कि आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी और जहां एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, उन्हें वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि भाजपा शासित राज्यों में दर्ज मामलों पर भी लागू होगा।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन भले ही ख़त्म हो गया हो, लेकिन अब अगला बड़ा सवाल यह है कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों का क्या होगा। सरकार की ओर से एफआईआर वापस लेने का आश्वासन दिया जा चुका है, लेकिन दिल्ली पुलिस का कहना है कि जब तक उसे औपचारिक आदेश नहीं मिलता, तब तक कानूनी प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। ऐसे में अब छात्रों और प्रदर्शनकारियों की नजर सरकार के अगले आधिकारिक कदम पर टिकी हुई है।