जंतर मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए के तहत तीन महीने के लिए विशेष अधिकार दिए जाने का नोटिफिकेशन सामने आया है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इन प्रदर्शनों से जोड़कर देखा। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने सफाई जारी की और कहा कि यह कोई नया फ़ैसला नहीं है, बल्कि हर तीन महीने में होने वाली नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है।

दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 19 जुलाई 2026 से 18 अक्टूबर 2026 तक दिल्ली पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए, 1980 के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन के आदेश जारी करने का अधिकार दिया गया है। इस अवधि के दौरान पुलिस आयुक्त ज़रूरत पड़ने पर एनएसए के प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर सकते हैं। यह आदेश 18 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा जब तक कि इसे पहले वापस लिया नहीं जाए या संशोधित न किया जाए।
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सोशल मीडिया पर उठे सवाल

यह अधिसूचना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दावा किया कि जंतर मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए सरकार ने दिल्ली पुलिस को यह अधिकार दिया है। कई मीडिया रिपोर्टों में भी इस अधिसूचना को मौजूदा आंदोलन से जोड़कर देखा गया। इसके बाद पुलिस ने इस पर सफाई जारी की।

दिल्ली पुलिस ने दी सफाई

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की प्रतिक्रिया में कहा कि ग़लत सूचना नहीं फैलाएँ, यह रूटीन अधिसूचना है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह अधिकार हर तीन महीने में नियमित रूप से बढ़ाए जाते हैं और इसका मौजूदा प्रदर्शनों से कोई संबंध नहीं है। पुलिस ने 'एक्स' पर जारी बयान में कहा कि यह रिन्यूअल 7 जुलाई 2026 को जारी किया गया था, जबकि सीजेपी का आंदोलन बाद में तेज हुआ।
दिल्ली पुलिस ने कहा, 'यह कहना ग़लत है कि सीजेपी प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस आयुक्त को एनएसए के अधिकार दिए गए हैं। यह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे कुछ रिपोर्टों में ग़लत संदर्भ में पेश किया गया है।' पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और अफवाहों या भ्रामक सूचनाओं को साझा न करें।

एनएसए क्या है?

राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून यानी एनएसए के तहत प्रशासन किसी व्यक्ति को सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा मानने पर निवारक हिरासत में ले सकता है। इस क़ानून के तहत गिरफ्तारी सामान्य आपराधिक मामलों से अलग होती है क्योंकि इसका उद्देश्य किसी संभावित ख़तरे को पहले ही रोकना होता है।

जंतर मंतर पर जारी है आंदोलन

इधर, जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन लगातार जारी है। यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के खिलाफ शुरू हुआ था। इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी कर रही है। बाद में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इसमें शामिल हुए और उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की।

जंतर मंतर और संसद मार्ग के आसपास प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच बुधवार देर रात एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर आ गए, जिसके बाद हालात नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े गए। वहीं प्रदर्शनकारियों पर पुलिस पर पथराव करने का आरोप भी लगाया गया। स्थिति को देखते हुए मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित की गईं।

जंतर मंतर पर आंदोलन क्यों हो रहा है?

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत सीजेआई सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर एक व्यंग्य अभियान के रूप में हुई थी। बाद में यह देशभर के युवाओं का आंदोलन बन गया। प्रदर्शनकारी लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल दिल्ली पुलिस यह दोहरा रही है कि एनएसए के तहत अधिकारों का रिन्यूअल केवल नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे मौजूदा छात्र आंदोलन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।