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प्रतीकात्मक और फाइल फोटो

चुनाव आयोग ने जारी किया फाइनल डाटा लेकिन इसमें कुल मतदाताओं की संख्या नहीं बताई, विपक्ष कर रहा सवाल 

लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण के मतदान के 11 दिन और दूसरे चरण के मतदान के चार दिन बाद मंगलवार 30 अप्रैल को चुनाव आयोग ने दोनों चरणों के मतदान से जुड़े फाइनल आंकड़े जारी किए हैं।

हालांकि आयोग ने अभी भी संसदीय क्षेत्रों में मतदाताओं की कुल संख्या नहीं बताई है। इसको लेकर अब एक नया विवाद उठता दिख रहा है। विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं कि आयोग ने एक तो काफी देर से फाइनल डाटा जारी किया लेकिन इसमें भी संसदीय क्षेत्रों में कुल मतदाताओं की संख्या का डाटा नहीं दिया है। इसके कारण नतीजों में हेरफेर को लेकर उनकी चिंता बनी हुई है। 

चुनाव आयोग के मुताबिक 19 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान में 66.14 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया था वहीं दूसरे चरण में 26 अप्रैल को 66.71 प्रतिशत मतदान हुआ है। पहले चरण में 66.22 प्रतिशत पुरुषों और 66.07 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
इस दौरान 31. 32 प्रतिशत थर्ड जेंडर मतदाताओं ने भी मतदान किया है। वहीं दूसरे चरण में 66.99 प्रतिशत पुरुष मतदाताओं ने वहीं 66.42 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने मतदान किया है। इस चरण में थर्ड जेंडर के 23.86 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया था। 

पहले और दूसरे चरण के मतदान के कई दिन बीतने के बाद फाइनल डाटा जारी करने को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा है कि आमतौर पर मतदान खत्म होने के 24 घंटों के अंदर ये डाटा जारी कर दिए जाते हैं लेकिन इस बार के चुनाव में काफी देर से ये जारी किए गए हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को ये डाटा काफी पहले ही जारी कर देना चाहिए था। लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण में 102 सीटों पर 19 अप्रैल को जबकि 88 सीटों पर दूसरे चरण में 26 अप्रैल को मतदान हुआ था। अंग्रेजी अखबार द हिंदू की एक रिपोर्ट कहती है कि चुनाव आयोग ने पहले और दूसरे चरण के मतदान के प्रतिशत से जुड़ा फाइनल आंकड़ा जारी कर दिया है। 
हालांकि, चुनाव आयोग ने प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या जारी नहीं की। विपक्षी दल जो कई दिनों से इस मुद्दे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रमुखता से उठा रहे थे ने चुनाव आयोग द्वारा फाइनल डाटा जारी करने के बाद इस ओर ध्यान दिलाया है। 

2019 के पिछले आम चुनाव के दौरान, पहले चरण के मतदान का फाइनल डाटा मतदान के दो दिन बाद ही आयोग ने जारी कर दिया था। 2019 में पहले चरण के लिए मतदान प्रतिशत 69.43 प्रतिशत और दूसरे चरण के लिए 69.44 प्रतिशत था। पिछली बार की तुलना में इस बार दोनों चरणों में मतदान प्रतिशत में गिरावट देखी गई है।

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चुनाव आयोग को पारदर्शी होना चाहिए

द हिंदू की रिपोर्ट कहती है कि जैसे ही चुनाव आयोग ने मंगलवार देर रात आंकड़े जारी किए, सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि, आखिरकार ईसीआई ने पहले 2 चरणों के लिए अंतिम मतदान आंकड़े पेश किए हैं जो काफी हद तक, सामान्य से मामूली नहीं, बल्कि अधिक हैं। 
लेकिन प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या क्यों नहीं बताई है? जब तक यह आंकड़ा ज्ञात न हो,ये प्रतिशत निरर्थक है। उन्होंने लिखा है कि परिणामों में हेरफेर की आशंकाएं अब भी बरकरार हैं क्योंकि गिनती के समय कुल मतदाता संख्या में बदलाव किया जा सकता है।  
2014 तक प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या हमेशा ईसीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध थी। ईसीआई को पारदर्शी होना चाहिए और इस डाटा को सामने रखना चाहिए। 
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि मैं प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या की बात कर रहा हूं, न कि मतदान किए गए वोटों की संख्या की, जो डाक मतपत्रों की गिनती के बाद ही पता चलेगा। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या क्यों नहीं बताई जा रही है? ईसीआई को इसका जवाब देना होगा।
वहीं तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा है कि दूसरा चरण समाप्त होने के चार दिन बाद, चुनाव आयोग मतदान का फाइनल आंकड़ा जारी करता है। चुनाव आयोग द्वारा 4 दिन पहले जारी की गई संख्या से 5.75 प्रतिशत की बढ़ोतरी (मतदान में उछाल)! क्या यह सामान्य है?
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क़मर वहीद नक़वी
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