दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद ABVP ने MCD मुख्यालय में तोड़फोड़ कर विरोध प्रदर्शन किया। जबकि दिल्ली, MCD और केंद्र में बीजेपी की सरकार है। क्या यह कार्रवाई NSUI के राहत कार्य को लेकर बने नैरेटिव का जवाब थी? जानिए पूरा मामला और राजनीतिक विवाद।
बिल्डिंग हादसे के बाद एनएसयूआई और एबीवीपी की प्रतिक्रिया।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत ढहने के बाद राहत कार्य में एनएसयूआई के जुटने का नैरेटिव ऐसा बना कि एबीवीपी आक्रामक हो गई और अपनी ही 'ट्रिपल इंजन' वाली सरकार के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट करते हुए MCD मुख्यालय में तोड़फोड़ कर दी। तोड़फोड़ के आरोप में एबीवीपी के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। बीजेपी की छात्र ईकाई के इस प्रदर्शन पर समर्थक गदगद भी दिखे और यह तारीफ़ करते दिखे कि एबीवीपी ग़लत के विरोध में अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट कर अच्छा काम किया। हालाँकि एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने सिर्फ़ एमसीडी के ख़िलाफ़ विरोध किया और एमसीडी कमिश्नर का इस्तीफ़ा मांगा। उन्होंने न तो दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता, दिल्ली के किसी मंत्री या फिर मोदी सरकार में किसी को ज़िम्मेदार ठहराया। तो सवाल है कि आख़िर एबीवीपी अचानक इतनी आक्रामक क्यों हुई?
इस सवाल का जवाब जानने से पहले यह जान लीजिए कि आख़िर एबीवीपी ने हादसे के बाद क्या किया। बहुमंजिला इमारत ढहने की दर्दनाक घटना के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP ने नगर निगम यानी MCD पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सिविक सेंटर स्थित मुख्यालय में प्रदर्शन किया।
MCD मुख्यालय में घुसे ABVP कार्यकर्ता
पुलिस के अनुसार, रविवार को करीब 150 से 200 एबीवीपी कार्यकर्ता सिविक सेंटर पहुंचे। प्रदर्शनकारी गेट नंबर-5 से परिसर के भीतर दाखिल हुए और एमसीडी के ख़िलाफ़ नारेबाजी की। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी मुख्य भवन तक पहुँच गए और वहाँ कांच के शीशे तथा अन्य हिस्सों में तोड़फोड़ की। एबीवीपी का आरोप है कि दिल्ली के छात्र वाले इलाकों में चल रहे पेइंग गेस्ट यानी पीजी आवासों की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करने में एमसीडी पूरी तरह विफल रही, जिसके कारण इतना बड़ा हादसा हुआ। संगठन ने एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार के इस्तीफे की भी मांग की।
एबीवीपी की राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक प्रेरणा भारद्वाज ने कहा कि संगठन हादसे के पहले दिन से ही घटनास्थल पर मौजूद है और पीड़ित छात्रों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि संगठन ने एमसीडी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। प्रेरणा भारद्वाज ने कहा, 'सत्य निकेतन में इमारत गिरने से छात्रों की मौत हुई है और कई छात्र मलबे में फंसे रहे। यह बेहद दुखद घटना है। हमारा सवाल है कि आखिर छात्रों की सुरक्षा के मानक क्या हैं? जब तक अंतिम छात्र को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।'एबीवीपी का यह आक्रामक प्रदर्शन रात को तब हुआ जब उससे काफ़ी पहले हादसे के तुरंत बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में ख़बरें आ गईं कि राहत और बचाव कार्य में एनएसयूआई के कार्यकर्ता सक्रियता से जुटे हैं। बाद में हादसे के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर एबवीपी के प्रोटेस्ट की ख़बर आई।
राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि दिल्ली, एमसीडी और केंद्र- तीनों जगह बीजेपी की सरकार होने के बावजूद एबीवीपी ने एमसीडी मुख्यालय में आक्रामक प्रदर्शन क्यों किया? वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हादसे के बाद राहत कार्य में एनएसयूआई की सक्रियता चर्चा में आने के बाद एबीवीपी भी इस मुद्दे पर खुलकर मैदान में उतर गई।
NSUI ने उठाए सवाल
दूसरी ओर कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने भी हादसे को लेकर सरकार और प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया। एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने आरोप लगाया कि राहत एवं बचाव अभियान में भारी अव्यवस्था देखने को मिली। उन्होंने कहा कि यह देश की राजधानी है, लेकिन फिर भी प्रशासन के पास न पर्याप्त उपकरण थे, न प्रशिक्षित टीम और न ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की तैयारी। इसने एक्स पर कई वीडियो पोस्ट किए हैं जिसमें एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं के राहत कार्य में जुटे होने का दावा किया गया है।जाखड़ ने कहा, 'यह बहुत बड़ी विफलता है कि छात्र समय पर नहीं निकाले जा सके। सरकार के पास न आपदा प्रबंधन की तैयारी है, न पर्याप्त उपकरण और न ही सक्षम रेस्क्यू टीम। आखिर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कहां थीं? पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।'
सरकारी हॉस्टल बने
एनएसयूआई ने इस हादसे के बाद दिल्ली में चल रहे निजी पीजी सिस्टम पर भी सवाल उठाए। विनोद जाखड़ ने मांग की कि सभी असुरक्षित निजी पीजी भवनों को हटाकर उनकी जगह सरकारी छात्रावास बनाए जाएं, ताकि छात्रों को सुरक्षित आवास मिल सके।
उन्होंने यह भी मांग की कि मृतक छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। घायल छात्रों का सर्वोत्तम इलाज कराया जाए। हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और भवन मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।बीजेपी सरकार पर उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक सवाल भी उठ रहे हैं। दिल्ली में फिलहाल एमसीडी, दिल्ली सरकार और केंद्र- तीनों जगह बीजेपी की सरकार या नियंत्रण है। ऐसे में विपक्ष सवाल उठा रहा है कि यदि प्रशासनिक जिम्मेदारी उसी राजनीतिक दल के पास है, तो एबीवीपी का विरोध किसके खिलाफ है।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हादसे के तुरंत बाद एनएसयूआई के कार्यकर्ता राहत कार्य में सक्रिय दिखाई दिए, जिसके बाद एबीवीपी ने भी आंदोलन तेज किया और एमसीडी के खिलाफ आक्रामक प्रदर्शन किया। हालाँकि एबीवीपी ने इन दावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और कहा है कि उसका आंदोलन केवल छात्रों की सुरक्षा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग के लिए है।
घटनास्थल पर पहुंचे मंत्री और अधिकारी
हादसे के बाद दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार, बीजेपी विधायक अनिल शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया।सत्य निकेतन इमारत हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राहत एवं बचाव दल लगातार मलबा हटाने का काम कर रहे हैं और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि कहीं कोई अन्य व्यक्ति मलबे में फंसा न रह गया हो।
इस हादसे ने दिल्ली में छात्रों के लिए चल रहे निजी पीजी और किराये की इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सवाल है कि जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।