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नवरात्रि के दौरान मांस की दुकानें बंद हों: दक्षिण दिल्ली मेयर

दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने मांग की है कि दिल्ली में मांस की दुकानें नवरात्रि के दौरान बंद की जानी चाहिए। दक्षिण दिल्ली के मेयर मुकेश सूर्यन ने कहा है कि इन नौ दिनों के दौरान भक्त मांसाहारी भोजन, शराब और कुछ मसालों के उपयोग से दूर रहते हैं। उन्होंने इस संबंध में दक्षिण एमसीडी के आयुक्त को पत्र लिखा है।

मेयर ने 4 अप्रैल को लिखे एक पत्र में कहा है, 'मैं इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि वर्तमान नवरात्रि उत्सव पूरे देश में 2 अप्रैल से 11 अप्रैल तक मनाया जा रहा है। शुभ कार्य के दौरान नवरात्रि की अवधि में देवी दुर्गा के भक्त शुद्ध शाकाहारी भोजन के साथ नौ दिनों तक उपवास रखते हैं और मांसाहारी खाद्य पदार्थों, शराब और कुछ मसालों के सेवन से परहेज करते हैं। शहर का क्षेत्र भी त्योहार के अनुरूप रंगा हुआ है।'

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उन्होंने पत्र में लिखा है कि 'नवरात्रि के दिनों में लोग देवी का सम्मान करने और अपने व अपने परिवार के लिए आशीर्वाद लेने के लिए मंदिरों में जाते हैं। लोग प्याज-लहसुन का इस्तेमाल भी छोड़ देते हैं और खुले में या मंदिरों के पास मांस बेचे जाने का नजारा उन्हें असहज कर देता है। जब देवी की हर रोज़ की पूजा करने के लिए वे मांस की दुकानों के आसपास से गुजरते हैं या उन्हें मांस की गंध को सहन करना पड़ता है, तो उनकी धार्मिक मान्यताएं और भावनाएँ भी प्रभावित होती हैं। इसके अलावा कुछ मांस की दुकानें नाले में या सड़क के किनारे कचरा डंप करती हैं, जिसे आवारा कुत्ते खाते हैं। यह न केवल अस्वच्छ है, बल्कि राहगीरों के लिए भयावह नज़ारा होता है।'

'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार उस पत्र में आगे कहा गया है कि 'इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है यदि दक्षिण दिल्ली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में नवरात्रि उत्सव की अवधि के दौरान मांस की दुकानों को बंद कर दिया जाए। और मंदिरों में और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए भी मांस की दुकानों को बंद करना आवश्यक है।'

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पत्र में कहा गया है कि नवरात्रि उत्सव के नौ दिनों की अवधि के दौरान मांस की दुकानों को बंद करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकते हैं। त्योहार नहीं मनाने वाले लोगों के बारे में पूछे जाने पर सूर्यन ने कहा कि उन्हें दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार यह पूछे जाने पर कि निर्णय का आधार क्या है, मेयर ने कहा, 'लोग इसे नहीं चाहते'। हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ये लोग कौन हैं या यह कैसे पता चला कि कौन से लोग नहीं चाहते हैं। मेयर ने कहा, 'क्या समस्या है? इसमें गलत क्या है? हम सिर्फ नवरात्र के लिए यह मांग कर रहे हैं, नियमित करने के लिए नहीं।'

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