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गुजरातः आप ने 5 सीटें जीतीं लेकिन फ्रीबीज़ पर झाड़ू फिरा

आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल चाहें तो गुजरात में उनकी पार्टी को मिले वोट शेयर 12.91%  पर और 5 सीटें जीतने पर खुश हो सकते हैं। इस पर भी खुश हो सकते हैं कि उनकी पार्टी को अब राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाएगा। लेकिन सच यह है कि गुजरात ने उनके फ्रीबीज यानी मुफ्त बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य के वादे की हवा निकाल दी। उसने बता दिया कि उसे मुफ्त में कुछ नहीं चाहिए। लेकिन असल मुद्दा यह है कि गुजरात चुनाव में केजरीवाल ने जो झूठ बोले, उसकी भरपाई आम आदमी पार्टी कैसे करेगी। हालांकि, ऐसा होगा नहीं क्योंकि उसका जवाब होगा - चुनाव में माहौल बनाने के लिए नेता तो ऐसा बोलते ही हैं। लेकिन इतना भी झूठ नहीं बोलते हैं कि उनका झूठ बाद में पकड़ा जाए और लोग सोशल मीडिया पर उसका मीम बनाकर मजाक उड़ाएं।

केजरीवाल ने गुजरात चुनाव में प्रचार के दौरान कहा था कि आईबी ने मोदी सरकार को रिपोर्ट दी है कि दिसंबर में गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी। उन्होंने आईबी वाला अपना बयान एक रैली में नहीं बल्कि आधा दर्जन रैलियों में दोहराना पड़ा। इसके बाद केजरीवाल ने गुजरात में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें उन्होंने कैमरे और मीडिया के सामने कागज पर लिखा - गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी। 

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गजब का आत्मविश्वास दिखाई दिया इस आदमी में। शायद नेता ऐसे ही होते हैं। आज 8 दिसंबर को जब गिनती शुरू ही हुई थी तो केजरीवाल ने ट्वीट करके गुजरात के लोगों को परिवर्तन की बधाई दे डाली। लोगों ने सोशल मीडिया पर केजरीवाल के इस ट्वीट पर चुटकी ली है कि शायद उन्होंने बीजेपी को प्रचंड जीत की बधाई दी है। क्योंकि इस रिपोर्ट को लिखे जाने तक केजरीवाल की पार्टी ने 5 सीटें जीत ली हैं। उसके मुख्यमंत्री पद का चेहरा ईसूदन गढ़वी हार गए हैं। इसी तरह कतरगाम से आप के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया हार गए हैं। पाटीदार आंदोलन के चेहरा रहे अल्पेश कथीरिया आप टिकट पर हार गए हैं। बार-बार फर्जी साबित हो रहे कुछ एग्जिट पोल ने आप को गुजरात में 20 फीसदी वोट मिलने की भविष्यवाणी कर डाली थी। चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी को 12.91 फीसदी वोट मिलने की जानकारी दी है।

मुफ्तखोरी या फ्रीबीज को बड़ा झटका

दिल्ली और पंजाब में जिन रेवड़ियों को बांट कर केजरीवाल की पार्टी आगे बढ़ी थी, उसे गुजरात ने नकार दिया है। दिल्ली के बाद पंजाब में उनके मुफ्त बिजली-पानी के वादे ने पंजाब के लोगों ने आम आदमी पार्टी को सत्ता सौंप दी थी। गुजरात में भी केजरीवाल ने मुफ्त बिजली-पानी-शिक्षा के वादों को दोहराया और इससे बीजेपी ज्यादा ही डर गई थी। उसने आप को दिल्ली से लेकर गुजरात तक घेरने की कोशिश शुरू कर दी और काफी हद तक सफल भी रही। गुजरात की जनता ने स्पष्ट तौर पर केजरीवाल के मुफ्त बिजली-पानी के नारे की हवा निकाल दी है। 

केजरीवाल ने गुजरात में कोई ऐसा दांव नहीं चला जो उनकी पार्टी को बढ़त दिलाने में काम न आए। खुद को धर्मनिरपेक्ष बताने वाले केजरीवाल ने गुजरात की रैलियों में कहा था कि उन लोगों को रोजाना 40 रुपये मिलेंगे जो गाय की सेवा करेंगे, देखरेख करेंगे। गुजरात के लोगों ने इस वादे पर भी ध्यान नहीं दिया। केजरीवाल ने कांग्रेस की तरह ही गुजरात में सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का वादा किया था। दिल्ली की तरह उन्होंने गुजरात में भी जनता को 10 गारंटी दी थी। लेकिन ये सारी गारंटी और वादे धरे रह गए। 

करप्शन के खिलाफ खड़ी हुई पार्टी को यह बताना चाहिए कि गुजरात चुनाव में उसने कितना पैसा खर्च किया। हालांकि कोई भी पार्टी इसका हिसाब नहीं देती। लेकिन बीजेपी-कांग्रेस के मुकाबले आम आदमी पार्टी इतनी संसाधनों वाली पार्टी नहीं है। लेकिन आप और केजरीवाल जितनी पारदर्शिता की बात करते हैं, उन्हें यह तथ्य जरूर बताना चाहिए। गोवा में भी आप ने बहुत शान-ओ-शौकत से चुनाव लड़ा था लेकिन नतीजा क्या निकला। हिमाचल प्रदेश में तो खैर वक्त से पहले उसका तंबू उखड़ गया लेकिन गुजरात विधानसभा में आप ने कम पैसा नहीं बहाया है।

विडंबना ये है कि जब कल गुरुवार 7 दिसंबर को एमसीडी चुनाव के नतीजे आए और उसमें आप को सत्ता मिलती दिखाई दी तो तमाम राजनीतिक रणनीतिकारों ने केजरीवाल को मोदी के लिए चुनौती बताना शुरू कर दिया। उनके राष्ट्रीय राजनीति में पैर जमाने की घोषणाएं कर दी गईं। उन्हें कांग्रेस का शानदार ऑप्शन मान लिया गया। उन्हें चतुर राजनीतिक खिलाड़ी करार दे दिया गया। 

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बीजेपी की बी टीम का आरोप

गुजरात के आंकड़े अभी पूरी तरह नहीं आए हैं लेकिन तमाम कांग्रेस प्रत्याशियों ने बताया है कि आम आदमी पार्टी प्रत्याशी ने उनके वोट काटे हैं। इसीलिए उनकी हार हुई है। कुछ इलाकों में हार का अंतर कम भी है। यानी इसका अर्थ यह निकलता है कि कांग्रेस का वोट आम आदमी पार्टी ने कुछ सीटों पर बुरी तरह काटा है। ऐसे में इन आरोपों को हवा मिलने वाली है कि केजरीवाल की पार्टी बीजेपी की बी टीम की तरह काम कर रही है। हालांकि लोकतंत्र में कोई भी पार्टी चुनाव लड़ सकती है और ऐसे आरोपों का कोई मतलब नहीं है। लेकिन आप कहने वालों का मुंह नहीं रोक सकते। बहरहाल, फिलहाल यही दिख रहा है कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस का विकल्प तो नहीं बन पा रही है लेकिन उसका वोट काटने में पीछे भी नहीं है। 

 

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