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सरकार ने कहा- 5 साल में नीरव, माल्या, मेहुल जैसे 38 डिफ़ॉल्टर देश छोड़कर भागे

पिछले छह साल भारत में राष्ट्रवाद की राजनीति के नाम रहे हैं, जिसमें ग़रीबों को उनका हक़ दिलाने और न खाऊंगा और ना खाने दूंगा, जैसी बातें और वादे चर्चा में रहे। लेकिन शायद आप यह जानकर सकते में आ जाएंगे कि पिछले 5 साल में 38 विलफुल डिफ़ॉल्टर बैंकों को चूना लगाकर यहां से विदेश भाग गए। इसके बाद स्वाभाविक रूप से इन बैंकों की कमर टूटनी ही थी और ऐसा होने की ख़बरें भी आईं। विलफुल डिफ़ॉल्टर का मतलब कि जान-बूझकर अपराध करने वाले। 

इसे लेकर राजनीति भी ख़ूब हुई और 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अपनी लगभग हर रैली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी मंच से विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी जैसे कई और विदेश भाग जाने वालों का जिक्र करते रहे। राहुल गांधी इन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मित्र भी बताते रहे। इन तीनों का ही नाम इन 38 डिफ़ॉल्टर्स की सूची में शामिल है। 

मोदी सरकार इसे लेकर हमेशा घिरी रही कि आख़िर कैसे ये डिफ़ाल्टर्स देश का पैसा हड़पकर आसानी से भाग गए और अब आने के लिए तैयार नहीं दिखते। राहुल गांधी के आरोपों को ग़लत बताने वाली मोदी सरकार ने अब संसद में आर्थिक अपराध कर भागने वाले लोगों के बारे में जानकारी दी है। 

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सरकार का कहना है कि 1 जनवरी, 2015 के बाद से 31 दिसंबर, 2019 के बीच 38 लोग देश छोड़कर भाग गए। सरकार ने कहा कि इन भगोड़ों के ख़िलाफ़ क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई की जा रही है। 

सरकार ने यह भी कहा कि आर्थिक अपराध करने वाले 20 भगोड़ों के ख़िलाफ़ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है और 14 देशों से ऐसे अपराधियों का प्रत्यर्पण करने का अनुरोध किया गया है। सरकार ने तमाम आंकड़े भी दिए और बताया कि इन डिफ़ॉल्टर्स से 2014-2019 के बीच 7,654 करोड़ रुपये रिकवर किए गए हैं। 

देखिए, वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष और शैलेश की बातचीत। 

कहां हैं नीरव और मेहुल चौकसी?

नीरव मोदी जिस पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में घोटाला करके भागा, उसमें 14 हज़ार कराेड़ का फ़्रॉड सामने आया। अब तक नीरव मोदी को भारत नहीं लाया जा सका है जबकि इसे लेकर तमाम राजनीतिक दावे होते रहे हैं। इस घोटाले के मास्टरमाइंड कहे जाने वाले मेहुल चौकसी ने एंटिगा की नागरिकता ले ली है। मेहुल चौकसी का प्रत्यर्पण होना मुश्किल है क्योंकि एंटिगा के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है। जबकि नीरव मोदी लंदन की एक जेल में बंद है और उसका कहना है कि अगर उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया तो वह आत्महत्या कर लेगा। 

सवाल यहां यही खड़ा होता है कि ईडी भले ही नीरव की संपत्तियां ज़ब्त करने में जुटी रहे या भारत सरकार बड़े-बड़े दावे करते रहे, तो भी क्या इनके द्वारा किए गए घोटालों की रकम की भरपाई हो पाएगी। क्या कभी नीरव, मेहुल, माल्या या अन्य लोगों को भारत लाया जा सकेगा।

इस साल मार्च में राहुल गांधी ने संसद में इसे लेकर सवाल पूछा था और इसका एक वीडियो ट्विटर पर जारी किया था। राहुल ने कहा था कि उन्होंने सरकार से देश के सबसे बड़े 50 विलफ़ुल डिफ़ॉल्टर्स का नाम पूछा था लेकिन उन्हें इसका जवाब नहीं दिया गया। 

राहुल ने अप्रैल महीने में कहा था कि आरबीआई ने 50 विलफ़ुल डिफ़ॉल्टर्स के नामों की सूची जारी की है और इसमें नीरव मोदी, मेहुल चौकसी सहित बीजेपी के ‘मित्रों’ और समर्थकों के नाम डाले हैं। राहुल ने कहा था कि इनके नाम इस सूची में होने के कारण ही संसद में इस सच को छुपाया गया। राहुल ने आरबीआई के हवाले से कहा था कि इन 50 लोगों पर ही 65 हज़ार करोड़ से ज़्यादा की देनदारी है। 
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कहां है विजय माल्या?

नीरव और मेहुल चौकसी के अलावा बात अगर विजय माल्या की करें तो वह ब्रिटेन में है और भारत वापस आने के लिए तैयार नहीं है। अरबों रुपये का क़र्ज़ लेकर विदेश भागे विजय माल्या के प्रत्यर्पण की पूरी कोशिश भारत कर रहा है लेकिन उसकी वापसी में भी कई क़ानूनी पचड़े हैं। भारत सरकार ने ब्रिटेन से कहा है कि वह माल्या द्वारा वहां शरण लेने के लिए दी जाने वाली किसी भी अर्जी पर विचार न करे। 

किसानों, ग़रीबों द्वारा कर्ज न चुकाने पर बैंक उनके सामान की कुर्की कर लेते हैं लेकिन इतना मोटा कर्ज लेने वाले लोग देश छोड़कर भाग गए और किसी को कानों-कान ख़बर तक नहीं हुई।

सवाल फिर वही है कि इतने सारे लोग भारत के बैंकों में जमा पैसा लेकर आख़िर कैसे निकल गए। क्या इनकी निगरानी करने वाला कोई नहीं था, क्या केंद्र सरकार को आर्थिक अपराध करके भागने वालों के शुरुआती मामलों के बाद सख़्ती नहीं बरतनी चाहिए थी कि जिससे इनकी संख्या 38 तक नहीं पहुंचती। इन सवालों के जवाब सरकार देगी तो तब, जब उससे कोई पूछेगा। 

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