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फ़ाइल फ़ोटा।

36 लेखकों-कलाकारों ने उमर खालिद की गिरफ़्तारी की निंदा की, रिहा करने की माँग

इतिहासकार रामचंद्र गुहा, लेखक अरुंधती रॉाय, फ़िल्मकार सईद मिर्ज़ा सहित लेखन, कला, शिक्षा और राजनीति से जुड़ी 36 हस्तियों ने जेनएयू के पूर्व छात्र उमर खालिद की गिरफ़्तारी का विरोध किया है। इस संबंध में बयान जारी कर उन्होंने कहा है कि पुलिस उन्हें तुरंत रिहा करे और 'विचहंट' बंद करे। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली दंगों की साज़िश रचने के आरोप में उमर खालिद को गिरफ्तार किया है।

बयान में उन्होंने कहा है कि संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध नागरिक के तौर पर हम उमर खालिद की गिरफ़्तारी की निंदा करते हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए उमर खालिद को दोषपूर्ण जाँच के तहत निशाना बनाया जा रहा है। बयान में कहा गया है कि उन पर हत्या के लिए साज़िश रचने, राजद्रोह, यूएपीए यानी ग़ैर क़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) क़ानून के तहत कई आरोप लगाए गए हैं। 

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बयान में कहा गया है, 'गहरी पीड़ा के साथ हमें यह कहने में कोई संदेह नहीं है कि यह जाँच राष्ट्रीय राजधानी में फ़रवरी 2020 में हुई हिंसा के बारे में नहीं है, बल्कि असंवैधानिक सीएए के ख़िलाफ़ देश भर में पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध के बारे में है।'

बयान जारी करने वालों में फ़िल्मकार सईद मिर्ज़ा, लेखिका अरुंधती रॉय, रामचंद्र गुहा के अलावा पूर्व योजना आयोग से जुड़ी सैयदा हमीद, कलाकार टीएम कृष्णा, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ, सीपीआई (एम) की बृंदा करात, पत्रकार आकार पटेल, लेखक हर्षमंदर, प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद सहित 36 लोगों ने इस बयान पर हस्ताक्षर किये हैं। 

बयान में यह भी कहा गया है कि उमर खालिद उन सैकड़ों आवाज़ों में से एक थे जो देश भर में संविधान के पक्ष में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हमेशा शांतिपूर्ण, अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीक़ों की ज़रूरत पर ज़ोर देते थे। उन्होंने बयान में कहा है कि उमर खालिद संविधान और लोकतंत्र के पक्ष में युवा भारतीयों की एक मज़बूत और शक्तिशाली आवाज़ के रूप में उभरे हैं। बयान के अनुसार,

'दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली हिंसा के लिए साज़िश के कई संगीन मामलों में उन्हें फँसाने की बार-बार की गई कोशिशें उनकी असहमति की आवाज़ को दबाने का एक बड़ा प्रयास है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि गिरफ्तार किए गए 20 में से 19 लोग, 31 वर्ष से कम उम्र के हैं। जिनमें से 17 को सख़्त यूएपीए के तहत आरोपी बनाया गया है और दिल्ली हिंसा के लिए साज़िशकर्ता के आरोप में कैद किया गया है, जबकि वास्तव में जिन लोगों ने हिंसा को उकसाया और जो लोग उसमें शामिल हुए उन्हें छुआ तक नहीं गया है।'

बयान में यह भी कहा गया है कि अदालत द्वारा यह भी देखा गया है कि मीडिया ग़लत सूचनाएँ प्रसारित कर रहा है और जानबूझ कर ऐसी चुनिंदा सूचनाएँ लीक की जा रही हैं जिससे मीडिया ट्रायल हो जाए और न्याय को प्रभावित किया जा सके। यह तुरंत बंद किया जाना चाहिए। बयान में कहा गया है, 'यदि हम क़ानून को अपना काम करने देंगे तो हमें विश्वास है कि न्याय होगा।'

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बता दें कि दिल्ली पुलिस ने ट्रम्प के आने के पहले के उमर खालिद के भाषण और दिल्ली दंगे के आरोपियों के साथ हुई कथित बातचीत के कॉल रिकॉर्ड, आरोपियों के साथ मीटिंग और आरोपियों के बयानों में साज़िशकर्ता के आरोप में उन्हें गिरफ़्तार किया है। अब स्पेशल सेल 17 सितम्बर को चार्जशीट पेश करने वाली है।

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