loader

आईबीएफ़ रिपब्लिक टीवी की सदस्यता को निलंबित करे: एनबीए

मुंबई पुलिस द्वारा जारी की गई कथित वॉट्सऐप चैट के लीक होने के बाद आलोचनाओं का सामना कर रहे रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्णब गोस्वामी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फ़ेडरेशन (आईबीएफ़) से मांग की है कि रिपब्लिक टीवी की प्राथमिक सदस्यता को निलंबित कर दिया जाना चाहिए। आईबीएफ़ देश के टीवी चैनलों की संस्था है और इसके प्रमुख इंडिया टीवी के चेयरमैन और संपादक रजत शर्मा हैं। 

एनबीए ने एक बयान जारी कर कहा है कि अर्णब और न्यूज़ चैनलों की रेटिंग देने वाली एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता के बीच की जो कथित वॉट्सऐप चैट लीक हुई है, वह बेहद हैरान करने वाली है। एनबीए ने कहा, ‘इन मैसेज से साफ है कि दोनों के बीच आपसी साठगांठ थी और इससे हर महीने फर्जी तरीक़े से बाक़ी चैनलों की रेटिंग घटाई जाती थी और रिपब्लिक टीवी को ग़लत फ़ायदा पहुंचाया जाता था।’ 

ताज़ा ख़बरें

एनबीए ने आगे कहा है कि दोनों के बीच जो बातचीत हुई है, जिसमें सचिवों की नियुक्ति, कैबिनेट में फेरबदल, पीएमओ तक पहुंच होना और सूचना और प्रसारण मंत्रालय के कामकाज से जुड़े संदेश शामिल हैं, इससे एनबीए की ओर से पिछले चार साल से जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे सही साबित होते हैं। 

एनबीए का कहना है कि वह टीआरपी रेटिंग में छेड़छाड़ की बात को कहती रही है और एनबीए से बाहर का कोई सदस्य बार्क के प्रबंधन के शीर्ष अफ़सरों के साथ मिलकर इस काम को अंजाम देता रहा है। 

एनबीए ने मांग की है कि जब तक टीआरपी में छेड़छाड़ के मसले का अदालत से समाधान नहीं हो जाता है तब तक आईबीएफ़ रिपब्लिक टीवी की सदस्यता को सस्पेंड कर दे। संस्था ने यह भी कहा है कि टीआरपी में छेड़छाड़ की ख़बरों से प्रसारण मंत्रालय की छवि को भी नुक़सान पहुंचा है।

न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स को हुआ नुक़सान 

एनबीए ने कहा है कि बार्क की ओर से हर महीने फर्जी आंकड़े जारी किए जाते रहे और इससे न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स को जबरदस्त नुक़सान हुआ। एनबीए ने बार्क से कहा है कि वह हिंदी न्यूज़ चैनलों को लेकर जारी की गई टीआरपी का ऑडिट करवाए और साथ ही यह भी बताए कि उसने पिछले तीन महीने में इस दिशा में कौन से क़दम उठाए हैं। संस्था ने कहा है कि वह अपने काम में पारदर्शिता लाए। 

टीआरपी स्कैम 

न्यूज़ चैनलों की दुनिया में बीते साल अक्टूबर में तब हंगामा खड़ा हो गया था जब मुंबई पुलिस ने दावा किया था कि कुछ टीवी चैनल पैसे देकर अपनी टीआरपी बढ़ाया करते थे। इस मामले में रिपब्लिक टीवी पर गंभीर आरोप लगे थे। रिपब्लिक भारत टीवी अचानक ही नंबर एक चैनल बन गया था। सुशांत सिंह मामले में चैनल की कवरेज को लेकर भी ढेरों सवाल खड़े हुए थे। 

देखिए, इस विषय पर चर्चा-

इसके बाद से ही बार्क निशाने पर आ गई थी। उस पर आरोप लगे थे कि उसकी रेटिंग प्रणाली ग़लत है और न्यूज़ चैनलों द्वारा उसके कर्मचारियों को महंगे उपहार टीआरपी को प्रभावित किया जा रहा है। बार्क पर जो आरोप लगाए गए, ऐसे ही आरोप पहले टैम इंडिया पर लगाए जाते थे। उस समय टैम इंडिया ही हर हफ़्ते रेटिंग के आंकड़े देती थी और तब इसे लेकर काफी विवाद भी होता था। 

पार्थो दासगुप्ता को दिए लाखों रुपये 

मुंबई पुलिस ने टीआरपी स्कैम में अर्णब गोस्वामी का हाथ होने को लेकर सबूत होने का दावा किया था। पुलिस ने अदालत में रिपोर्ट पेश कर कहा था कि अर्णब गोस्वामी ने रिपब्लिक टीवी के दो चैनलों की रेटिंग बढ़ाने के लिए पार्थो दासगुप्ता को लाखों रुपये का भुगतान किया था। 

इसके बाद पार्थो दासगुप्ता और रिपब्लिक टीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विकास खानचंदानी को मुंबई पुलिस ने गिरफ़्तार किया था। आगे जाकर इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ा था, जब आर्किटेक्ट अन्वय नाइक की हत्या के मामले में मुंबई पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को गिरफ़्तार किया था। तब बीजेपी अर्णब के बचाव में खुलकर उतर आई थी। 

देश से और ख़बरें

बहरहाल, अर्णब की पार्थो दासगुप्ता के साथ लीक हुई कथित चैट के बाद न्यूज़ इंडस्ट्री में तूफ़ान का जैसा माहौल है। टीआरपी स्कैम को लेकर पहले ही मुसीबतों से दो-चार हो चुके अर्णब गोस्वामी और पार्थो दासगुप्ता के बीच हुई बातचीत में पीएमओ, रजत, ‘AS’, प्रकाश जावड़ेकर जैसे नाम सामने आए हैं। यह कथित चैट 1 हज़ार पन्नों की बताई जा रही है। 

लीक हुई इस वाट्सऐप चैट में अर्णब गोस्वामी कथित तौर पर पार्थो से कुछ बातों को पीएमओ के साथ साझा करने और सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को 'किसी काम का नहीं' बताने की बात कहते हैं।

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए


गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें