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आजम खान को 89वें केस में भी सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली

सपा नेता आजम खान को यह अंतरिम जमानत धोखाधड़ी के मामले में मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनसे कहा है कि वो दो हफ्ते में रेगुलर जमानत के लिए संबंधित कोर्ट में अर्जी दे सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले के अजीबोगरीब तथ्यों को देखते हुए आजम खान को राहत देने के लिए अनुच्छेद 142 लागू किया। अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को दो पार्टियों के बीच "पूर्ण न्याय" करने के लिए एक सुपर पावर प्रदान करता है, जहां कभी-कभी कानून या क़ानून एक उपाय प्रदान नहीं कर सकते हैं।

समाजवादी पार्टी के संस्थापकों में से एक आजम खान करीब दो वर्षों से जेल में हैं। अभी जो शुरुआती सूचनाएं आई हैं, उनमेें यह साफ नहीं है कि वे जेल से कब तक बाहर आएंगे। क्योंकि जेल अथॉरिटी के पास जब तक लिखित आदेश नहीं पहुंचता है, तब तक जमानत की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। बहरहाल, रामपुर में खुशी का माहौल है।
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यह मामला रामपुर पब्लिक स्कूल से कथित रूप से जमीन हड़पने और जालसाजी से जुड़ा है। उन पर स्कूल को मान्यता दिलाने के लिए फर्जी बिल्डिंग सर्टिफिकेट बनाने का आरोप लगाया गया है। जस्टिस एल. एन. राव, बी.आर. गवई और ए.एस. बोपन्ना की बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। बेंच ने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा खान की जमानत याचिका के निपटारे में देरी के बारे में चिंता व्यक्त की थी।

समाजवादी नेता 2020 से सीतापुर जेल में है। अदालत ने मंगलवार को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया था कि मामले में जांचकर्ताओं को धमकी दी गई है। पुलिस ने कहा कि जब खान की गवाही दर्ज की गई थी तब भी उन्हें कथित तौर पर धमकी दी गई थी।
खान के वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि आजम खान पिछले दो वर्षों से जेल में हैं और इस प्रकार किसी को भी धमकी देने का सवाल ही नहीं उठता।इस महीने की शुरुआत में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीखी फटकार के कुछ दिनों बाद भूमि हड़पने के मामले में खान को जमानत दे दी थी।
अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी का एक प्रमुख मुस्लिम चेहरा और इसके सबसे मजबूत नेताओं में से, खान के खिलाफ यूपी में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद उनके खिलाफ कई मामले दर्ज थे। वह अभी भी रामपुर से 2019 का लोकसभा चुनाव और परिवार ने 2022 का राज्य चुनाव जीतने में सफल रहा। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भूमि हड़पने के मामले में खान की जमानत याचिका पर फैसला करने में देरी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था, यह न्याय का मजाक है। बीसपी प्रमुख मायावती भी खान के समर्थन में सामने आई हैं, उनका कहना है कि उनकी निरंतर कैद को आम आदमी द्वारा "न्याय का गला घोंटना" माना जा रहा है। राज्य के पूर्व मंत्री आजम खान को 89 में से 88 मामलों में जमानत मिल गई थी लेकिन उनके खिलाफ नया मामला दर्ज किया गया।

यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन के मामले में सुप्रीम कोर्ट से 18 अप्रैल को बड़ी राहत मिली।सुप्रीम कोर्ट ने इस यूनिवर्सिटी को आवंटित भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगा दी। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सी.टी. रवि कुमार की बेंच ने यह फैसला सुनाया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने सुनवाई की थी। 2005 में यूनिवर्सिटी को रामपुर में 500 एकड़ जमीन दी गई थी। हालांकि, विश्वविद्यालय उन शर्तों का पालन करने में विफल रहा, जिन पर जमीन दी गई थी, इसलिए राज्य सरकार ने जमीन वापस मांग ली।

अप्रैल में एक संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, भारत के सॉलिसिटर जनरल ने यूनिवर्सिटी द्वारा दायर याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि शिक्षा के लिए दी गई भूमि का उपयोग अन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। अदालत ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है और अगस्त में मामले की सुनवाई होने की संभावना है। सॉलिसिटर जनरल ने अपनी दलीलों में जल्द सुनवाई की तारीख की मांग करते हुए दावा किया कि सरकार ने जमीन लौटाने का काम शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान और उनके परिवार के सदस्य विश्वविद्यालय के ट्रस्टी हैं।

2005 में जब विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी, तब राज्य सरकार ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को धारा 154 (2) के तहत जमीन की अनुमति दी थी। यह जमीन जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950 के तहत यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए दी गई थी। आरोप है कि 12.5 एकड़ (5.0586 हेक्टेयर) जमीन की जगह आजम खान ने 400 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर लिया।

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योगी की जिद

यूपी में योगी आदित्यनाथ की 2017 में सरकार आते ही यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई थी। सपा ने उस समय आरोप लगाया था कि योगी सरकार एक तरह से इसे राजनीतिक बदले की भावना के तहत कार्रवाई कर रही है। योगी सरकार ने आजम के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए।

क्या कहा था हाईकोर्ट ने

जौहर यूनिवर्सिटी को दी गई जमीन पर रोक लगाते हुए उस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था दलितों की यह जमीन बिना जिलाधिकारी की मंजूरी के यूनिवर्सिटी को गलत तरीके से दी गई। इसे पढ़ाई के काम के लिए दिया गया था। लेकिन यूनिवर्सिटी कैंपस में एक मस्जिद बनाई जा रही थी। योगी सरकार ने आरोप लगाया कि नदी के किनारे की जमीन पर कब्जा कर लिया गया। किसानों से जबरन बैनामा करा लिया गया। कुछ किसानों ने आजम खान के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। कोर्ट ने कहा कि यूनिवर्सिटी पांच साल में बननी थी लेकिन उसकी भी रिपोर्ट नहीं दी गई।

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