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बिजली संकट? 7 साल में पहली बार होगा कोयला आयात

दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खनन करने वाली सरकारी कंपनी कोल इंडिया अब कोयला आयात करेगी। यह फ़ैसला इसलिए लिया गया कि देश में लगातार बिजली संकट की चिंताएँ बनी हुई हैं और समझा जाता है कि बिजली उत्पादन इकाइयों में कोयले का स्टॉक कम होने की आशंका है और इसलिए स्टॉक बढ़ाने के लिए यह फ़ैसला लिया गया है। देश में क़रीब 70 फ़ीसदी बिजली का उत्पादन कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट में होता है।

रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार कोयला आयात करने का कोल इंडिया का यह फ़ैसला कई वर्षों बाद लिया गया है। 2015 के बाद यह पहली बार होगा कि कोल इंडिया ईंधन का आयात करेगी। यह फ़ैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पिछले महीने ही कोयले की कमी की वजह से गंभीर बिजली संकट पैदा हो गया था और घंटों बिजली कट की समस्या का सामना करना पड़ा था। 

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न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार बिजली मंत्रालय ने 28 मई को लिखे पत्र में कहा, 'कोल इंडिया सरकार से सरकार स्तर पर कोयले का आयात करेगी और सरकारी बिजली उत्पादकों और स्वतंत्र बिजली उत्पादकों के ताप बिजली संयंत्रों को आपूर्ति करेगी।'

कोयला सचिव और कोल इंडिया के अध्यक्ष सहित शीर्ष केंद्रीय और राज्य ऊर्जा अधिकारियों को पत्र भेजा गया।

अब रिपोर्टें हैं कि 2022 की तीसरी तिमाही के दौरान भारत में कोयले की बड़ी कमी हो सकती है। ऐसा इसलिए कि बिजली की अधिक मांग और बिजली की बड़ी ख़पत की संभावनाएँ हैं। 

बिजली मंत्रालय ने पत्र में कहा कि लगभग सभी राज्यों ने सुझाव दिया था कि राज्यों द्वारा कई कोयला आयात निविदाओं से भ्रम पैदा होगा और इसलिए कोल इंडिया के माध्यम से केंद्रीकृत खरीद की जाए।

समझा जाता है कि बिजली की किसी संभावित कमी को देखते हुए कोयले के आयात का यह फ़ैसला लिया गया है। ऐसा इसलिए भी कि भारत ने अभी अप्रैल महीने में ही कोयले की कमी के कारण गंभीर संकट झेले हैं। तब जम्मू-कश्मीर से लेकर बिहार, झारखंड, राजस्थान और आंध्र प्रदेश तक कई राज्यों में 2 से 8 घंटे की बिजली कटौती की गई थी। 

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तब कहा गया था कि भारत के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने से बिजली की मांग में उछाल आया था। बिजली की मांग में उछाल आने से कोयले की कमी हो गई थी। कोयला देश में बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख ईंधन है और इस पर 70 फ़ीसदी निर्भर है।

तब हालात सामान्य करने के लिए बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों को बंद करना पड़ा था ताकि बिजली उत्पादन इकाइयों तक माल ट्रेन से कोयला पहुँचाया जाए। 

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