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हाथरस: सफदरजंग अस्पताल के बाहर हुआ प्रदर्शन, चंद्रशेखर ने दी भारत बंद की चेतावनी

हाथरस की घटना के विरोध में भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद पीड़िता के परिवार के साथ मंगलवार रात को सफदरजंग हॉस्पिटल में डटे रहे। उनके अलावा कांग्रेस के कई कार्यकर्ता भी वहां मौजूद रहे और हालात तनावपूर्ण बने रहे। क्योंकि बड़ी संख्या में पुलिस बल भी वहां मौजूद रहा। कांग्रेस अनूसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर प्रदीप नरवाल ने ट्वीट कर कहा था कि उनके ऊपर कभी भी लाठीचार्ज हो सकता है। 

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने कहा है कि हमारी बहन-बेटियों की जान इतनी सस्ती नहीं है और हमें न्याय चाहिए। आज़ाद समाज पार्टी नाम से राजनीतिक संगठन चलाने वाले चंद्रशेखर ने कहा, ‘केन्द्र सरकार पीड़ित परिवार को 2 करोड़ का मुआवजा, फर्स्ट क्लास नौकरी और आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से 30 दिन में सजा की घोषणा करे।’ उन्होंने कहा कि यदि 24 घंटे में उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो भीम आर्मी भारत बंद करेगी।

चंद्रशेखर आज़ाद ने सभी लोगों से अपील की है कि वे अभियुक्तों के लिये फांसी की माँग करें। उन्होंने कहा, ‘उन दरिंदो को तुरंत फांसी पर लटकाया जाये, जब तक उन दरिंदो को फांसी नहीं होगी, ना हम चैन से सोएंगे ना सरकार व प्रशासन को सोने देंगे।’ 

बता दें कि हाथरस में एक दलित परिवार की बेटी की मौत हो गयी। 14 सितंबर को उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। दरिंदों ने उसकी जीभ काट दी थी। उसके गले की हड्डी टूट गई थी क्योंकि बलात्कारियों ने चुन्नी से उसका गला घोटने की कोशिश की थी और उसकी पीठ में भी गहरी चोटें आई थीं।

इस लड़की की मौत के बाद देश भर में गुस्सा है। कोरोना संक्रमण के ख़तरे के बावजूद लोग सड़कों पर निकल रहे हैं और उत्तर प्रदेश सरकार के निकम्मेपन के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं। राजनीतिक दलों से जुड़ी महिला नेताओं ने इसके लिए योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। 

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पुलिस पर गंभीर आरोप 

यह घटना बताती है कि महिलाएं खासकर किसी दलित परिवार की बेटी उत्तर प्रदेश में क़तई महफूज नहीं है। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़, इस लड़की के साथ इतनी हैवानियत के बाद स्थानीय पुलिस ने बेशर्मी दिखाई और उसे गैंगरेप से जुड़ी धारा लिखने में 8 दिन लग गए। पुलिस पर आरोप है कि तब तक वह अभियुक्तों को बचाती रही। 

Dalit girl gangraped in Hathras protest on streets - Satya Hindi

सरकार बोली- दुष्कर्म की पुष्टि नहीं

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि मृतक लड़की के साथ दुष्कर्म की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में नहीं हुई है। बुरी तरह से पिटाई के बाद लकवाग्रस्त हो चुकी पीड़िता के शरीर पर आई गंभीर चोटों का भी जिक्र सरकारी मेडिकल रिपोर्ट में नहीं किया गया है। ‘सत्य हिन्दी’ के पास मौजूद पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में उसे साफ दिख रही चोटों का जिक्र नहीं है बल्कि महज दुपट्टे से गला कसने का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में मृतका के शरीर व अंदरुनी अंगों में किसी तरह की चोट का जिक्र इस रिपोर्ट में नहीं है। 

सिरे से नकार दिया बलात्कार को 

पुलिस की ओर से ही उपलब्ध करायी गयी मेडिकल रिपोर्ट में और खुद आईजी जोन के बयान में बलात्कार को सिरे से नकार दिया गया है। आईजी जोन ने कहा है कि मृतका के साथ मारपीट हुई थी और पहले उन्ही धाराओं में मुकदमा भी दर्ज किया गया था। उनका कहना है कि बाद में मृतका ने छेड़खानी की बात कही तो धाराएं बढ़ायी गयीं। आईजी के मुताबिक़, घटना के कई दिनों के बाद मृतका ने चार लोगों द्वारा बलात्कार करने की बात कही जिसके बाद इन धाराओं को लगाया गया।

कांग्रेस हमलावर

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश के ‘वर्ग-विशेष’ जंगलराज ने एक और युवती को मार डाला। सरकार ने कहा कि ये फ़ेक न्यूज़ है और पीड़िता को मरने के लिए छोड़ दिया।’ प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर कहा, ‘यूपी में कानून व्यवस्था हद से ज्यादा बिगड़ चुकी है। महिलाओं की सुरक्षा का नाम-ओ-निशान नहीं है। अपराधी खुले आम अपराध कर रहे हैं।’ दिल्ली महिला कांग्रेस ने भी सड़क पर उतकर प्रदर्शन किया। 

हाथरस दलित रेपकांड पर क्या योगी सरकार लीपापोती कर रही है। देखिए, वीडियो- 

योगी सरकार का 'राम राज्य'

उत्तर प्रदेश में अपराध इस कदर चरम पर है कि लोगों को याद नहीं रहता कि पिछले हफ़्ते ही कोई वीभत्स कांड हुआ था। क्योंकि अगले हफ़्ते उससे भी ज़्यादा जघन्य जुर्म को अपराधी अंजाम दे देते हैं। पत्रकारों की हत्या/हमले हों, ब्राह्मणों की हत्याएं हों, उद्योगपतियों को पुलिस अफ़सरों की धमकियां हो, समाज के ग़रीब और वंचित वर्ग पर दबंगों का जुल्म हो या दलितों पर असीमित अत्याचार, इन ख़बरों को पढ़कर लगता है कि उत्तर प्रदेश में अपराध को रोकना 'राम राज्य' के दावे करने वाली योगी सरकार के बस की बात नहीं है। 

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हाथरस की घटना के अभियुक्तों के चेहरे सामने आ चुके हैं, अब इन पर मुक़दमा चलेगा और न जाने निर्भया मामले की ही तरह कितने दिन लगेंगे अभियुक्तों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में। फांसी इसलिए क्योंकि जो 2012 में निर्भया के साथ हुआ था, यहां उससे भी ज़्यादा बर्बरता की गई है। 

इंसाफ़ में देरी क्यों?

निर्भया के दोषियों को सजा मिलने में 8 साल का वक्त लगा था। सरकार को सोचना चाहिए कि बलात्कार के मामलों में दोषियों को फांसी तक पहुंचाने में इतना लंबा समय क्यों लग रहा है। निर्भया के परिवार ने अपनी बेटी को खोया, वह परिवार 8 साल तक अदालतों से लेकर हर उस संस्था के चक्कर लगाता रहा, जहां उसे न्याय की आस दिखी। लेकिन हर पीड़ित परिवार 8 साल तक जंग नहीं लड़ पाएगा। इसलिए बलात्कार के मामलों में फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर जल्द से जल्द सजा का प्रावधान होना चाहिए। इसे लेकर भी निर्भया मामले के बाद से ही आवाज़ उठ रही है लेकिन अब तक कुछ होता नहीं दिखा है। 

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