पुरानी करेंसी।
अपने 8 नवंबर 2016 के भाषण में पीएम मोदी ने कहा था कि देश में जितना ज्यादा कैश सर्कुलेशन में है, उसका सीधा संबंध भ्रष्टाचार से है। हालांकि जीडीपी के प्रतिशत के मुताबिक ही कैश का सर्कुलेशन होना चाहिए। उस समय 2016 तक पिछले 5 वर्षों में कैश का फ्लो और जीडीपी प्रतिशत 11 फीसदी के आसपास या उससे थोड़ा ज्यादा था। सरकार ने अमेरिका का हवाला देते हुए कहा था कि वहां यह 7.7 फीसदी के लेवल पर था और भारत में 11.5 फीसदी के लेवल पर था। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह नहीं बताया कि नोटबंदी के तीन साल बाद कैश सर्कुलेशन और जीडीपी फिर से उसी लेवल पर आ गए।
सरकार और आरबीआई की यह बात विरोधाभासी है कि कैश सर्कुलेशन और जीडीपी बढ़ रहा था और अर्थ व्यवस्था घट रही थी। आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड ने स्पष्ट कहा कि आरबीआई के विश्लेषण में खामी है। हकीकत यह है कि अर्थव्यवस्था की विकास दर वास्तविक है और उसके मुकाबले कैश सर्कुलेश में बढ़ोतरी नाममात्र की है। खैर, यहां यह बताना जरूरी है कि सरकार ने उन 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों की जो करेंसी पेश की, वो फिर से 500 और 2000 के नोट थे। बहुत सारे लोगों ने अपने पुराने नोट के बदले दो हजार के नोट में ब्लैकमनी कन्वर्ट कर ली। यह सब सरकार और आरबीआई के सामने हुआ।