loader

राष्ट्रपति को पूर्व जज गंभीर की चिट्ठी, न्यायपालिका बचाएँ

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज कैलाश गंभीर ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के मसले पर कॉलिजियम के फ़ैसला बदलने से नया विवाद पैदा हो गया है। न्यायपालिका से जुड़े लोगों में काफ़ी रोष है। इस संदर्भ में पूर्व जज कैलाश गंभीर ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उन्होंने फ़रियाद की है कि अगर 10 जनवरी के कॉलिजियम के फ़ैसले के तहत जजों की नियुक्ति की जाएगी तो उससे अनर्थ हो जाएगा। उनका कहना है कि देश भर में 32 और जज जस्टिस संजीव खन्ना से सीनियर हैं। लिहाज़ा, वह कॉलिजियम की राय पर अपनी मुहर न लगाएँ। उनकी चिट्ठी इस तरह से है - 

महामहिम,

यह चिट्ठी मैं आपको भारी मन से लिख रहा हूँ। 

11 जनवरी, 2019 को सारे न्यूज़ चैनलों पर यह ब्रेकिंग न्यूज़ थी कि सुप्रीम कोर्ट के कॉलिजियम ने कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश माननीय दिनेश माहेश्वरी और दिल्ली हाई कोर्ट के जज माननीय जस्टिस संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफ़ारिश की है। पहले तो मुझे माननीय जस्टिस संजीव खन्ना की प्रोन्नति पर यक़ीन नहीं हुआ कि कैसे दिल्ली हाई कोर्ट में अत्यंत योग्य और बेहद ईमानदार और देश भर में वरिष्ठता के मामले में 30 और जजों की अनदेखी कर उनका नाम बढ़ाया गया। इस ख़बर की पुष्टि के लिए मैं लगातार चैनल बदलता रहा और मुझे यह ख़बर सही लगी। जो क़ानूनी मसलों से जुड़ी वेबसाइट हैं, वहाँ भी इस मामले की विस्तृत कवरेज देखने को मिली। इसके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर भी कॉलिजियम के फ़ैसले की जानकारी थी। 

आपको इस बात की जानकारी हो सकती है कि वेबसाइट पर यह लिखा है कि कॉलिजियम ने सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों और दूसरे नंबर के जजों के नामों पर भी विचार-विमर्श किया और वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि ये दोनों व्यक्ति हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और दूसरे नंबर के जजों से ज़्यादा योग्य और क़ाबिल पाए गए।

कॉलिजियम ने अपने फ़ैसले में 12 दिसंबर 2018 को लिए गए कुछ दूसरे फ़ैसलों का भी ज़िक्र किया है। कॉलिजियम का प्रस्ताव यह भी कहता है कि अदालत में शीतकालीन छुट्टी की वजह से आवश्यक परामर्श नहीं किया जा सका और जब अदालत छुट्टी के बाद खुली तब तक कॉलिजियम की संरचना बदल चुकी थी। 

Ex-Delhi HC Judge Kailash Gambhir To President on Khanna, Maheshwari - Satya Hindi
पूर्व जज गंभीर की राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी का पहला पेज

ईमानदारी की बात यह है कि इस ब्रेकिंग न्यूज़ ने सारी परंपराओं को तोड़ दिया है और इस वजह से पूरे न्यायिक और वैधानिक समुदाय में तूफ़ान खड़ा हो गया है। देश के कई मुख्य न्यायाधीश समेत 32 जजों के विवेक, योग्यता और ईमानदारी को दरकिनार करने वाला यह फ़ैसला भयावह और चौंकाने वाला है। हम सब लोग जानते हैं कि माननीय जस्टिस संजीव खन्ना, न केवल पूर्व माननीय जस्टिस डी. आर. खन्ना के बेटे हैं, बल्कि अति सम्मानित माननीय जस्टिस एच. आर. खन्ना के भतीजे भी हैं। 

न्यायपालिका से जुड़े लोगों के बीच यह चर्चा गर्म है कि जस्टिस खन्ना को प्रोन्नति उनके महान चाचा की विरासत को सम्मान, उनके महान आदर्शों, उसूलों और दर्शन के साथ ही बंदी प्रत्यक्षीकरण के मामले में उनके साहसिक क़दम को सम्मान देने की कोशिश है। हम सब जानते हैं कि इमर्जेंसी के दौरान जब सरकार ने नागरिकों के जीवन और सुरक्षा पर जिस तरीके के प्रतिबंध लगाए थे, जिसको सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जजों ने सही ठहराने का काम किया था, उस वक़्त जस्टिस खन्ना चट्टान की तरह खड़े रहे और विरोध में अपनी आवाज़ बुलंद की। 

Ex-Delhi HC Judge Kailash Gambhir To President on Khanna, Maheshwari - Satya Hindi
पूर्व जज गंभीर की राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी का दूसरा पेज

ऐसा कहा जाता है कि जस्टिस खन्ना कोर्ट के बहुमत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हस्ताक्षर करते समय जानते थे कि वह कभी मुख्य न्यायाधीश नहीं बन पाएँगे। जब वह वक़्त आया तब जस्टिस खन्ना की वरिष्ठता को नज़रअंदाज कर जस्टिस एम. एच. बेग को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। जस्टिस खन्ना ने उन तमाम लोगों को जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता से खिलवाड़ करने के पक्ष में थे, इस्तीफ़ा देकर उनके गाल पर तमाचा मारा था। जस्टिस खन्ना की जगह जस्टिस बेग की नियुक्ति को भारतीय न्यायपालिका के इतिहास मे काला अध्याय माना जाता है। 

दिसंबर, 1978 को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर दो में उनकी आदम क़द तस्वीर लगाई गई। आज तक किसी और जज को यह सम्मान हासिल नहीं हुआ कि उनके जीवित रहते सुप्रीम कोर्ट में उनकी तस्वीर लगाई जाए। 

अभी ज़्यादा वक़्त नहीं हुआ है जब माननीय चीफ़ जस्टिस गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के चार अन्य जजों के साथ ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की और उन मसलों को उठाया था जो वे उस वक़्त के मुख्य न्यायाधीश के रहते हुए झेल रहे थे। 

तब मीडिया को संबोधित करते हुए कहा गया था कि अगर इस संस्थान की सुरक्षा नहीं की गई तो इस देश में लोकतंत्र नहीं बचेगा। यह भी कहा गया था कि स्वतंत्र न्यायपालिका के बग़ैर लोकतंत्र नहीं बचेगा। 

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र जो अपनी मज़बूत न्यायपालिका के लिए मशहूर है, के मुखिया होने के नाते

महामहिम से मैं यह गुज़ारिश करता हूँ कि वह इस मामले पर ग़ौर करें। आप ख़ुद न्यायपालिका से जुड़े रहे हैं, लिहाजा आप ख़ुद देखें कि कैसे कॉलिजियम के 5 वरिष्ठतम जजों ने लगभग 32 वरिष्ठ जजों की वरिष्ठता को नकारा है। ऐसे में लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता कैसे अक्षुण्ण रहेगी। 

यह नहीं भूला जा सकता कि डेढ़ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट की कॉलिजियम ने माननीय जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की वरिष्ठता को नज़रअंदाज किया था और अब मामूली अंतराल के बाद वही सबसे योग्य उम्मीदवार मान लिए गए हैं।  

एक ऐसी ऊर्जावान न्यायपालिका जिसने समय-समय पर अपनी साख पर उठने वाले सवालों का बड़ी मजबूती से सामना किया है, उसके एक सदस्य के रूप मे मैं यह चिट्ठी लिख रहा हूँ। लेकिन मुझे यह डर है कि न्यायपालिका की साख़ नहीं बचेगी। इन 32 जजों में बहुत से ऐसे हैं जो जस्टिस खन्ना से कम योग्य और ईमादार नहीं है और जिनकी योग्यता को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है, अगर उनकी अनदेखी होगी तो यह एक काला दिन साबित होगा। न्यायपालिका की विरासत, जिस पर हम लोगों को गर्व है और जिस विरासत को कॉलिजियम भी पूरी निष्ठा के साथ बचा कर रखना चाहता है, उसके साथ अगर ऐसा होगा तो वह किसी दुर्भाग्यपूर्ण विडंबना से कम नहीं होगा। 

ऊपर कही गई बातों के सदर्भ में मैं विनम्रतापूर्वक प्रार्थना करता हूँ कि एक और ऐतिहासिक ग़लती न होने दी जाए। 

सादर, 

कैलाश गंभीर

'सत्य हिन्दी'
सदस्यता योजना

'सत्य हिन्दी' अपने पाठकों, दर्शकों और प्रशंसकों के लिए यह सदस्यता योजना शुरू कर रहा है। नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से आप किसी एक का चुनाव कर सकते हैं। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है, जिसका नवीनीकरण सदस्यता समाप्त होने के पहले कराया जा सकता है। अपने लिए सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण को ध्यान से पढ़ें। हम भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता प्रमाणपत्र आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें