लद्दाख के गलवान घाटी में चीन ने जो किया उससे जुड़े सवालों पर आख़िर बीजेपी बौखला क्यों जाती है? सोमवार को भी जनरल नरवणे से जुड़े राहुल के दावे पर जो हंगामा हुआ वह लद्दाख से जुड़ा मामला ही है। तो सवाल है कि आख़िर चीन ने लद्दाख में 2020 में ऐसा क्या किया था कि उससे जुड़े सवालों पर हंगामा मच गया?

इस सवाल का जवाब ढूंढने से पहले यह जान लें कि लोकसभा में सोमवार को क्या हुआ। सदन में सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र करके मोदी सरकार पर निशाना साधा।

राहुल गांधी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के दौरान पूर्व सेना प्रमुख की किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' का हवाला दिया। किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन 'द कारवां' मैगजीन ने इसके कुछ हिस्सों को छापा है। राहुल ने कहा कि किताब में 2020 की चीन आक्रामकता के बारे में चौंकाने वाले खुलासे हैं, जिससे सरकार की कमजोरी सामने आती है। राहुल ने कहा कि किताब बताती है कि अगस्त 2020 में चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर सरकार ने सेना को मुश्किल काम सौंपा था। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि चीन ने भारतीय जमीन पर कब्जा किया, लेकिन मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया।
इससे सदन में हंगामा हो गया और लोकसभा दो बार स्थगित करनी पड़ी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य बीजेपी नेताओं ने राहुल पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। राहुल ने कहा कि सरकार डरी हुई है और सच छिपाना चाहती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अप्रकाशित किताब का जिक्र सदन में नहीं किया जा सकता, यह नियमों के खिलाफ है। अमित शाह ने राहुल पर सदन को भ्रमित करने का आरोप लगाया। स्पीकर ओम बिरला ने भी किताब पढ़ने की अनुमति नहीं दी। 

गलवान पर कांग्रेस ने कहा है कि सरकार सच से डरती है और नियमों का गलत इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार अपनी नाकामी छिपाना चाहती है। तो सवाल है कि आख़िर गलवान का सच क्या है?

गलवान घाटी की घटना क्या थी?

यह मामला 2020 की गर्मियों से शुरू हुआ। मई 2020 से भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ा। लद्दाख के गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए। 15 जून 2020 को रात में झड़प हुई। दोनों तरफ हथियारों का इस्तेमाल नहीं हुआ, लेकिन पत्थरों, लाठियों और कील लगी छड़ों से लड़ाई हुई। इसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए, जिनमें कर्नल संतोष बाबू भी शामिल थे। चीन ने पहले एक सैनिक की मौत मानी, लेकिन बाद में 4 सैनिकों की मौत की पुष्टि की। कुछ रिपोर्टें कहती हैं कि चीनी सैनिकों की मौत ज्यादा हुई, कई नदी में डूब गए।

झड़प का कारण

दोनों देशों के सैनिक डिसइंगेजमेंट यानी पीछे हटने पर सहमत थे, लेकिन चीनी सैनिकों ने भारतीय इलाके में टेंट और टावर बनाए। भारतीय सैनिकों ने उन्हें हटाया, तो चीनी सैनिकों ने हमला कर दिया। यह 1975 के बाद पहली घातक झड़प थी। गलवान घाटी सामरिक रूप से अहम है, क्योंकि यह अक्साई चिन की ओर जाती है, जो भारत का दावा है लेकिन चीन के कब्जे में है।

कांग्रेस सहित विपक्ष के आरोप क्या हैं?

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मोदी सरकार पर आरोप लगाते हैं कि 2020 की घटना में सरकार ने चीन के सामने घुटने टेक दिए। राहुल गांधी ने कई बार कहा कि चीन ने भारतीय जमीन पर कब्जा किया, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोई घुसपैठ नहीं हुई। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया और सेना को सही निर्देश नहीं दिए।

जनरल नरवणे की किताब में दावा है कि अग्निपथ योजना सेना के लिए झटका थी और 2020 में राजनीतिक फैसलों की कमी से समस्या बढ़ी। विपक्ष कहता है कि सरकार ने चीन को 2000 वर्ग किमी जमीन सौंप दी। राहुल ने लद्दाख में भी कहा कि चीन हमारी जमीन पर कब्जा कर रहा है, लेकिन पीएम को कोई फर्क नहीं पड़ता। बीजेपी इसे झूठ कहती है और कहती है कि सीमाएं अब सुरक्षित हैं।

लद्दाख घटना के बाद कितना कब्जा?

लद्दाख घटना के बाद चीन द्वारा भारतीय जमीन पर कब्जा किए जाने के विवादित आंकड़े हैं। कुछ रिपोर्टें कहती हैं कि 2020 के बाद चीन ने लद्दाख में 2000 वर्ग किमी भारतीय जमीन पर कब्जा कर लिया। हालाँकि, सरकार ने इन दावों को खारिज किया है और कहा है कि कोई भी भारतीय जमीन में नहीं घुसा है। सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि चीन ने वहां वॉचटावर, बंकर और कैम्प बनाए हैं।
सरकार कहती है कि कोई जमीन नहीं खोई, लेकिन रक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट में चीनी घुसपैठ मानी गई। हालाँकि, बाद में इस रिपोर्ट को हटा लिया गया। चीन 38,000 वर्ग किमी अक्साई चिन पर पहले से कब्जा किए है और 90,000 वर्ग किमी अरुणाचल में दावा करता है। 2024 में दोनों देशों ने कुछ इलाकों से सैनिक हटाने पर सहमति जताई, लेकिन तनाव बरकरार है।

यह विवाद भारत-चीन संबंधों को प्रभावित कर रहा है।