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सरकार ने पहलवानों को बातचीत के लिए बुलाया, अनुराग ठाकुर का ट्वीट

ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार अब पहलवानों का मुद्दा सुलझाना चाहती है। केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने आज एक ट्वीट में कहा कि सरकार पहलवानों से उनके मुद्दों पर बातचीत करना चाहती है। मैं सभी पहलवानों को फिर से बातचीत के लिए आमंत्रित कर रहा हूं। 7 महिला पहलवानों ने भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पहलवान एक महीने से भी ज्यादा समय से इस मुद्दे पर आंदोलन चला रहे हैं। 

चंद दिनों पहले इन्हीं मुद्दों पर बातचीत के लिए पहलवानों ने गृह मंत्री अमित शाह से अचानक ही मुलाकात की थी। लेकिन उस बातचीत के बाद किसी तरह के समझौते की कोई बात सामने नहीं आई थी। लेकिन मीडिया में इस तरह की फर्जी खबरें फैलाई गईं कि पहलवानों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है। उनमें मतभेद पैदा हो गए हैं। तब पहलवान विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया ने इसका जबरदस्त खंडन किया और कहा कि हमने आंदोलन वापस नहीं लिया है। हमारा आंदोलन जारी है। 

प्रधानमंत्री मोदी 21 जून को अमेरिका की यात्रा पर जा रहे हैं। समझा जाता है कि वो अमेरिका जाने से पहले पहलवानों का मुद्दा खत्म करना चाहते हैं ताकि उनके जाने के बाद कोई बड़ा बवाल न हो। सरकार की इस पहल की पुष्टि अमित शाह से हुई मुलाकात और अब आज अनुराग ठाकुर के ट्वीट ने कर दी है।
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पहलवानों ने शनिवार को देर रात शाह के साथ बैठक की थी। पहलवान बजरंग पुनिया ने मंगलवार देर रात एनडीटीवी के रिपोर्टर सौरभ शुक्ला से बातचीत में कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारी पहलवानों से कहा था कि इस मुलाकात के बारे में मीडिया को कुछ नहीं बताया जाए। लेकिन सबसे पहले मीडिया ने ही सरकारी सूत्रों के हवाले से खबरें फैलाईं कि पहलवानों की मुलाकात गृह मंत्री से हुई है। बजरंग पुनिया ने एनडीटीवी से कहा था कि हमारी गृह मंत्री या सरकार के साथ किसी भी तरह की मिलीभगत नहीं है। हमें अमित शाह सूचित किया कि जांच चल रही है।
बजरंग पुनिया ने एनडीटीवी से बातचीत में साफ शब्दों में कहा- "हमारा विरोध आंदोलन खत्म नहीं हुआ है, यह जारी रहेगा। हम इसे आगे बढ़ाने की रणनीति बना रहे हैं।" पुनिया ने कहा-

एथलीट सरकार की प्रतिक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं, न ही सरकार हमारी मांगों पर सहमत हो रही है।


-पहलवान बजरंग पुनिया, 7 जून 2023 सोर्सः एनडीटीवी

समझा जाता है कि बजरंग पुनिया ने मंगलवार देर रात एनडीटीवी को दिए गए इंटरव्यू में जब साफ कर दिया कि आंदोलन जारी है और आगे की रणनीति बन रही है तो सरकार को फिर से बातचीत की पहल के लिए मजबूर होना पड़ा। सरकार यह भी जानती थी कि पिछली बार की गुप्त मुलाकात का गलत संदेश गया है और पहलवान इस चालाकी को समझ चुके हैं तो इस बार खेल मंत्री को ट्वीट कर पहलवानों को बातचीत के लिए बुलाना पड़ा। सरकार के पास इस तरह के इनपुट हैं कि चूंकि सभी पहलवान हरियाणा से हैं, इसलिए कम से कम भाजपा शासित हरियाणा में पार्टी को इसकी भारी कीमत चुकाना पड़ सकती है। इन्हीं सब बातों के मद्देनजर अब फिर से बातचीत की पहल की गई है।
बताया जाता है कि अमित शाह ने बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक, संगीता फोगट और सत्यव्रत कादियान के साथ शनिवार रात 11 बजे एक घंटे से अधिक समय तक मुलाकात की थी। इतनी लंबी बैठक के बाद भी पहलवान सरकार से कोई आश्वासन नहीं पा सके थे। पहलवानों की सबसे प्रमुख मांग सांसद बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी है। बाकी मुद्दे इसके बाद हैं। 
इस बीच मंगलवार को हुए घटनाक्रम में दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में कई लोगों से पूछताछ की है। कुश्ती महासंघ के तीन से चार सदस्यों से पूछताछ की गई है। भाजपा सांसद के दिल्ली आवास पर भी कुछ कर्मचारियों को पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया है। दिल्ली पुलिस की एक टीम मंगलवार सुबह गोंडा में सांसद के आवास पर पहुंची थी। वहां करीब 15 लोगों से पुलिस ने पूछताछ की थी। इसमें बृजभूषण के समर्थक और वहां काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल थे।

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने मंगलवार को कहा था कि बीकेयू ने पहलवानों से अपना समर्थन वापस नहीं लिया है और पहलवानों के अनुरोध पर बृजभूषण के खिलाफ 9 जून के प्रदर्शन को स्थगित किया है। उन्होंने कहा, "हम लोग पहलवानों की अमित शाह के साथ हुई बैठक से अवगत थे और पहलवानों के साथ निकट संपर्क में थे। हमें किसी भी बड़े विरोध या प्रदर्शन से बचने के लिए कहा गया है।"

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शुक्रवार को कुरुक्षेत्र में एक 'महापंचायत' में, टिकैत ने कहा था कि किसान संगठन भाजपा सांसद सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करेंगे। किसान नेता ने आंदोलन को तेज करने और विरोध करने वाले पहलवानों को दिल्ली के जंतर मंतर पर वापस लाने की धमकी भी दी। इसके लिए टिकैत ने 9 जून की तारीख घोषित की थी। लेकिन बाद में उस आह्वान को वापस ले लिया गया। इससे पहले पहलवानों ने जब हरिद्वार जाकर अपने मेडल गंगा में प्रवाहित करने चाहे थे तो राकेश टिकैत के भाई नरेश टिकैत ने वहां अचानक पहुंचकर पहलवानों को ऐसा करने से रोक दिया और पांच दिनों की मोहलत मांगी। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि टिकैत भाइयों ने ही दोनों बार पहलवानों से समय मांगा। पहली बार पांच दिनों का और फिर कुरुक्षेत्र की पंचायत में 9 जून की समय सीमा तय की। लेकिन पहलवानों ने अब साफ कर दिया है कि उन लोगों से बिना पूछे कोई पंचायत नहीं की जाए और वे खुद इस मामले को डील करेंगे।

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क़मर वहीद नक़वी
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