सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर अपने खिलाफ खबरें हटवाने की सरकारी गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। गृह मंत्रालय ने रोज़ाना औसतन 290 टेकडाउन नोटिस जारी किए और 1,11,185 कथित ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करा दिया। यह चिन्ताजनक है।
गृह मंत्रालय (एमएचए) ने ऑनलाइन कंटेंट पर शिकंजा कसते हुए एक साल के अंदर ही औसतन रोज़ाना 290 टेकडाउन नोटिस जारी किए हैं। गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, 13 मार्च 2024 को भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत कार्य करने का अधिकार मिला था। इसके ठीक एक साल बाद, 31 मार्च 2025 तक कुल 1,11,185 संदिग्ध ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक कर दिया गया। इसमें ज्यादातर वो कंटेंट हैं, जिन्हें सरकार विरोधी माना जाता है।
धारा 79 क्या कहती है?
आईटी एक्ट की धारा 79 (1) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इंटरमीडियरीज को यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी से बचाती है। लेकिन धारा 79(3)(b) के तहत अगर सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा फ्लैग किए गए कंटेंट को प्लेटफॉर्म नहीं हटाते, तो यह सुरक्षा (शील्ड) लागू नहीं होती। इस प्रावधान के तहत I4C को सीधे टेकडाउन नोटिस जारी करने का अधिकार मिला है। देशभर की पुलिस ‘सहयोग’ पोर्टल के जरिए इन नोटिस को भेज सकती है।
एक्स को दिए गए नोटिस
पिछले साल मार्च में द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, I4C ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को 66 टेकडाउन नोटिस भेजे थे, जिनमें से लगभग एक तिहाई (करीब 30 प्रतिशत) केंद्रीय मंत्रियों और केंद्र सरकार की एजेंसियों से संबंधित कंटेंट को हटाने के लिए थे। एक्स ने धारा 79(3)(b) और सहयोग पोर्टल को चुनौती देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन 2025 में अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
तीन घंटे में हटाना अनिवार्य
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने संसद को हाल ही में बताया कि सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज को अदालत के आदेश या सरकार/उसकी एजेंसी द्वारा दिए गए उचित सूचना पर अवैध कंटेंट तीन घंटे के अंदर हटाना होता है। गृह मंत्रालय के अलावा अन्य सरकारी विभाग भी इस धारा के तहत टेकडाउन नोटिस जारी कर सकते हैं।
साइबर सुरक्षा घटनाओं में तेज वृद्धि
इस बीच, गृह मंत्रालय ने 24 मार्च को लोकसभा को बताया कि पिछले पांच वर्षों में भारत में साइबर सुरक्षा घटनाओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) के आंकड़ों के अनुसार:वर्ष 2025 में कुल 29.44 लाख साइबर सुरक्षा घटनाएं दर्ज की गईं, जो पिछले पांच सालों में सबसे अधिक है। वर्ष 2024 में यह संख्या 20.41 लाख थी।
CERT-In की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से सबसे अधिक साइबर घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं। CERT-In आईटी एक्ट की धारा 70B के तहत कार्य करता है।
यह आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब सरकार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अवैध, संदिग्ध और हानिकारक कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठा रही है। I4C को दिए गए अधिकारों के बाद टेकडाउन नोटिस की संख्या काफी बढ़ गई है, जो सरकार की साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन नियमन नीति की दिशा को दर्शाता है।