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प्रतीकात्मक फ़ोटो।

फिर दिखा गो रक्षकों का आतंक, गुरुग्राम में दो लोगों को पीटा

एक बार फिर कथित गो रक्षकों ने आतंक दिखाते हुए गुरुग्राम में दो लोगों को पीट दिया। घटना मंगलवार तड़के की है। कथित गो रक्षकों को इस बात की सूचना मिली थी कि कुछ लोग ट्रक में पशु का माँस ले जा रहे हैं। सूचना मिलने पर वहाँ बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठे हो गए। पुलिस का कहना है कि कथित गो रक्षकों ने ट्रक का पीछा किया और दो लोगों को पकड़ लिया। पकड़े गए लोगों के नाम सायल अहमद और ताईद बताए गए हैं। गुड़गाँव, मेवात, पलवल, रेवाड़ी और फ़रीदाबाद में लगभग 150 कथित गो रक्षकों ने अपना समूह बनाया हुआ है। सायल पलवल का जबकि ताईद मेवात का रहने वाला है।
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कथित गो रक्षकों का आरोप है कि ट्रक में गो माँस ले जाया जा रहा था। पुलिस ने माँस को जब्त कर लिया है। सायल और ताईद को, अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि शिकायत मिलने पर दोनों के ख़िलाफ सदर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है।
भवानी एंक्लेव में गोशाला चलाने वाली सविता कटारिया ने बताया कि उन्हें सुबह लगभग 5.30 बजे सूचना मिली कि दो ट्रकों में भरकर मेवात से दिल्ली की ओर पशुओं का माँस ले जाया जा रहा है। सविता के मुताबिक़, वे अपने साथियों के साथ इस्लामपुर गाँव में पहुँचीं और ट्रकों के आने का इंतजार करने लगीं। 6 बजे के आसपास मेवात से दो ट्रक आते दिखाई दिए लेकिन इसमें सवार चार लोग कूदकर भागने की कोशिश करने लगे। उन्होंने बताया कि इमसें से दो लोग भाग गए जबकि दो को पकड़ लिया गया।
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कटारिया ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत में कहा, ‘तब तक वहाँ भीड़ जमा हो चुकी थी और भीड़ ने पकड़े गए लोगों को पीटना शुरू कर दिया। मैंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस की सहायता से हमने भीड़ को तितर-बितर किया और दोनों को पुलिस को सौंप दिया।’

पुलिस ने बताया कि उन्हें इस बारे में सुबह 6.40 के आसपास सूचना मिली और सूचना देने वाले ने बताया कि लोगों ने दो लोगों को पशु के माँस से भरे वाहनों के साथ पकड़ा है। पुलिस के प्रवक्ता सुभाष बोकेन ने बताया कि शिकायत के आधार पर हरियाणा गो वंश संरक्षण और गो संवर्धन एक्ट 2015 के तहत माँस ले जा रहे लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर लिया गया है। 

अब सवाल यह उठता है कि क्या किसी फ़ॉरेंसिक लैब ने इस बात की पुष्टि की थी कि यह माँस गाय का ही था। और जब नहीं की थी तो आख़िर किस आधार पर पुलिस ने माँस ले जा रहे लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर लिया गया। इस आधार पर तो किसी को भी इसके लिए पीट दिया जाएगा कि वह माँस लेकर जा रहा है बिना इस बात की जाँच किए कि वह किस पशु का माँस है। 
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बता दें कि राजस्थान का अलवर जिला कथित गो रक्षा के नाम पर हुई मॉब लिंचिंग के कारण ख़ासा चर्चा में रहा था। अलवर में गो रक्षा के नाम पर मेवात के रहने वाले पहलू ख़ान और रक़बर ख़ान की हत्या कर दी गई थी। ग्रेटर नोएडा में घर में गो माँस रखे होने के शक में मुसलिम बुजुर्ग अख़लाक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। 

ग़ौरतलब है कि गोरक्षा के नाम पर देश में भीड़ द्वारा हो रही हत्याओं पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सख़्ती बरतते हुए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहा था। कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि लोकतंत्र में भीड़तंत्र के लिए कोई जगह नहीं है। 

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद गो रक्षकों के आतंक के कई मामले सामने आए थे। गो रक्षकों ने गाय और भैंस ले जाने वाले कई व्यापारियों की पिटाई की थी।
इस साल मई में गो रक्षा के नाम पर मध्य प्रदेश के सिवनी में महिला समेत तीन लोगों को बेरहमी से पीटे जाने का एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में कथित गो रक्षक एक महिला समेत तीन लोगों को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटते दिखे थे। कथित गो रक्षकों ने एक ऑटो में संदिग्ध माँस मिलने की सूचना पर तीनों को पकड़ा था। उन्होंने पुलिस को सूचना देने के बजाय तीनों को जमकर पीटा था। इस दौरान तीनों को जय श्री राम के नारे लगाने पर मजबूर किया गया था।
कथित गो रक्षकों के द्वारा दो लोगों की पिटाई की इस घटना के बाद यह सवाल खड़ा होता है कि लोग आख़िर क़ानून हाथ में लेने पर क्यों उतारू हैं। भीड़तंत्र की क्रूरता का ताज़ा उदाहरण हमारे सामने झारखंड में पीट-पीटकर मारे गए तबरेज़ अंसारी के रूप में है।

ऐसे ही एक मामले में पिछले साल बुलंदशहर में गो कशी की अफ़वाह के चलते ख़ासा बवाल हुआ था। बवाल में भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और एक स्थानीय युवक की हत्या कर दी थी। 

कहीं गो रक्षा के नाम पर तो कहीं ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्री राम’ बुलवाने पर अड़ी भीड़ किसी को बख़्शने को तैयार नहीं है। हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं जिनमें मुसलमानों को ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने को मजबूर किया गया और ऐसा न करने पर उनके साथ मारपीट की गई। भीड़तंत्र द्वारा ख़ुद ही किसी बात का फ़ैसला करने और आरोपी को बर्बरता से पीटने के ये मामले हमारे सभ्य समाज पर कलंक हैं।
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