होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने को लेकर ब्रिटेन ने भारत को बातचीत के लिए आमंत्रित किया तो भारत शामिल हुआ। विदेश सचिव स्तर की बैठक में अहम फैसलों की उम्मीद, जानें पूरा मामला और वैश्विक असर।
ब्रिटेन में गुरुवार को बुलाई गई कई देशों की बैठक में भारत ने कहा है कि संघर्ष से प्रभावित स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में अपने नागरिकों को खोने वाला वह एकमात्र देश है। ब्रिटेन द्वारा बुलाई गई बैठक का मक़सद इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलना था। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नई दिल्ली ने होर्मुज में मुक्त समुद्री आवाजाही के सिद्धांतों पर ज़ोर दिया। ब्रिटेन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए भारत समेत कई देशों को बहुपक्षीय बैठक के लिए आमंत्रित किया।
विदेश सचिव हुए शामिल
बैठक में 60 से ज़्यादा देशों ने हिस्सा लिया। इस वर्चुअल बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। विदेश सचिव ने भारत के उस आधिकारिक रुख को दोहराया कि मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष को सुलझाने के लिए कूटनीति ही सबसे सही रास्ता है। एएनआई द्वारा जारी मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, मिस्री ने इस तथ्य पर ज़ोर दिया कि खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाज़ों पर हुए हमलों में अपने नाविकों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है। भारत के शिपिंग महानिदेशालय के अनुसार, अब तक स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में हुए हमलों में कम से कम तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है; ये सभी नाविक विदेशी झंडे वाले व्यापारिक जहाज़ों पर काम करते थे।
भारत की चिंता
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा रास्ता है। यहाँ से दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है। इसराइल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया था, जिससे भारत समेत कई देशों को ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ा है।
बैठक से पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत ईरान और दूसरे देशों से लगातार संपर्क में है ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित और बिना रुकावट गुजरने की इजाजत मिल सके। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों की बातचीत से अच्छे नतीजे आए हैं। अब तक 6 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर चुके हैं और बातचीत जारी है।
ईरान का भारत को भरोसा
भारत ने ब्रिटेन में होने वाली इस बैठक में शामिल होने की घोषणा तब की है जब कुछ घंटे पहले ही ईरान ने भारत को विशेष रूप से भरोसा दिलाया है। ईरान के भारतीय दूतावास ने एक्स पर लिखा, 'हमारे भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं, कोई चिंता की बात नहीं है।' ईरान ने कहा है कि वह मित्र देशों- भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान- के जहाजों को गुजरने की इजाजत दे रहा है।अभी कितने जहाज अटके हैं?
अब तक 6 भारतीय जहाज होर्मुज से बाहर निकल चुके हैं। अभी भी 19 से ज़्यादा जहाज भारत के लिए होर्मुज में फंसे हुए हैं। इनमें भारतीय झंडे वाले जहाज भी हैं और विदेशी झंडे वाले जहाज भी।
क्यों है होर्मुज इतना जरूरी?
यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान इस पर नियंत्रण रखता है। अगर यह रास्ता बंद रहता है तो भारत को तेल, एलपीजी और एलएनपी की सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे घरेलू कीमतें बढ़ सकती हैं।होर्मुज पर बड़ा गठबंधन
युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रंप के लागातार ताने सुन रहे यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा है कि फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कनाडा और यूएई समेत कई देशों ने एक बयान पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें समुद्री सुरक्षा बहाल करने में सहयोग करने पर सहमति जताई गई है। स्टार्मर ने कहा, 'इस बैठक में उन सभी संभावित कूटनीतिक और राजनीतिक उपायों का आकलन किया जाएगा, जिन्हें हम नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने, फँसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ज़रूरी चीज़ों की आवाजाही फिर से शुरू करने के लिए अपना सकते हैं।'
स्टार्मर ने आगे कहा, 'उस बैठक के बाद हम अपने सैन्य योजनाकारों को भी बुलाएँगे ताकि यह देखा जा सके कि लड़ाई रुकने के बाद हम अपनी क्षमताओं को कैसे जुटा सकते हैं और जलडमरूमध्य को सुलभ और सुरक्षित बना सकते हैं।' भारत की सक्रिय भूमिका
भारत इस मुद्दे पर ईरान और दूसरे क्षेत्रीय देशों के साथ सक्रिय कूटनीति चला रहा है। यूके द्वारा बुलाई गई बैठक में भी भारत ने सक्रिय भूमिका निभाई। विदेश मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि भारतीय जहाजों के लिए ईरान से कोई टोल या पैसे देने जैसा कोई समझौता नहीं हुआ है।
यह मुद्दा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है, क्योंकि भारत अपना बड़ा हिस्सा तेल और गैस मध्य पूर्व से आयात करता है।