अमेरिका-इसराइल के ईरान पर हमलों के कारण युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। भारत में 23वां दिन है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित कर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित की है, जिससे भारत जैसे देशों पर सीधा असर पड़ा है। भारत अपनी 90% एलपीजी और बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात मध्य पूर्व से करता है। युद्ध के चलते शिपिंग रुकने से सप्लाई चेन टूट गई है। लेकिन मोदी सरकार को इस संकट से निपटने के लिए अब होश आया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 मार्च को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बात की और होर्मुज में नेविगेशन की स्वतंत्रता पर जोर दिया। UAE और कुवैत जैसे देशों से भी संपर्क हुआ। लेकिन घरेलू स्तर पर ऊर्जा संकट (पेट्रोलियम, क्रूड, गैस, पावर, फर्टिलाइजर) की समीक्षा के लिए पहली बार 22 मार्च (रविवार) को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) या उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई गई। इसमें एक मंत्रियों और सचिवों की समिति गठित की गई, जो पूरे सरकारी तंत्र से निगरानी करेगी और आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। सवाल यही है कि आखिर यह सब करने की नौबत 22 दिन बाद क्यों आई।

जमीनी हकीकत vs सरकारी दावा

सरकार का दावा है कि “कोई संकट नहीं है”, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित है और विपक्ष डर फैला रहा है। लेकिन वास्तविकता अलग है: घरेलू एलपीजी सिलिंडर (14.2 किलो) की कीमत पहले बढ़ाई जा चुकी है (लगभग ₹913 दिल्ली में), लेकिन ब्लैक मार्केट में ₹900 वाला सिलिंडर ₹4,000 तक बिक रहा है। पैनिक बुकिंग, लंबी कतारें रोजाना लग रही हैं। तेल कंपनियों ने एलपीजी बुकिंग वाला पोर्टल लगभग जाम कर रखा है। गैस एजेंसियों के बाहर पुलिस खड़ी है, अंदर से ब्लैक में लेन-देन हो रहा है। सरकार इस जमाखोरी पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। कमर्शियल/औद्योगिक एलपीजी और विशेष फ्यूल/बल्क इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतें ₹22 प्रति लीटर तक बढ़ गई हैं (लगभग 25% उछाल)। रेस्तरां, होटल और एमएसएमई प्रभावित; एलपीजी खपत घट गई है। कई रेस्टोरेंट में या तो खाने-पीने की चीजें महंगी कर दी गई हैं या उन्हें गैस के अभाव में बंद कर दिया गया है। लेकिन मोदी सरकार कह रही है कि सब ठीक है।


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सरकार ने पहले (13 मार्च) ही कहा था कि भारत कोई ऊर्जा संकट नहीं झेलेगा, लेकिन 22 दिन बाद कमेटी बनानी पड़ी। यह देरी स्पष्ट है – संकट शुरू होते ही ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई थी, फिर भी तत्काल स्टॉकपाइलिंग, वैकल्पिक आयात या सब्सिडी एडजस्टमेंट जैसे कदम नहीं उठाए गए।

विपक्ष का सवाल और राहुल गांधी की चेतावनी

विपक्ष पूछ रहा है– युद्ध शुरू होते ही एलपीजी संकट क्यों पैदा हुआ और 22 दिन इंतजार क्यों? नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बार-बार चेतावनी दी है कि रुपया 100 के पार जाने वाला है, औद्योगिक ईंधन महंगा हो रहा है और “महंगाई का बड़ा संकट” आने वाला है। उन्होंने कहा: पेट्रोल-एलपीजी कीमतें चुनाव के बाद और बढ़ाई जाएंगी; उत्पादन-परिवहन महंगा, एमएसएमई प्रभावित होंगे, आम परिवारों पर बोझ। कांग्रेस ने सरकार पर “रणनीति की कमी” और “मौन” का आरोप लगाया है।

पीएम मोदी आज संसद में क्या बोलेंगे

पीएम मोदी 23 मार्च को संसद को संबोधित करने वाले हैं। आज संसद में बोलते हुए पीएम मोदी संभवतः यही कहेंगे: “मैंने UAE, कुवैत और ईरान के राष्ट्रपति से बात की है। कोई संकट नहीं है, लेकिन सतर्क रहना होगा।” कूटनीति और विविधीकरण का जिक्र होगा। लेकिन जमीनी सच्चाई- ब्लैक मार्केटिंग और महंगाई का डर को संबोधित करना मुश्किल होगा, क्योंकि सरकारी दावे और वास्तविकता में अंतर साफ है।
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ईरान युद्ध ने भारत की ऊर्जा निर्भरता उजागर कर दी है। सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर प्रयास किए, लेकिन घरेलू स्तर पर 22 दिन की देरी और “कोई संकट नहीं” वाला दावा जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता। ब्लैक मार्केट, महंगाई का खतरा और आम जनता पर बोझ वास्तविक हैं। आज संसद में पीएम को सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कदमों का रोडमैप देना होगा। वरना विपक्ष की आलोचना और जनता की पीड़ा दोनों बढ़ेगी।