महात्मा गाँधी ने पूरे देश में रॉलट एक्ट का ज़ोरदार विरोध करने का एलान किया था। इससे घबराई ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गाँधी को गिरफ़्तार कर लिया था।
गाँधी के साथ ही रॉलट एक्ट का विरोध कर रहे कई प्रमुख नेताओं जैसे डॉ सैफ़ुद्दीन किचलू को भी ब्रिटिश सरकार ने जेल में डाल दिया था। लोग आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे थे और किसी भी क़ीमत पर अंग्रेजों को यहाँ से खदेड़ना चाहते थे।
इस हत्याकांड के सबसे बड़े गुनहगार थे पंजाब के तत्कालीन गवर्नर माइकल ओ डायर और गोली चलाने वाले जरनल रेजीनॉल्ड डायर। 1927 में रेजीनॉल्ड डायर की मौत हो गई थी और माइकल डायर ब्रिटेन लौट चुका था लेकिन पंजाब के नौजवान उधम सिंह के सीने में इसका बदला लेने की आग धधक रही थी।