जंतर-मंतर पर चल रहे नीट पेपर लीक विरोधी आंदोलन के बीच, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की पीएचडी स्कॉलर और आइसा की छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस पर तानाशाही और दमन का आरोप लगाया है। नेहा ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन हटाए जाने के बावजूद उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रहेगी। शनिवार को नेहा की भूख हड़ताल का 21वां दिन है।
नेहा बोरा ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 7 बजे कुछ लोग सादे कपड़ों में धरना स्थल (मंच के पास) में दाखिल हुए। इसके ठीक 5 से 10 मिनट बाद वहां भारी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया। नेहा के मुताबिक, भूख हड़ताल के 21वें दिन पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस ने 'मेडिकल चेकअप' और इलाज के बहाने वहां से जबरन हटा दिया।

आइसा के टेंट को पुलिस ने हटाने की कोशिश की

नेहा ने आरोप लगाया, "सोनम वांगचुक को ले जाने के बाद रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पुलिसकर्मियों ने हमारे आइसा (AISA) टेंट के चारों ओर बंधी रस्सी को तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठे अन्य छात्रों को भी हिरासत में लेने का प्रयास किया। लेकिन वहां मौजूद वालंटियर्स की भारी संख्या के कारण वे ऐसा नहीं कर पाए। दिल्ली पुलिस द्वारा एक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन को जबरन खत्म करने की यह कोशिश बेहद शर्मनाक है।"
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छात्रों ने बनाई मानव श्रृंखला (Human Chain)

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद माहौल और गरमा गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि वांगचुक के जाने के बाद भी नेहा बोरा, आमीन और मनीष की भूख हड़ताल जारी है। पुलिस अन्य अनशनकारियों को न हटा पाए, इसके लिए छात्र प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर धरना स्थल के चारों ओर एक मजबूत मानव श्रृंखला (ह्यूमन चेन) बना ली है।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के अनुसार, 21 दिनों से भूखी नेहा बोरा का ब्लड शुगर लेवल गंभीर रूप से गिर गया है और डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत अनशन खत्म कर अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है। उनके साथी आमीन और मनीष की हालत भी 20 दिनों के उपवास के बाद काफी बिगड़ चुकी है।

नेहा बोरा की छात्रों से अपील

नेहा बोरा ने देश भर के छात्रों और नागरिकों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील करते हुए कहा है, "यह सरकार 21 दिनों से बैठे छात्रों की सुध नहीं ले रही, बल्कि हमारे अनशन को जबरन दबाना चाहती है। यह आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते।"
नेहा बोरा वही हैं जिन्होंने जेएनयू आरक्षण, UGC रेगुलेशन, बहुजनों के अधिकारों के लिए बोलती रही हैं। 

आंदोलन का अगला कदम: संसद मार्च

सोनम वांगचुक को हटाए जाने के विरोध में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उन्होंने भावुक होते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि वांगचुक कोई अपराधी नहीं थे जिन्हें पर्दों के पीछे छिपाकर घसीटते हुए ले जाया गया। आइसा और कॉकरोच जनता पार्टी की मुख्य मांगें एक जैसी हैं। जिनमें प्रमुख हैंः

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।

  • परीक्षा की गड़बड़ियों के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा।

  • संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को संसद की ओर एक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का आह्वान किया गया है।
दिल्ली पुलिस का बयान नेहा बोरा पर मौन है। उसके बयान में सिर्फ सोनम वांगचुक का जिक्र है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सोनम वांगचुक को दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों और चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह के बाद सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है, क्योंकि उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था। पुलिस का कहना है कि जब वे उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन कर रहे थे, तब प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे वहां थोड़ी अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, पुलिस ने अधिकतम संयम बरता और इस पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से पूरा किया। पुलिस ने किसी भी प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट से साफ इनकार किया है।

जंतर मंतर अनशन स्थल से अपडेट

  • आइसा के छात्रों का प्रदर्शन जारी है
  • आइसा की कार्यकर्ता और जेएनयू स्कॉलर नेहा बोरा की सेहत में गिरावट, अनशन का 21वां दिन
  • सीजेपी के अभिजीत दिपके ने अब सोनम वांगचुक के समर्थन में अनशन शुरू कर दिया है
  • अभिजीत दिपके पर एक महिला ने स्याही फेंकी तो वहां अफरातफरी का माहौल बन गया है
  • विपक्ष ने एक स्वर में सोनम वांगचुक को जबरन हटाने की निन्दा की है