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असंसदीय शब्दों पर रार: जुमलेबाज को जुमलेबाज कहा जाएगा- कांग्रेस

लोकसभा सचिवालय द्वारा कई शब्दों को असंसदीय करार देने पर विपक्षी दलों ने प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि ऐसे शब्द जो बहस और चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री के द्वारा सरकार को चलाए जाने के बारे में बताते हैं, इनके बोलने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने प्रतिबंधित किए गए असंसदीय शब्दों का एक वाक्य लिखकर इसका उदाहरण दिया है। 

राहुल ने लिखा है कि जब जुमलाजीवी तानाशाह के झूठ और अक्षमता का पर्दाफाश हो जाता है तो वह घड़ियाली आंसू बहाता है।

बता दें कि संसद में अब कई शब्दों के बोले जाने पर रोक लगा दी गई है। इन शब्दों में जुमलाजीवी, तानाशाह और घड़ियाली आंसू भी शामिल हैं। इसके अलावा बाल बुद्धि, कोविड स्प्रेडर, स्नूपगेट, विश्वासघात, भ्रष्ट, नाटक, पाखंड और अक्षम जैसे शब्दों को भी असंसदीय करार दिया गया है। 

लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी की गई नई बुकलेट से यह बात सामने आई है।

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राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि जिन शब्दों का इस्तेमाल बीजेपी के नेता लगातार करते रहे हैं आज उन्हें ऐसा क्यों लग रहा है कि वे शब्द असंसदीय हैं।

लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि तोलाबाज को तोलाबाज कहते हैं और जुमलेबाज को जुमलेबाज कहा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बोल सकते हैं तो हम क्यों नहीं बोल सकते। उन्होंने न्यूज़ 24 से बातचीत में कहा कि जब उन्हें संसद से बाहर किया जाएगा तो देखा जाएगा। 

दिल्ली कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि अगर कुछ शब्दों को लेकर कानून में बदलाव करना है तो उसकी परंपरा यह है कि सभी दलों के नेताओं से बातचीत की जाती है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने टीवी कैमरे पर एक बार कहा था कि चुनाव में हम जो कहते हैं वह जुमले होते हैं तो हमने जुमलेबाज शब्द कहा, ऐसे में यह कहां से असंसदीय हो गया।

एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि अगर वह कहेंगे कि वह मोदी सरकार पर फूल बरसा कर मारेंगे क्योंकि उसने नौजवानों को बेरोजगार किया है तो क्या फूल शब्द को असंसदीय करार दे दिया जाएगा।

आंदोलनजीवी असंसदीय क्यों नहीं?

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा कि जिन शब्दों को असंसदीय करार दिया गया है उन्हें देखकर यह लगता है कि सरकार के काम को कौन से शब्द परिभाषित करते हैं। उन्होंने कहा कि जुमलाजीवी को तो असंसदीय करार दिया गया है जबकि आंदोलनजीवी को इस सूची में नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के बहुत बेसिक शब्दों को भी असंसदीय करार दिया गया है। 

टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि वह असंसदीय करार दिए गए शब्दों का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने चुनौती दी है कि उन्हें निलंबित किया जाए और वह लोकतंत्र के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

आम बोलचाल के कुछ शब्दों को असंसदीय करार दिए जाने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच में एक नई बहस छिड़ गई है।

लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी की गई बुकलेट के मुताबिक, अराजकतावादी, शकुनि, तानाशाही, तानाशाह, जयचंद, विनाश पुरूष, खालिस्तानी, खून से खेती जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल संसद में बहस के दौरान होने पर इन्हें संसद की कार्यवाही से निकाल दिया जाएगा।

इसके अलावा दोहरा चरित्र, निकम्मा, नौटंकी, ढिंढोरा पीटना, बहरी सरकार जैसे शब्द भी असंसदीय हैं और सांसदों से इनका प्रयोग ना करने की अपील की गई है।

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इन शब्दों को भी किया गया बाहर

कुछ और शब्द जैसे रक्तपात, खूनी, चमचा, चमचागिरी, चेला, बचकानापन, कायर, अपराधी और घड़ियाली आंसू जैसे शब्दों को भी असंसदीय बताया गया है। 

संसद के सत्र के दौरान अब से गधा, गुंडागर्दी, झूठ और असत्य जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल सांसद नहीं कर सकेंगे। इस्तेमाल न किये जा सकने वाले कुछ अन्य शब्दों में अराजकतावादी, गद्दार, गुंडे, अहंकार, काला दिन, काला बाजारी खरीद-फरोख्त आदि शामिल हैं। 

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