जस्टिस विश्वनाथन ने इससे निपटने के तरीक़े भी बताए। उन्होंने कहा कि जब तक इस तरह की गलत सूचना अनुच्छेद 19(2) के तहत अभियक्ति की स्वतंत्रता पर आठ उचित प्रतिबंधों में से एक के अंतर्गत नहीं आती है या हिंसा को भड़काने के बराबर नहीं माना जाता है, तब तक इसे प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है।