हिजाब में महिलाकर्मी लैब में काम करते हुए। फोटो साभार ओपन मैगजीन
पिछली सुनवाई (18 फरवरी) पर अटॉर्नी जनरल ने स्वीकार किया था कि हिजाब बैन करने वाले जीओ (सरकारी आदेश) को बेहतर तरीके से लिखा जाना चाहिए था और उसमें हिजाब के संदर्भ से बचा जा सकता था। एजी ने यह भी कहा था कि जीओ ड्राफ्ट करने वाले इसमें एकता और सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला देकर "अति उत्साही" हो गए।
एजी ने शिरूर मठ मामले का जिक्र किया और कहा कि जब तक यह एक धर्मनिरपेक्ष गतिविधि नहीं है, तब तक राज्य को धार्मिक मामलों में शामिल नहीं होना चाहिए। नवदगी ने कहा, हमारा रुख है कि हिजाब एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है। डॉ बी आर अंबेडकर ने संविधान सभा में बयान दिया था, जहां उन्होंने कहा था कि हम धार्मिक निर्देशों को शैक्षणिक संस्थानों के बाहर रखें।