कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने मोदी सरकार पर केरल राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को आवंटित करने में अडानी समूह का पक्ष लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे 'राजमार्ग घोटाला' करार दिया है।
अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने मोदी सरकार पर केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के ठेका आवंटन में अडानी समूह का पक्ष लेने का गंभीर आरोप लगाया है। लोकसभा में पूरक अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान यह मामला उठाया। उन्होंने इसे 'हाईवे घोटाला' करार देते हुए कहा कि केंद्र की भारी-भरकम खर्च से सुरक्षित सड़कें और जवाबदेह शासन नहीं बन रहा, बल्कि सार्वजनिक धन को चुनिंदा निजी लाभ में बदलने की व्यवस्था बनाई जा रही है।
वेणुगोपाल ने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि कासरगोड से कोल्लम तक राष्ट्रीय राजमार्ग 66 (एनएच-66) और एनएच-544 के दो प्रमुख मार्ग जनता की आंखों के सामने ढह रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, "केरल में जो हो रहा है, वह प्रकृति की मार नहीं है। यह एक ऐसी व्यवस्था का नतीजा है जहां सुरक्षा और वैज्ञानिक योजना की बजाय गति और मुनाफे को प्राथमिकता दी गई है।"
सांसद ने आरोप लगाया कि केरल में कुछ सड़क परियोजनाओं के ठेके प्रति किलोमीटर 45 करोड़ रुपये तक की ऊंची दर से दिए गए हैं। यह घोटाला अनजाने में नहीं, बल्कि जानबूझकर डिजाइन किया गया है और इसका माध्यम 2016 में मोदी सरकार द्वारा पेश की गई हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) है।
सांसद ने आरोप लगाया कि केरल में कुछ सड़क परियोजनाओं के ठेके प्रति किलोमीटर 45 करोड़ रुपये तक की ऊंची दर से दिए गए हैं। यह घोटाला अनजाने में नहीं, बल्कि जानबूझकर डिजाइन किया गया है और इसका माध्यम 2016 में मोदी सरकार द्वारा पेश की गई हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) है।
एक खास उदाहरण देते हुए वेणुगोपाल ने उत्तर केरल के अझियूर-वेंगलम खंड (एनएच-66) का जिक्र किया। यह परियोजना अडानी एंटरप्राइजेस को 1,832 करोड़ रुपये में दी गई, लेकिन इसे अहमदाबाद की वागड़ इंफ्राप्रोजेक्ट्स को मात्र 971 करोड़ रुपये में सब-कॉन्ट्रैक्ट कर दिया गया। यानी बोली राशि का लगभग आधा। इससे वास्तविक निर्माण लागत प्रति किलोमीटर 23.7 करोड़ रुपये बैठती है, जबकि अडानी की बोली 45 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर थी। उन्होंने कहा, "यह लूट कानूनी है क्योंकि व्यवस्था ही इसी तरह बनाई गई है।"
वेणुगोपाल ने केंद्र के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बजट का भी जिक्र किया। 2025-26 के लिए मंत्रालय ने करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित किया है, जो पिछले वर्ष से अधिक है। इसमें केवल सड़कों और पुलों के लिए 1.16 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का आवंटन है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतना बड़ा खर्च क्या सुरक्षित सड़कें और मूल्यवान सार्वजनिक धन का उपयोग सुनिश्चित कर रहा है या कुछ चुनिंदा लोगों के निजी मुनाफे में बदल रहा है।
इसके अलावा, उन्होंने भारतमाला परियोजना पर भी चिंता जताई। 2017 में मंजूर यह महत्वाकांक्षी योजना 2022 तक पूरी होनी थी, जिसकी अनुमानित लागत 5.35 लाख करोड़ रुपये थी। लेकिन आठ वर्ष बाद भी 88 प्रतिशत राशि खर्च होने के बावजूद केवल आधी सड़कें ही बन पाई हैं।
केरल में एनएच परियोजनाओं की गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, जहां कई जगह ऊंची सड़कें और पुल ढहने की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, इस विशिष्ट आरोप पर अदाणी समूह या केंद्र सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वेणुगोपाल ने मांग की है कि इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए ताकि सार्वजनिक धन की लूट रोकी जा सके।
यह आरोप लोकसभा में विपक्ष की उस व्यापक आलोचना का हिस्सा है जिसमें केंद्र पर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देने का इल्जाम लगाया जा रहा है। अभी तक नेता विपक्ष राहुल गांधी लगातार अडानी समूह पर हमला बोल रहे थे। लेकिन पहली बार किसी कांग्रेसी सांसद ने लोकसभा में ऐसा हमला बोला है।