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लखीमपुर हिंसा: आशीष की जमानत रद्द न करने पर SC ने की यूपी सरकार की खिंचाई

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य अभियुक्त आशीष मिश्रा की जमानत को रद्द न करने पर उत्तर प्रदेश सरकार की जमकर खिंचाई की। सीजेआई एनवी रमना ने उत्तर प्रदेश सरकार की पैरवी कर रहे वकील से कहा, “मामले की निगरानी कर रहे जज की रिपोर्ट से पता चलता है कि उन्होंने जमानत को रद्द करने की सिफारिश की थी और यह भी सिफारिश की थी कि इसके लिए आवेदन किया जाना चाहिए तो फिर ऐसा क्यों नहीं किया गया।”

बता दें कि पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज जस्टिस राकेश कुमार जैन को इस मामले की जांच निगरानी करने के लिए नियुक्त किया था।

सीजेआई ने कहा कि इस मामले में बनी विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने भी मुख्य सचिव (गृह विभाग) को पत्र लिखकर यह सिफारिश की थी कि जमानत को रद्द किया जाना चाहिए। 

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इसका जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है और उन्होंने इस रिपोर्ट को देखा भी नहीं है। 

इसके बाद उन्होंने अदालत कक्ष से बाहर जाकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से भी बात की और वापस आकर अदालत को बताया कि मुख्य सचिव के दफ्तर को एसआईटी या मामले की निगरानी कर रहे जज की ओर से ऐसी कोई सिफारिश नहीं मिली है।

सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार से कहा कि मामले की निगरानी कर रहे जज की ओर से जमा की गई रिपोर्ट की एक कॉपी उत्तर प्रदेश सरकार के वकील और याचिकाकर्ताओं को दी जाए। आशीष मिश्रा की ओर से पेश हुए वकील महेश जेठमलानी ने भी इसकी कॉपी मांगी और सुनवाई को अगले सोमवार तक स्थगित करने की अपील की। 

सीजेआई ने उनके अनुरोध को स्वीकार किया लेकिन कहा कि यह मामला 1 महीने से भी ज्यादा लंबा खिंच चुका है। 

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16 मार्च को भी सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था और पूछा था कि इस जमानत को रद्द क्यों न कर दिया जाए।

हाई कोर्ट ने दी थी जमानत

आशीष मिश्रा को बीते साल 9 अक्टूबर को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन पिछले महीने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मिश्रा को जमानत दे दी थी। आशीष मिश्रा की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील दुष्यंत दवे ने अदालत से कहा कि अभियुक्त आशीष मिश्रा के पिता केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं।

लखीमपुर खीरी की घटना में कुल 8 लोगों की मौत हुई थी। इन में से 4 किसान भी थे। किसानों के साथ ही बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं शुभम मिश्रा, श्याम सुंदर निषाद और हरि ओम मिश्रा की भीड़ ने जान ले ली थी। एक पत्रकार की भी मौत इस घटना में हुई थी। 

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