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नहीं मिला लापता विमान, सरकार, वायुसेना क्यों नहीं लेती ज़िम्मेदारी?

वायु सेना के लापता विमान एएन- 32 का अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है। विमान और इसमें सवार लोगों की तलाश का अभियान चौथे दिन जारी है। मौसम ख़राब होने के बावजूद अरुणाचल प्रदेश में मेंचुका पर्वत पर अभियान चलाया जा रहा है। विमान की तलाश में सेना, आईटीबीपी और स्थानीय पुलिस भी जोर-शोर से जुटी हुई हैं। वायु सेना के प्रवक्ता ने बताया कि जंगल, दुर्गम घाटी और ख़राब मौसम के बावजूद खोज और बचाव अभियान जारी है। लेकिन विमान के लापता होने के बाद यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि पहले हुई ऐसी घटना के बाद भी आख़िर सरकार, वायुसेना चेती क्यों नहीं?
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बुधवार को भी लापता विमान की तलाश की गई थी और इसमें दो सुखोई-30 विमानों की भी मदद ली गई। लेकिन शाम को मौसम ख़राब होने के कारण ऑपरेशन को रोकना पड़ा। बुधवार को भारतीय वायुसेना ने कहा था कि एएन-32 को खोजने के लिए ख़राब मौसम और तमाम चुनौतियों के बावजूद भरसक प्रयास किए गए हैं लेकिन विमान का कहीं पता नहीं चल सका। विमान ने सोमवार को जोरहाट से दिन में 12 बजकर 27 मिनट पर उड़ान भरी थी और एक बजे इससे आख़िरी बार संपर्क हुआ था।

बेहद परेशान हैं परिजन

विमान के लापता होने से विमान में सवार कुल 13 लोगों के परिजन बेहद परेशान हैं। लापता विमान को हरियाणा के पलवल के रहने वाले पायलट आशीष तंवर उड़ा रहे थे। आशीष की पत्नी संध्या भी वायुसेना में हैं। जिस समय विमान ने उड़ान भरी थी, संध्या उसी एयर फ़ोर्स स्टेशन पर ड्यूटी पर थीं। पलवल में आशीष के घर पर लोगों का तांता लगा हुआ है। विमान में पंजाब के पटियाला के रहने वाले फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट मोहित गर्ग भी सवार हैं। उनके परिजन भी बेहद परेशान हैं।
विमान एएन - 32 के लापता होने के बाद से कुछ सवाल खड़े हुए हैं, जिनका जवाब तीन साल बाद भी नहीं मिला है। जुलाई 2016 में भी एक विमान एएन- 32 बंगाल की खाड़ी के ऊपर से लापता हो गया था।
यह एक परिवहन विमान था जिसने चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन 22 जुलाई, 2016 की सुबह यह लापता हो गया था। तब भी वायु सेना, नौसेना और तटरक्षक की ओर से बंगाल की खाड़ी के ऊपर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया था, लेकिन 29 लोगों या उनके अवशेषों में से कुछ भी नहीं मिला था। विमान में मौजूद सभी लोगों को भारतीय वायु सेना द्वारा मृत घोषित कर दिया गया था।
फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट कुणाल बरपट्टे उस विमान में सवार 29 लोगों में शामिल थे। कुणाल के पिता राजेंद्र बरपट्टे (62) का कहना है कि उन्हें विमानों के हादसे और रूस में बनाए गए विमानों के बेड़े के बारे में पूछे गए कई सवालों के आज तक सही जवाब नहीं मिले हैं।
लेकिन इसके उलट 26 अगस्त 2016 को भारतीय वायुसेना की ओर से उन्हें एक पत्र भेजा गया जिसमें उनसे इस बात को स्वीकार करने के लिए दस्तखत करने को कहा गया था कि उनके बेटे की मृत्यु हो चुकी है। लेकिन बरपट्टे और उनकी पत्नी विद्या, छह अन्य वायुसेना अधिकारियों के परिवार के सदस्यों ने पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। इन वायुसेना अधिकारियों के परिजन भी उस विमान में थे। सभी को मृत घोषित करने के बाद वायुसेना के अधिकारियों का कहना था कि यह पत्र एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था और लापता लोगों की तलाश जारी रहेगी। लेकिन यह सिर्फ़ फौरी जवाब था और आज तक वायु सेना की ओर से पूछे गए अहम सवालों का कोई उचित जवाब नहीं दिया गया।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, ‘सेवानिवृत्त वैज्ञानिक बारपेट्टे ने कहा, ‘भारतीय वायु सेना पिछले 35 सालों से एक ही विमान का उपयोग कर रही है। वायुेसना दावा करती है कि उसने इन सभी विमानों की मरम्मत कर ली है लेकिन इन विमानों से हो चुके कई हादसों और मारे गए लोगों की मौत के लिए कौन जवाबदेह है?’

बारपेट्टे ने आगे कहा, ‘जब हम इस बारे में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर से मिले, तो मैंने उनसे पूछा था कि क्या वह 30 साल पुरानी कार का इस्तेमाल करते रहेंगे...मैंने उनसे यह भी पूछा कि इन विमानों को लगातार उड़ाने से वे क्यों लोगों को जिंदगी को ख़तरे में डाल रहे हैं।’

वायु सेना ने दिए घिसे-पिटे जवाब

बारपेट्टे ने कहा, ‘घटना के बाद मैंने भारतीय वायु सेना से कई सवाल पूछे थे। मैंने पूछा था कि विमान के साथ वास्तव में क्या हुआ था, विमान की स्थिति क्या थी, बचाव अभियान में देरी क्यों हुई आदि। कई बार लिखने के बाद भारतीय वायु सेना ने कई महीनों बाद सवालों के जवाब दिए थे। लेकिन ये जवाब घिसे-पिटे और नौकरशाही की भाषा वाले थे। मैं इन उत्तरों से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हूँ। इस घटना के बाद अब, मैं सरकार से जवाब माँगने के लिए एक बार फिर से इस मुद्दे को उठाने के बारे में सोच रहा हूँ। राजनेताओं और सैन्य नेताओं को इन सवालों का जवाब देना होगा।'

'ख़तरे में डाली जा रही जान'

बारपेट्टे ने आगे भी कई सवाल खड़े करते हुए कहा, ‘वर्तमान में, लगभग 100 एएन -32 विमान ऑपरेशन में हैं। एक विमान के लिए कम से कम पाँच लोगों की आवश्यकता होती है, इसलिए इन विमानों को उड़ाने से, हर दिन 500 से ज़्यादा वायुसेना के कर्मियों की जिंदगी को ख़तरे में डाला जा रहा है और हर गुजरते साल के साथ यह जोख़िम बढ़ता जा रहा है। मैं इस दुर्घटना के बारे में प्रारंभिक जानकारी का इंतजार करूंगा और उसके बाद भारतीय वायुसेना और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखने की योजना बना रहा हूँ, मैं अपने सवालों के जवाब माँग रहा हूँ। ”
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रक्षा मंत्रालय ने की लापरवाही: कांग्रेस

कांग्रेस ने बुधवार को इस मामले में रक्षा मंत्रालय पर सवाल उठाए थे। पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि 2016 में इसी तरह एएन-32 विमान लापता हो गया था, जिसका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बावजूद रक्षा मंत्रालय ने कोई ठोस क़दम क्यों नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि लापता विमान में एसओएस सिग्नल यूनिट 14 साल पुरानी थी। जब 2009 में भारत और यूक्रेन के बीच एएन-32 विमानों के अपग्रेडेशन के लिए करार हो चुका था, तो अब तक इन्हें अपग्रेड क्यों नहीं किया गया। मिली जानकारी के मुताबिक़, एएन-32 में जो एसओएस सिग्नल यूनिट थी, वह 14 साल पुरानी थी।

इस सवाल का जवाब तो सरकार और वायुसेना को देना ही चाहिए कि आख़िर ऐसा क्यों हुआ। आख़िर क्यों सरकार और वायुसेना ने फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट कुणाल बरपट्टे के पिता राजेंद्र बरपट्टे के सवालों का सही जवाब नहीं दिया। पहले हुई घटना के बाद भी सरकार और वायुसेना क्यों लापरवाह बने रहे? आख़िर ऐसे में क्यों उन्हें एएन- 32 विमान के लापता होने और इन बेशक़ीमती जिंदगियों को मुसीबत में डालने के लिए ज़िम्मेदार न माना जाए। 

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