कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने छात्रों के मुद्दे पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश के युवाओं और Gen Z की जीत बताया। विपक्ष के तमाम नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को माफी मांगनी चाहिए। छात्रों की बाकी मांगें जल्द से जल्द मानी जाएं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आने के बाद जंतर मंतर पर माहौल बदल गया
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने इसे देश के करोड़ों युवाओं, विशेषकर Gen Z की ऐतिहासिक जीत बताया है। कांग्रेस ने कहा है कि यह उन छात्रों के लंबे संघर्ष का परिणाम है जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर पूरे देश में आंदोलन किया। पार्टी ने दावा किया कि युवाओं की सच्चाई के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का "अहंकार" झुक गया और उनकी सरकार को अंततः शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना पड़ा।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार धर्मेंद्र प्रधान को राजनीतिक संरक्षण देते रहे, लेकिन छात्रों के लगातार दबाव और विपक्ष की एकजुट लड़ाई के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा। पार्टी ने कहा कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की दिशा में पहला बड़ा कदम है। कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस ने NEET पेपर लीक के पहले दिन से ही छात्रों के लिए न्याय की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ी। पार्टी ने कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए जाते, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
पीएम मोदी माफी मांगेंः कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी ने अपने इस आरोप को दोहराया है कि प्रधानमंत्री मोदी को इस मुद्दे पर माफी मांगनी होगी। उन्होंने पूरे सिस्टम को बर्बाद कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार सुबह आइसा छात्र संगठन के नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी से माफी मांग की थी। अन्य विपक्षी नेताओं ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह भी मांग की कि वे आंदोलनकारी छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है। सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई। 2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो। ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है। इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है। डरो मत!
खड़गे बोले- छात्रों की आवाज आखिर सत्ता के दरवाजे तक पहुंची
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत के छात्रों की आवाज आखिरकार "अहंकारी सत्ता" की चौखट तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा, "यह उन करोड़ों युवाओं की जीत है जिन्होंने देशभर की सड़कों पर उतरकर शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की मांग की। यह सच की जीत और मोदी जी की जिद की हार है। यह उन परिवारों की भी जीत है जिन्होंने इस भ्रष्ट व्यवस्था के कारण अपने बच्चों को खोया। यह संसद से लेकर सड़क तक छात्रों के हित में आवाज उठाने वाले संयुक्त विपक्ष की भी जीत है।" खड़गे ने कहा कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बारी है कि वे देश के युवाओं से माफी मांगें और उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें जिन्होंने आंदोलन के दौरान छात्रों पर लाठी, डंडे और पैलेट गन का इस्तेमाल कराया।
जयराम रमेश ने गिनाए इस्तीफे के पांच कारण
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि "अयोग्य, असंवेदनशील और अहंकारी" धर्मेंद्र प्रधान को आखिरकार इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह छात्रों और संयुक्त विपक्ष के निरंतर दबाव का परिणाम है। उन्होंने इस्तीफे के पीछे पांच प्रमुख कारण गिनाए। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान ने राजनीतिक कारणों से लगातार NEET-UG 2026 पेपर लीक को स्वीकार करने से इनकार किया। उनके अनुसार परीक्षा रद्द होने के बाद भी मंत्री ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में "पेपर लीक" शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और अपने इस्तीफे में भी केवल "अनियमितताओं" का जिक्र किया। रमेश ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय ने 2024 में हुई कई परीक्षा गड़बड़ियों और पेपर लीक के बाद भी कोई गंभीर सुधार नहीं किए। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में लंबे समय तक महानिदेशक का पद अतिरिक्त प्रभार पर चलता रहा जबकि मंत्री भाजपा के चुनावी अभियानों में अधिक व्यस्त रहे।
शिक्षा मंत्रालय में भ्रष्टाचार पर प्रधान ने कोई कदम नहीं उठाया
जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्रालय में व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। रमेश ने दावा किया कि कुलपति और शिक्षकों की नियुक्तियों में अनियमितताएं लंबे समय से सामने आती रही हैं। उन्होंने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC), भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS), तेजपुर विश्वविद्यालय और नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (NEHU) जैसे संस्थानों में भ्रष्टाचार के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा नीति से अधिक राजनीति को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (CABE) की बैठक उनके पूरे कार्यकाल में एक बार भी नहीं बुलाई गई। संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति की सिफारिशों को भी नजरअंदाज किया गया और छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई के दौरान मंत्री ने कोई जवाबदेही नहीं दिखाई।
ऑन मार्किंग सिस्टम में अनियमितताएं पर आंखें बंद रहीं
रमेश ने CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) के ठेके में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि यह ठेका ऐसे संस्थान को दिया गया जिसका रिकॉर्ड पहले से खराब था। उन्होंने आरोप लगाया कि दो छात्रों ने इस प्रणाली की साइबर सुरक्षा में खामियों और टेंडर प्रक्रिया में कथित पक्षपात का खुलासा किया था, लेकिन एक सदस्यीय जांच आयोग की समय सीमा पूरी होने के बाद भी उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। जयराम रमेश ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अंत नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से छात्रों से माफी मांगने और आंदोलन के दौरान कथित अत्याचारों, विशेषकर पैलेट गन के इस्तेमाल, के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई।सिसोदिया ने कहा- संघर्ष की पहली बड़ी जीत
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल एक इस्तीफा नहीं बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के संघर्ष की पहली बड़ी जीत है। उन्होंने कहा, "देश के हर एक Gen Z को दिल से बधाई।" सिसोदिया ने इसे छात्रों के आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की लड़ाई अभी जारी रहेगी।