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पीएम केअर्स फ़ंड में ऐसा क्या राज छुपा है कि सरकार इस पर कोई बात नहीं होने देती?

आख़िर पीएम केअर्स फ़ंड में ऐसा क्या राज छुपा है, जिसकी वजह से नरेंद्र मोदी सरकार किसी कीमत पर इस पर कोई बहस या बातचीत नहीं होने देना चाहती है?
केंद्र सरकार ने पीएम केअर्स फंड पर तो कोई जानकारी नहीं ही दी है, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी उन दूसरे तमाम मुद्दों पर भी बात नहीं होने देना चाहती है, जिससे पीएम केअर्स फ़ंड प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भी जुड़ा हुआ हो।
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क्या है पीएम केअर्स?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना से लड़ने के लिए संसाधन जुटाने के मक़सद से पीएम केअर्स फंड का गठन किया था। उसी समय से यह विवादों के घेरे में है। उस समय भी यह सवाल उठा कि जब प्रधानमंत्री राहत कोष पहले से है तो इस नए कोष की क्या ज़रूरत है। 

विवाद पर विवाद

गठन के बाद ज़ोरदार विवाद तब हुआ जब सरकार ने कहा कि इस फंड का ऑडिट नियंत्रण व महालेखाकार यानी सीएजी नहीं कर सकता क्योंकि यह उसके तहत नहीं आता है।
इसके बाद सरकार ने एक के बाद एक कई आरटीआई आवेदनों को खारिज करते हुए साफ़ शब्दों में कह दिया कि वह इस फंड के बारे में कुछ भी बताने को बाध्य नहीं है।
सवाल यह उठा कि इस कोष में कितने पैसे आए, कहाँ से आए और उसका क्या हुआ, यह जानने का हक़ देश की जनता को क्यों नहीं है, पर सरकार ने इसे नहीं माना।

चीनी पैसा!

लेकिन पीएम केअर्स फंड पर विवाद इस पर भी नहीं रुका। कांग्रेस पार्टी ने यह आरोप लगाया कि जिन चीनी कंपनियों के ख़िलाफ़ बीजेपी ने पूरे देश में माहौल बना दिया है और उसके बॉयकॉट की बात कर रही है, उन्हें से इसे पीएम केअर्स फंड में पैसे भी लिए हैं। सरकार ने इस आरोप का खंडन नहीं किया। 

लेकिन वह सवाल तो बना ही रहा कि पीएम केअर्स फंड लेकर इतनी गोपनीयता क्यों है?

क्या हुआ पीएसी की बैठक में?

ताज़ा मिसाल संसद की लोक लेखा समिति (पब्लिक अकाउंट्स कमिटी) की बैठक है, जिसमें बीजेपी सांसदों ने उस कोरोना महामारी पर भी बात नहीं होने दी, जिसकी चपेट में पूरा देश है, जिससे भारत में 8 लाख लोग प्रभावित हो चुके हैं। मेसाच्युसेट्स इंस्टीच्यूट ऑफ़ टेक्नोलोजी ने कहा है कि भारत की स्थिति पूरी दुनिया में सबसे बुरी हो सकती है और यहाँ रोज़ाना 2.87 लाख लोग प्रतिदिन प्रभावित हो सकते हैं।
बीजेपी ने पीएसी की बैठक में इस पर बात नहीं होने दी, हालांकि सरकार दावा करती रहती है कि उसने कोरोना रोकथाम में बहुत ही अच्छा काम किया है।

कोरोना पर भी चर्चा नहीं?

लोक लेखा समिति के प्रमुख कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी हैं, जो पश्चिम बंगाल से चुन कर आए हैं। वह और विपक्ष के दूसरे सदस्य चाहते थे कि कोरोना रोकथाम पर सरकार की भूमिका पर चर्चा हो। पर बीजेपी के लोगों ने इसका विरोध किया।
बीजू जनता दल के भर्तृहरि महताब ने बीजेपी का समर्थन किया, डीएमके के टी. आर. बालू ने भी बीजेपी का ही साथ दिया। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इसकी वजह बीजेपी का यह डर है कि जब कोरोना रोकथाम पर बात होगी तो पीएम केअर्स फ़ंड पर भी बात हो सकती है। 

अध्यक्ष की एक न चली!इस बैठक में अधीर रंजन चौधरी ने पीएम केअर्स फंड पर भी बहस चाही, जिसका बीजेपी ने ज़ोरदार विरोध किया। 
बीजेपी सांसद भूपेंदर यादव ने तर्क दिया कि पीएम केअर्स फंड संसद से संचालित नहीं होता है, इसलिए इस पर संसद या उसकी किसी समिति में बात नहीं की जा सकती है।
पीएसी अध्यक्ष चौधरी ने समिति के सदस्यों से अपील की कि वे पार्टी से ऊपर उठा कर सोचें और देश की ज़रूरतों और उसकी समस्याओं पर ध्यान दें। 

कोरोना रोकथाम के लिए उठाए गए कदम लॉकडाउन में छूट दिए जाने के बाद पीएसी की यह पहली बैठक थी। यह समझा जाता था कि इस बैठक में कोरोना और उसके रोकथाम के उपायों और भविष्य की सरकारी योजनाओं पर विस्तार से बात होगी। पर बीजेपी के सदस्यों ने ऐसा नहीं होने दिया। 

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