केंद्र सरकार ने संसद में दो बड़े और महत्वपूर्ण संवैधानिक सुधारों महिला आरक्षण विधेयक (Women's Reservation Bill) और परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को पारित कराने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। क्षेत्रीय और छोटे राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल करने के उद्देश्य से सरकार ने फिलहाल दो अन्य बेहद विवादित विधेयकों से जुड़े फैसलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को होने वाली 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' (Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill) की संयुक्त संसदीय समिति (Joint Committee) की बैठक को अचानक रद्द कर दिया गया है। इस बैठक में समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट को स्वीकार (Adopt) किया जाना तय माना जा रहा था।

लगातार दूसरा बड़ा फैसला

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब ठीक एक दिन पहले संसद की संयुक्त समिति ने 130वें संविधान संशोधन विधेयक की रिपोर्ट को अपनाने से रोक दिया था। यह विधेयक उन मंत्रियों को पद से हटाने से संबंधित है जो गंभीर अपराधों के आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रहे हों।
ताज़ा ख़बरें
बैक-टू-बैक दो बड़े विवादित विधेयकों को टालने के पीछे सरकार की सोच यह है कि सहयोगियों और क्षेत्रीय दलों के साथ किसी भी तरह के टकराव से बचा जा सके, ताकि आगामी सत्रों में महिला आरक्षण और देश में लोकसभा सीटों के पुनर्गठन (परिसीमन) जैसे बड़े विधेयकों को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाया जा सके।

क्यों जरूरी है क्षेत्रीय दलों का साथ?

दरअसल, महिला आरक्षण और परिसीमन को लागू करने के लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधनों को पास कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष दो-तिहाई बहुमत (Special Two-Thirds Majority) की आवश्यकता होती है। अप्रैल 2026 में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिर जाने के बाद से सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। उस समय विपक्षी दलों और कुछ क्षेत्रीय दलों ने महिला आरक्षण को परिसीमन (जिसमें लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है) से जोड़ने का कड़ा विरोध किया था, जिसके कारण विधेयक को जरूरी 352 वोट नहीं मिल सके थे और वह गिर गया था।
विशेष रूप से दक्षिण भारत के क्षेत्रीय दलों को यह चिंता है कि जनसंख्या के आधार पर होने वाले नए परिसीमन से प्रभावी रूप से जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं और उत्तर भारत के राज्यों का दबदबा बढ़ सकता है।

सरकार का अगला क़दम

सरकारी सूत्रों का कहना है कि आगामी सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन कानून को प्रभावी ढंग से रोलआउट करने के लिए आम सहमति बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे मुख्य विपक्षी दलों को छोड़कर, सरकार को उम्मीद है कि वह देश के अधिकांश क्षेत्रीय और छोटे दलों को इस राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर अपने पाले में लाने में सफल रहेगी। इसी रणनीतिक तालमेल को बनाए रखने के लिए शिक्षा और मंत्रियों की योग्यता से जुड़े इन दोनों कड़े विधेयकों की प्रक्रियाओं को फिलहाल के लिए टाल दिया गया है।