प्रधानमंत्री मोदी ने आज शनिवार 15 अगस्त 2026 को लालकिले की प्राचीर से भाषण में 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया। क्या यह शब्द देश के विपक्षी दलों और छात्र आंदोलन की तरफ इशारा है। मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का गुणगान करते हुए युवकों पर फोकस किया।
पीएम मोदी 15 अगस्त 2026 को लाल किले पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से दिए अपने भाषण में नक्सलवाद को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सलियों से निपट लिया गया है, लेकिन अब देश को ‘दिमागी नक्सलियों’ (Dimaagi Naxals) से सतर्क रहने और उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा कि नक्सलवाद और माओवादी हिंसा ने दशकों तक देश के बड़े हिस्से को प्रभावित किया और हजारों लोगों की जान गई। अब इस चुनौती के एक दूसरे स्वरूप से निपटना जरूरी है।
मोदी ने आगे कहा, "सालों तक नक्सलवादी मानसिकता वाले लोगों का सत्ता के गलियारों में दबदबा रहा। वे सरकारी समितियों में सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। माओवादी विचारधारा ने नीतियों को प्रभावित किया।"
- यहां यह बताना ज़रूरी है कि इससे पहले विपक्षी नेताओं, सरकार विरोधी पत्रकारों, रंगकर्मियों, लेखकों, कवियों-शायरों, फिल्म निर्माता-निर्देशकों आदि को अर्बन नक्सल कहा जा चुका है। अर्बन नक्सल शब्द ही कट्टर दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों ने कहना और बोलना शुरू किया। इस रिपोर्ट में आगे दिमागी नक्सली के बारे में पूरी तरह समझाया गया है। नीचे तक ज़रूर पढ़ें।
पीएम मोदी के भाषण का फोकस युवा और विकसित भारत
इस बार पीएम मोदी के भाषण में युवा शक्ति और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने युवाओं से देश के निर्माण में नेतृत्व की भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग देने की योजना और युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की। खेलों में प्रतिभाओं की पहचान के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट की भी बात कही गई, ताकि भारत 2036 के ओलंपिक में हर खेल में प्रतिस्पर्धा कर सके।पीएम मोदी ने युवाओं से जनगणना की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की और कहा कि युवा डिजिटल माध्यम से अपने परिवार की सही जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करें। स्वतंत्रता दिवस समारोह की आधिकारिक थीम भी ‘युवा शक्ति फॉर विकसित भारत@2047’ रखी गई थी।
‘दिमागी नक्सली’ से पीएम मोदी का क्या मतलब है?
पीएम मोदी ने अपने भाषण में ‘दिमागी नक्सली’ की कोई औपचारिक या कानूनी परिभाषा नहीं दी। इसलिए यह समझना जरूरी है कि यह किसी कानूनी श्रेणी का नाम नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक संदर्भ में इस्तेमाल किया गया शब्द है। हाल ही में जिस तरह कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले छात्र आंदोलन का उभार हुआ, जो लगातार फैलता जा रहा है। जिस तरह नेता विपक्ष राहुल गांधी ने तमाम मंचों से पीएम मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह को चुनौती दी, उससे मोदी सरकार परेशान है। छात्रों की पिटाई और पैलेट गन को राहुल ने राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया। यह मामला संसद से सड़क तक उठा।इस समय मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवकों का जगह-जगह आंदोलन, स्कूलों में जेन अल्फा का आंदोलन और नेता विपक्ष राहुल गांधी के धारदार भाषण हैं। विश्लेषक कह रहे हैं कि राहुल गांधी ने भारत की जनता का डर खत्म कर दिया है। लोग पहले बोलने से डर रहे थे लेकिन लोग अब सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलने लगे हैं।
जंतर मंतर पर सीजेपी के आंदोलन के तहत हज़ारों छात्र जमा हुए। उनकी एक ही मांग थी कि इतने पेपर लीक हो रहे हैं, उसके लिए (तत्कालीन) शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदार हैं। उनका इस्तीफा होना चाहिए। इसी दौरान 20 जुलाई को सीजेपी और छात्रों ने संसद मार्च आयोजित किया। लेकिन जब छात्र आगे बढ़े तो पुलिस ने उन्हें जमकर पीटा, उन पर पैलेट गन चलाई गई। बाद में सरकार झुकी और शिक्षा मंत्री प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन पुलिस की पिटाई और पैलेट गन के मुद्दे को राहुल गांधी ने आवाज़ दी। वो धरना देने पीएम आवास तक पहुंच गए। उन्होंने अखबार में लेख लिखकर पैलेट गन का मुद्दा उठाया। दो दिन पहले भी उन्होंने रचनात्मक कांग्रेस के कार्यक्रम में मोदी सरकार की विदेश नीति पर जमकर हमला बोला।
हालांकि, पीएम मोदी ने अपने भाषण में किसी व्यक्ति, संगठन, पत्रकार, अकादमिक, राजनीतिक दल या सामाजिक समूह का नाम लेकर यह नहीं बताया कि ‘दिमागी नक्सली’ कौन हैं। इसलिए किसी खास व्यक्ति या एक संगठन को इस शब्द के दायरे में रखना केवल अनुमान होगा। लेकिन अंदाज़ा तो लगाया ही जा सकता है। विश्लेषक कहते हैं कि सरकार आंदोलनों से डर गई है।
मोदी के भाषण से क्या गायब था
पीएम मोदी के भाषण से इस बार मुस्लिम को लक्ष्य करके सांकेतिक रूप में भी कोई बात नहीं कही गई। पिछले साल 15 अगस्त पर भाषण में उन्होंने डेमोग्राफी का जिक्र किया था और डेमोग्राफी मिशन शुरू करने की घोषणा की थी। उन्होंने घुसपैठिये शब्द इस्तेमाल किया था। उनके स्वतंत्रता दिवस के भाषणों में हर बार पाकिस्तान का जिक्र भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से होता रहा है। लेकिन उसका दूर-दूर तक जिक्र नहीं था।
इस पर नज़र रखेंः पीएम मोदी ने सिविल डिफेंस में वॉलटियरी फोर्स बनाने की बात कही है। भारत में नागरिकों की हिस्सेदारी पर आधारित सिविल डिफेंस सिस्टम आज़ादी के समय से मौजूद है। लेकिन मोदी ने सिविल डिफेंस सिस्टम को बदलने की बात कही है। इसके लिए उन्होंने वॉलंटियरी फोर्स शब्द बोला है। क्या आने वाले समय में किसी आंदोलन के दौरान बिना वर्दी वाले कपड़ों में जो युवक छात्र-छात्राओं को जेएनयू, जामिया, जंतर मंतर पर पीटते नज़र आते हैं, क्या उन्हें सिविल डिफेंस में लाकर सरकारी मान्यता दी जाएगी। क्या इसमें संघ के बेरोज़गार स्वयंसेवकों को शामिल किया जाएगा।
‘सप्तधारा’ से विकास का रोडमैप
पीएम मोदी ने भाषण में देश के विकास के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का भी खाका पेश किया। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन एवं ब्लू इकॉनमी और भारत की सॉफ्ट पावर को प्रमुख क्षेत्र बताया गया।
उन्होंने अगले पांच से सात वर्षों में वह हासिल करने का लक्ष्य रखा जो उनके मुताबिक पिछले पांच से सात दशकों में हासिल नहीं हो सका। साथ ही भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन, सेमीकंडक्टर, रक्षा तकनीक, AI, ऊर्जा और इनोवेशन के क्षेत्र में मजबूत बनाने पर जोर दिया।कुल मिलाकर, 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी का भाषण युवा शक्ति, आत्मनिर्भरता, तकनीक और 2047 के विकसित भारत के एजेंडे पर केंद्रित रहा। लेकिन ‘दिमागी नक्सली’ वाला बयान राजनीतिक और वैचारिक रूप से सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला हिस्सा बन सकता है, क्योंकि प्रधानमंत्री ने पहली बार स्पष्ट रूप से नक्सलवाद की चुनौती के एक ‘वैचारिक’ स्वरूप को अलग करने की जरूरत पर जोर दिया है।
फ्री ऑनलाइन कोचिंग का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की। मोदी ने कहा कि कोचिंग सेंटर गरीबों और मध्यम वर्ग पर बोझ हैं और युवाओं को अपने परिवारों के करीब रहना चाहिए। मोदी ने कहा, “कोचिंग सेंटरों को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी बोझ बन गई है। हर माता-पिता को लगता है कि अगर वे अपने बच्चे को कोचिंग सेंटर नहीं भेजते हैं, तो वे किसी न किसी तरह पीछे रह रहे हैं या एक प्रतिष्ठित परिवार से नहीं हैं।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार लोगों को कोचिंग पर खर्च होने वाले हजारों करोड़ रुपये बचाने में मदद करना चाहती है।
युवकों से जनगणना कार्यक्रम से जुड़ने का आह्वान
मोदी ने देश के युवाओं से राष्ट्रीय जनगणना में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी से मदद मांग रहा हूं।”
उन्होंने युवाओं से इस प्रयास में आगे बढ़कर नेतृत्व करने की अपील की। उन्होंने कहा, “आप सोच सकते हैं कि मैं एक या दो घंटे में देश के लिए क्या कर सकता हूं? मैं आपको बता दूं – ये एक या दो घंटे देश के लिए बहुत बड़ी ताकत बन सकते हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में 2027 की जनगणना के संचालन के दौरान हर घर में “भागीदारी का माहौल” बनाने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री की प्रमुख घोषणाएं
- अगले वर्ष राष्ट्रव्यापी मिशन मोड के माध्यम से 1 करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग प्रदान की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों की सहायता करना है।
- बदलती सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आधुनिक रक्षा प्रशिक्षण और उन्नत क्षमताएं।
- खेल प्रतिभा खोज: गांवों और शहरों में 5-15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को लक्षित करते हुए राष्ट्रव्यापी अभियान।
- सेमीकंडक्टर मिशन: 1-2 वर्षों के भीतर 7-8 नए उत्पादन संयंत्र चालू किए जाएंगे।
- परमाणु ऊर्जा: 2047 तक 100 गीगावॉट क्षमता का लक्ष्य और 6-7 वर्षों के भीतर 5 नए रिएक्टर चालू किए जाएंगे।