भारत ने फिलिस्तीन को लेकर अपनी स्थिति एक बार फिर से साफ कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अरब देशों के शीर्ष नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और भारत की ओर से फिलिस्तीन के लोगों के प्रति निरंतर समर्थन की बात दोहराई। उन्होंने ग़ज़ा शांति योजना सहित क्षेत्र में चल रहे शांति प्रयासों का स्वागत किया। यह मुलाकात नई दिल्ली में दूसरे भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक (India-Arab Foreign Ministers’ Meeting - FMM) के दौरान हुई, जिसमें अरब लीग के महासचिव और सभी 22 अरब देशों के प्रतिनिधि शामिल थे। यह बैठक महत्वपूर्ण है, क्योंकि पीएम मोदी जल्द ही इसराइल जाने वाले हैं। मोदी के इसराइल जाने का गलत संदेश न
जाए, उससे पहले अरब देशों के विदेश मंत्रियों का सम्मेलन नई दिल्ली में रखा गया। 
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया, "अरब दुनिया भारत के विस्तारित पड़ोस का हिस्सा है, जो गहरे सभ्यतागत बंधनों, जीवंत लोगों के बीच संबंधों और स्थायी भाईचारे से जुड़ी हुई है, साथ ही शांति, प्रगति और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता से।" उन्होंने प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, व्यापार और नवाचार में बढ़ते सहयोग पर विश्वास जताया कि इससे दोनों पक्षों के लिए नए अवसर खुलेंगे और साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, मोदी ने अरब लीग की क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत को गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिला है, हालांकि भारत ने अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बैठक में कहा कि ग़ज़ा संघर्ष को समाप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 पर आधारित व्यापक शांति योजना को आगे बढ़ाना एक साझा प्राथमिकता है। विभिन्न देशों ने इस योजना पर व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से नीतिगत घोषणाएं की हैं।

जयशंकर ने मध्य पूर्व में पिछले कुछ वर्षों में हुए महत्वपूर्ण बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवाद दोनों क्षेत्रों के लिए साझा खतरा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "सीमा-पार आतंकवाद विशेष रूप से अस्वीकार्य है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।" इसे पाकिस्तान के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस एक सार्वभौमिक नियम होना चाहिए और आतंकवाद से प्रभावित समाजों को आत्मरक्षा का अधिकार है।

भारत-अरब साझेदारी मार्च 2002 में औपचारिक रूप से शुरू हुई थी और भारत अरब लीग का पर्यवेक्षक देश है। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने की। बैठक में ओमान, फिलिस्तीन, सूडान, कोमोरोस, सोमालिया और लीबिया के विदेश मंत्री शामिल हुए, जबकि मिस्र, यमन, सऊदी अरब और कतर के उप मंत्री तथा अन्य देशों के वरिष्ठ राजनयिक मौजूद थे।

जयशंकर ने भारत-अरब संबंधों की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि अरब क्षेत्र भारत के लिए प्रमुख ऊर्जा स्रोत, बड़े व्यापारिक साझेदार और प्रवासी भारतीयों का बड़ा केंद्र है। दोनों पक्ष खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी में सहयोग बढ़ा सकते हैं।

यह बैठक वैश्विक व्यवस्था में हो रहे बदलावों के बीच हुई है, जहां मध्य पूर्व में पिछले एक साल में नाटकीय परिवर्तन आए हैं, जो भारत-अरब संबंधों को भी प्रभावित कर रहे हैं।