पेपर लीक को लेकर देश में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सियासी घमासान और तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो संदेश पर कड़ा हमला बोला है, जिसमें पीएम ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के लिए नए विधेयक का वादा किया था। दोनों नेताओं के बयान आधी रात को आए। पहले पीएम मोदी का वीडियो संदेश आया, उसके तुरंत बाद राहुल गांधी ने उसका आधी रात को ही जवाब दिया। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो साझा कर कहा कि सरकार पेपर लीक के मामलों से निपटने के लिए और अधिक सख्त कदम उठाने जा रही है। उन्होंने बताया कि संबंधित विभागों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन और कठोर सजा के प्रावधानों वाला ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इस ड्राफ्ट बिल को आज शुक्रवार 24 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा और इसे संसद में जल्द पास कराने का प्रयास होगा।
पीएम ने कहा कि पेपर लीक कोई मामूली बात नहीं है और यह लाखों छात्रों तथा उनके अभिभावकों के लिए बेहद दर्दनाक है। उन्होंने बताया कि बीते ढाई महीनों में कई बड़े कदम उठाए गए हैं, दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और लगभग 22 लाख छात्रों का साल बर्बाद होने से बचाते हुए कम से कम समय में परीक्षा संपन्न कराकर परिणाम (19 जुलाई) घोषित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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राहुल गांधी ने मोदी के वीडियो पर किया करारा हमला

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर प्रधानमंत्री के वीडियो का जवाब देते हुए लिखा: "मोदी जी, हमारे छात्र धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस शर्मनाक मिडनाइट वीडियो से उनकी समझ का अपमान न करें।" कांग्रेस नेता ने सरकार के सामने तीन मांगें रखीं: 1. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त किया जाए। 2. प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ मारपीट करने वालों को सजा दी जाए।          3.प्रधानमंत्री और सरकार छात्रों से माफी मांगें।

संसद से सड़क तक हंगामा

विपक्ष लगातार संसद के मानसून सत्र में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट मामले पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है। लगातार चार दिनों से विपक्ष संसद में यह मुद्दा उठाना चाहता है लेकिन सरकार उन्हें मुद्दा उठाने नहीं दे रही है। विपक्षी सांसद रोज़ाना मुद्दा उठाने का नोटिस देते हैं। उधर, दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई स्थानों पर छात्र संगठन (CJP) और विपक्षी दल लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

मोदी ने चुप्पी तोड़ी तो क्या हुआ

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार छात्रों के मुद्दे पर बड़ा ऐलान सोशल मीडिया पर किया था। प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई और दोषियों को सख्त से सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार फास्ट-ट्रैक अदालतों (Fast-Track Courts) का गठन करेगी। प्रधानमंत्री की इस पहल को विपक्ष और प्रदर्शनकारी संगठन ने खारिज कर दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कल गुरुवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा: "हमारे युवाओं का कल्याण और उनका भविष्य हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है! हमने पेपर लीक में शामिल लोगों को त्वरित और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।" उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेंगे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। ये फास्ट-ट्रैक अदालतें सांसदों और विधायकों (MP/MLA) के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालतों की तर्ज पर काम करेंगी।

राहुल गांधी का जवाबी हमला

प्रधानमंत्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार 23 जुलाई को तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने 'X' पर पोस्ट कर कहा: "आप ही वह व्यक्ति हैं जिसने हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया है। आपने हमारी शिक्षा प्रणाली के संपूर्ण विनाश को बढ़ावा दिया और इसके लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।"
राहुल गांधी ने छात्रों की ओर से सरकार के समक्ष 3 मुख्य मांगें रखीं:

  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा / बर्खास्तगी।

  • पीड़ित छात्रों से सरकार/पीएम मोदी द्वारा सार्वजनिक माफी।

  • प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग/हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे संगठन CJP और अभिजीत दीपके ने भी प्रधानमंत्री के ऐलान को नाकाफी बताया था। CJP ने पीएम के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट शब्दों में लिखा: "धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना चाहिए।" CJP का कहना है कि सिर्फ अदालतें बनाने से शिक्षा व्यवस्था में आया संकट दूर नहीं होगा। संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और पूरी जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।