लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘शुद्धिकरण’ की घटनाओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और RSS दलितों के साथ भेदभाव की मानसिकता को बढ़ावा दे रहे हैं और ‘शुद्धिकरण’ जैसी रस्में दरअसल छुआछूत का ही दूसरा रूप हैं। राहुल गांधी ने कहा कि संविधान ने छुआछूत को खत्म कर दिया है और इस तरह का भेदभाव कानून के खिलाफ है।
राहुल गांधी ने शनिवार को कांग्रेस मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह टिप्पणी की। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हल्द्वानी के मामले और राजस्थान में भी ऐसी ही घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि BJP और RSS से जुड़े लोग इस तरह के काम करते हैं और यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि दलितों के प्रति भेदभाव का सवाल है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की फौरन एफआईआर हो, आरोपी गिरफ्तार हों। उन्हें इस बात में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं है कि पीएम मोदी या अन्य लोगों ने इस पर चुप्पी साध रखी है। वो बस एक्शन चाहते हैं।

‘शुद्धिकरण’ असल में छुआछूत है: राहुल

राहुल गांधी ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के किसी स्थान पर जाने के बाद उस जगह का ‘शुद्धिकरण’ किया जाता है तो इसका संदेश यही जाता है कि उस व्यक्ति का वहां होना उस स्थान को ‘अशुद्ध’ कर देता है। उनके मुताबिक, यही सोच छुआछूत की बुनियाद है।
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उन्होंने कहा कि “शुद्धिकरण वास्तव में छुआछूत का दूसरा नाम है।” राहुल के अनुसार, जब किसी दलित व्यक्ति की मौजूदगी के बाद किसी जगह को शुद्ध करने की रस्म की जाती है तो उसका अर्थ यह निकलता है कि दलित को छूना नहीं चाहिए या दलित के कारण कोई स्थान अशुद्ध हो जाता है।
  • राहुल गांधी ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ हैं और इसे अपराध की श्रेणी में देखा जाना चाहिए।

राजस्थान के मंदिर का भी किया जिक्र

राहुल गांधी ने अपने बयान में राजस्थान की एक घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस विधायक दल के नेता एक मंदिर गए थे और वहां BJP नेताओं ने ‘शुद्धिकरण’ की रस्म की। उन्होंने इसे BJP-RSS की कथित जातिगत सोच से जोड़ते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से यह सवाल उठता है कि आखिर किसी व्यक्ति के मंदिर जाने या किसी सार्वजनिक स्थान पर जाने के बाद शुद्धिकरण की जरूरत क्यों महसूस की जाती है। इसके पीछे उनकी मंशा क्या है।

राहुल गांधी ने कहा कि यह सिर्फ किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं है, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था की ओर इशारा करता है जिसमें व्यक्ति की जाति के आधार पर उसके साथ व्यवहार तय किया जाता है।

‘यह संविधान के खिलाफ अपराध है’

राहुल गांधी ने अपने बयान में संविधान का हवाला देते हुए कहा कि भारत में छुआछूत को समाप्त किया जा चुका है। संविधान का अनुच्छेद 17 छुआछूत को समाप्त करता है। राहुल का आरोप है कि इसके बावजूद BJP-RSS से जुड़े लोग खुले तौर पर ऐसी मानसिकता का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी दलित व्यक्ति की मौजूदगी के बाद किसी मंच या स्थान का ‘शुद्धिकरण’ किया जाता है तो यह संदेश जाता है कि दलित अशुद्ध हैं और उन्हें छूना नहीं चाहिए। राहुल गांधी ने इसे संविधान के तहत अपराध बताया।

खड़गे के हल्द्वानी कार्यक्रम का मामला

राहुल गांधी ने अपने आरोपों के समर्थन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी दौरे का भी उदाहरण दिया। खड़गे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की एक रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को दक्षिणपंथी संगठन श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन से जुड़े लोगों ने वहां ‘शुद्धिकरण’ के लिए हवन किया था।
इस घटना के बाद खड़गे ने राज्यसभा में मामला उठाया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपने भाषण में किसी जाति या धर्म का नाम नहीं लिया था और केवल जनता से जुड़े मुद्दों पर बात की थी। इसके बावजूद उनके कार्यक्रम के बाद मंच का शुद्धिकरण किया गया। खड़गे ने इसे अपने लिए अपमानजनक बताते हुए कहा था कि इस घटना ने उन्हें छुआछूत का एहसास कराया।
खड़गे ने यह भी मांग की थी कि शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ छुआछूत से संबंधित कानून के तहत मामला दर्ज किया जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए। लेकिन उत्तराखंड की बीजेपी सरकार ने इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।

जाति और राजनीति पर फिर तेज हुई बहस

राहुल गांधी के बयान से BJP और कांग्रेस के बीच जाति, सामाजिक समानता और संविधान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस इस घटना को दलित सम्मान और संविधान की रक्षा के मुद्दे से जोड़ रही है, जबकि BJP ने हल्द्वानी की घटना से पार्टी को अलग करते हुए जांच का आश्वासन दिया है।
हल्द्वानी की घटना ऐसे समय सामने आई है जब उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। खड़गे ने भी अपनी रैली को आगामी चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में संबोधित किया था। इसलिए ‘शुद्धिकरण’ विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। राहुल गांधी ने इस पूरे विवाद को केवल खड़गे के व्यक्तिगत अपमान का मामला न मानते हुए इसे दलितों के प्रति सामाजिक भेदभाव और संविधान में दिए समानता के अधिकार से जोड़ दिया है। उनका कहना है कि ‘शुद्धिकरण’ की ऐसी घटनाएं उस छुआछूत की मानसिकता को दर्शाती हैं जिसे संविधान ने समाप्त कर दिया है।