loader
फोटो साभार: ट्विटर/@Hariom9726

हैदराबाद गैंगरेप-हत्या के आरोपियों को जानबूझकर मारा गया था: SC पैनल

हैदराबाद के पशु चिकित्सक के सामूहिक बलात्कार और हत्या के आरोपियों की मुठभेड़ की जाँच कर रहे सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जांच पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मुठभेड़ दिखावा थी। इसने रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहा है कि आरोपियों को जानबूझकर मारने के इरादे से गोली मार दी गई थी।

पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले हैदराबाद की डॉक्टर के बलात्कार और हत्या मामले में चारों आरोपी दिसंबर 2019 में पुलिस 'एनकाउंटर' में मारे गए थे। हैदराबाद पुलिस ने तब दावा किया था कि पुलिस जाँच के लिए जब चारों आरोपियों को हत्या की जगह पर ले जाया जा रहा था तभी उन्होंने भागने की कोशिश की और एनकाउंटर में चारों वहीं पर ढेर हो गए। उस कथित मुठभेड़ को लेकर पुलिस प्रशासन के कामकाज के तौर-तरीकों पर सवाल उठा था। जब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई थी तो अदालत ने जाँच पैनल नियुक्त कर दिया था।

ताज़ा ख़बरें

उस जाँच पैनल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस वीएस सिरपुरकर, बॉम्बे हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रेखा बालदोता और सीबीआई के पूर्व निदेशक कार्तिकेयन शामिल थे। अब आई सिरपुरकर आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है, 'हमारी राय में आरोपियों को जानबूझकर मार डालने के इरादे से गोली मारी गई थी और इस जानकारी के साथ कि गोली मारने से उनकी मौत संदिग्ध हो जाएगी।'

इसने कहा है कि आरोप है कि आरोपियों ने पुलिस के हथियार छीनने की कोशिश की और फिर उन पर गोली चलाई, यह पूरी तरह ग़लत है। जाँच पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है, 'पूरी सामग्री पर विचार करने के बाद हम निष्कर्ष निकालते हैं कि मृतकों ने 6 दिसंबर 2019 को हुई उस घटना के संबंध में कोई अपराध- जैसे हथियार छीनना, हिरासत से भागना, पुलिस पार्टी पर हमला करना और फायरिंग करने का प्रयास नहीं किया था।'

रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना उच्च न्यायालय से आयोग की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने को कहा है। जाँच पैनल ने 10 से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या के आरोपों की भी सिफारिश की है।

बता दें कि हैदराबाद के शादनगर में 2019 में 27 नवंबर की रात डॉक्टर से रेप और हत्या का मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने चारों आरोपियों मुहम्मद आरिफ़, शिवा, नवीन और केशवुलू को पुलिस रिमांड में रखा था। चारों आरोपियों को फाँसी की सज़ा दिए जाने की माँग की जा रही थी। इसके लिए देश भर में कई जगह प्रदर्शन हुए थे। पुलिस से लेकर सरकार तक पर इस मामले को लेकर काफ़ी दबाव रहा था।

तब इस इस मामले को लेकर वकील जीएस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने एनकाउंटर के ख़िलाफ़ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में माँग की गई थी कि एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज हो और मामले की जाँच की जाए। साथ ही इन पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की बात भी याचिका में कही गई थी। कथित मुठभेड़ की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन सदस्यीय आयोग नियुक्त किया गया था।

देश से और ख़बरें

इसके साथ ही न्यायमूर्ति सिरपुरकर की अध्यक्षता वाले आयोग ने आपराधिक न्याय प्रणाली को सुव्यवस्थित करने के लिए सिफारिशें दी हैं। इसने प्राथमिकी दर्ज करने, गिरफ्तारी प्रक्रियाओं से संबंधित कानूनों का अनिवार्य अनुपालन, बॉडी कैमरों का उपयोग करने और सभी जांच प्रक्रियाओं की अनिवार्य वीडियोग्राफी के संबंध में सिफारिशें दी हैं।

इसने सुझाव दिया है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और संबंधित अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल नहीं हो जाती, तब तक किसी भी पुलिस अधिकारी को जांच के तहत अपराध के संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करनी चाहिए।

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें