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स्वीडिश कंपनी से लक्ज़री बस लेने का गडकरी पर आरोप, गडकरी ने बेबुनियाद, दुष्टतापूर्ण बताया

मनमोहन सिंह सरकार के मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को मुद्दा बना कर 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने वाले नरेंद्र मोदी की सरकार के एक बड़े मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लग रहा है। परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पर यह आरोप लगा है कि उनके कहने पर नागपुर नगर निगम ने स्वीडन की बस बनाने वाली कंपनी स्कैनिया से बसें खरीदीं और उसके बदले में उस कंपनी ने गडकरी के परिवार के एक व्यक्ति की कंपनी को एक लग्ज़री बस उपहार में दी थी। 

यह स्पष्ट रूप से 'क्विड प्रो को' यानी कुछ करने के बदले कुछ देने का मामला बनता है और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।  

ख़ास ख़बरें

क्या है मामला?

स्वीडिश टेलीविज़न चैनल एसवीटी ने एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि बस बनाने वाली कंपनी स्कैनिया के ऑडिटरों को पता चला कि कंपनी ने 2017 में भारत के परिवहन मंत्री को विशेष रूप से डिज़ायन की एक बस उपहार में दी, स्कैनिया की मूल कंपनी फोक्सवैगन को सूत्रों ने यह जानकारी दी कि यह बस उपहार में इसलिए दी गई थी कि उसे भारत में कोई बड़ा असाइनमेंट (काम) मिले। 

स्वीडिश भाषा की इस वेबसाइट पर छपी ख़बर में कहा गया है कि 2016 में बस बनाने वाली कंपनी स्कैनिया ने भारत के परिवहन मंत्री से जुड़े एक व्यक्ति की कंपनी को ख़ास तौर पर सुसज्जित की गई एक बस दी गई। यह बस गडकरी की बेटी की शादी के मौके पर दी गई। 

गडकरी का नाम कैसे जुड़ा?

स्वीडिश टेलीविज़न चैनल एसवीटी ने एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि बस बनाने वाली कंपनी स्कैनिया के ऑडिटरों को पता चला कि कंपनी ने 2017 में भारत के परिवहन मंत्री को विशेष रूप से डिज़ायन की एक बस उपहार में दी, स्कैनिया की मूल कंपनी फोक्सवैगन को सूत्रों ने यह जानकारी दी कि यह बस उपहार में इसलिए दी गई थी कि उसे भारत में कोई बड़ा असाइनमेंट (काम) मिले। 

swedish media SVT : scania gave luxury bus to nitin gadkari family - Satya Hindi

स्कैनिया की ऑडिट रिपोर्ट

एसवीटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2016 में डार्क लेदर सीट वासी मेट्रोलिंक एचडी बस दी गई थी। 

बस देने के बारे में विस्तृत रिपोर्ट स्कैनिया के आंतरिक ऑडिट में है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जाँच में इस आरोप को सही पाया गया कि स्कैनिया ने भारत के मंत्री को वह बस दी थी और उसे उसके बदले पैसे का भुगतान नहीं किया गया था। इसमें यह भी कहा गया कि इस डील से वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को लाभ पहुँचा था।

स्वीडिश मीडिया की इस रिपोर्ट के मुताबिक़, स्कैनिया के शीर्ष के अफ़सर इस बस सौदे में जुड़े हुए थे। स्कैनिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्कैनिया इंडिया के प्रमुख और उनके उत्तराधिकारी इस सौदे में शामिल थे, उन्हें पूरी जानकारी थी।एसवीटी ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा है कि नितिन गडकरी को इस पूरे डील की जानकारी थी।

यह संवेदनशील मामला था और एक केंद्रीय मंत्री से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था, लिहाज़ा, उन्हें यह बस कंपनी के एक डीलर के मार्फत दी गई थी। यह बस सीधे मंत्री को न देकर पहले कंपनी के डीलर को दी गई, उसने यह बस गडकरी के बेटे की कंपनी को दे दी।

पैसे नहीं दिए?

इस सौदे के लिए पैसे की व्यवस्था स्कैनिया की वित्तीय कंपनी ने की थी। स्कैनिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है कि स्कैनिया ने बस की कीमत फोक्सवैगन को दी थी। कंपनी की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में बस के पैसों के भुगतान पर अभी भी सवाल उठ रहे हैं।

जब स्वीडिश टेलीविज़न एसवीटी और जर्मन प्रकाशक ज़ेडडीएफ़ ने फ़ोक्सवैगन से बस के बारे में पूछा, कंपनी यह नहीं बता पाई कि फिलहाल यह बस किसके पास है, इसका मालिक कौन है और यह किस जगह है।

नितिन गडकरी या उनके लोगों ने एसवीटी को उसके सवालों के जवाब नहीं दिये हैं।

गडकरी का जवाब

पर 'द वायर' के पास नितिन गडकरी का जवाब है। नितिन गडकरी ने साफ कहा है कि उन्होंने या उनके परिवार के किसी आदमी ने स्वीडन से कोई बस नहीं ली है, यह ख़बर 'बेबुनियाद, मनगढंत और दुष्टतापूर्ण है'।

एक बयान में कहा गया है,

"गडकरी या उनके परिवार के किसी सदस्य का इस बस की खरीद-बिक्री से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें उस किसी आदमी या कंपनी से कोई मतलब नहीं है जो इस बस की खरीद-बिक्री से जुड़ा हुआ हो।"


नितिन गडकरी की ओर से दिया गा जवाब

नागपुर नगर निगम ने बसें खरीदी थीं?

बयान में यह भी कहा गया है कि "नितिन गडकरी भारत में प्रदूषण-मुक्त सार्वजनिक परिवहन प्रणाली  के तहत नागपुर में इथेनॉल से चलने वाली स्कैनिया बस शुरू करने में अगुआ थे। उन्होंने नागपुर म्युनिसपल कॉरपोरेशन को पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए उत्साहित किया और नगर निगम ने स्वीडिश बस कंपनी के साथ एक समझौते पर दस्तख़त किए। नागपुर में स्कैनिया की बसें चलने लगीं।"
गड़करी की तरफ़ से बयान में कहा गया है, “यह नागपुर नगर निगम और स्कैनिया के बीच एक विशुद्ध वाणिज्यिक व्यवस्था थी और इसका गडकरी या उनके परिवार के किसी सदस्य से कोई संबंध नहीं है।"

बयान में यह भी कहा गया है कि "मंत्री और उनके परिवार को इस मामले में घसीटा जा रहा है और यह दुर्भाग्यपूर्ण और दुष्टतापूर्ण अभियान है।"

बयान में यह भी कहा गया है कि मीडिया को स्कैनिया की प्रतक्रिया का इंतजार करना चाहिए।

क्या कहना है कंपनी का?

लेकिन, समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कहा है कि स्कैनिया ने यह माना है कि इस सौदे में कंपनी के कर्मचारियों ने गड़बड़ी की है। कंपनी के प्रवक्ता ने रॉयटर्स से कहा कि "इन गड़बड़ियों में कथित घूस, व्यावसायिक साझेदार के साथ मिल कर घूस देने और चीजों को ग़लत ढंग से पेश करना शामिल है।"

कंपनी के प्रवक्ता ने रॉयटर्स से यह भी कहा है कि "इस मामले में पुलिस को पुख़्ता सबूत नहीं मिले हैं। इसलिए इस मामले की आगे जाँच नहीं की जा सकती है।"

प्रवक्ता ने कहा, 

"हालांकि इसके पक्के सबूत हैं कि कंपनी की अपनी व्यावसायिक आचार संहिता का उल्लंघन किया गया है और इस आधार पर आगे बढ़ा जा सकता है, पर ऐसे पुख़्ता सबूत नहीं हैं जिनके आधार पर किसी के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया जाए।"


प्रवक्ता, स्कैनिया

याद दिला दें कि बोफोर्स के मामले में भी सबसे पहले स्वीडिश रेडियो ने ही खबर दी थी। उस खबर में बोफोर्स बनाने वाली कंपनी की आंतरिक रिपोर्ट के हवाले से कहा गया था कि कंपनी ने तोप का वह सौदा हासिल करने के लिए घूस दी थी। इसके बाद ही इस पर बवाल शुरु हुआ जो आगे चल इतना बड़ा बन गया कि राजीव गांधी अगला चुनाव तक हार गए। 
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