वंदे मातरम को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा फ़ैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यूनियन कैबिनेट ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के बराबर कानूनी दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनाव नतीजों के बाद मंत्रिमंडल की पहली बैठक में लिया गया।

क्या होगा नया कानून?

वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के बराबर कानूनी दर्जा देने के लिए संविधान में संशोधन करने की ज़रूरत होगी। इसलिए सरकार राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। अभी यह क़ानून सिर्फ राष्ट्रध्वज, संविधान और राष्ट्रगान की रक्षा करता है। अब वंदे मातरम को भी इसी कानूनी सुरक्षा दी जाएगी।
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अपराध और सजा क्या?

इसका मतलब है कि वंदे मातरम का अपमान करने या गाने के दौरान जानबूझकर रोकने-टोकने पर संज्ञेय अपराध माना जाएगा। इसके लिए सजा 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकती है। दोबारा अपराध करने पर कम से कम 1 साल की जेल जरूरी होगी। यह नियम राष्ट्रगान के लिए पहले से लागू हैं। अब वंदे मातरम पर भी यही नियम लागू होंगे।

वंदे मातरम को जानिए

वंदे मातरम गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय हैं। यह गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक इतिहास में बहुत खास जगह रखता है। 1870 के दशक में आनंदमठ उपन्यास में लिखित वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम का बहुत बड़ा प्रतीक था। 1950 में संविधान सभा ने जन गण मन को राष्ट्रगान और वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाया।

विवाद क्यों?

गीत में लिखे कंटेंट को लेकर पहले विवाद रहा है। पूरे गीत में मातृभूमि को दुर्गा, लक्ष्मी आदि देवियों के रूप में चित्रित किया गया है। कई मुस्लिम विद्वान व संगठन इसे शिर्क यानी बहुदेववाद मानते हैं, इसलिए पूरे गीत को स्वीकार नहीं करते। 

इसी वजह से 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने केवल पहले दो छंद अपनाए, बाद वाले छोड़ दिए ताकि स्वतंत्रता आंदोलन में एकजुटता हो और मुस्लिम विरोध कम हो। अब बीजेपी इसे "तुष्टिकरण" कहती है।

विपक्षी दलों का रुख

कांग्रेस, टीएमसी जैसे विपक्ष दल इसलिए मोदी सरकार के इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे इसे बीजेपी की बहुसंख्यकवाद, ध्रुवीकरण और लोगों पर जबरन थोपने की नीति के तौर पर देखते हैं। उनका मानना है कि जबरन गाने से अल्पसंख्यकों को परेशानी होगी और अलगाव बढ़ेगा। विपक्ष को लगता है कि बीजेपी हिंदू राष्ट्रवाद को बढ़ावा दे रही है। वे पूछते हैं कि क्यों जन गण मन पर्याप्त नहीं? क्यों पूरा गीत जब पहले दो छंद ही पर्याप्त हैं?

बीजेपी कहती है कि इसका मक़सद राष्ट्रगीत का पूरा सम्मान देना, स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को मजबूत करना है। अपमान किसी को भी नहीं करना चाहिए। कई गैर-मुस्लिम भी पहले दो छंद गाते हैं।
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मोदी सरकार ने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मनाई। सरकार का यह फ़ैसला इसी मौक़े पर लिया गया है। पहले साल 2005 में राष्ट्रध्वज के अपमान को रोकने के लिए कानून में संशोधन किया गया था। वंदे मातरम को भी वैसी ही सुरक्षा देने की मांग पिछले साल दिसंबर में संसद में उठाई गई थी।

अब संविधान में होगा संशोधन

सरकार जल्द ही संसद में यह संशोधन विधेयक पेश करेगी। अगर इसे पास कर दिया गया तो यह भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों को कानूनी सुरक्षा देने में एक बड़ा बदलाव होगा।
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बीजेपी का यह फैसला उन राज्यों में बीजेपी की जीत के तुरंत बाद आया है, जहां पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया। राजनीतिक विश्लेषक इसे बीजेपी के 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम मान रहे हैं।