2015 में, जब चुनाव आयोग ने आधार को मतदाता पहचान पत्र सूची से जोड़ा, तो दो राज्यों, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मतदाता डेटाबेस से लगभग 55 लाख नाम हटा दिए गए थे। यहां यह बताना जरूरी है कि 2014 में बीजेपी सरकार केंद्र की सत्ता में आई तो उसने चुनाव आयोग से इस पर काम करने को कहा था। तब तक कानून भी नहीं बना था। चुनाव आयोग में गुजरात काडर के अधिकारी आए। आयोग ने 2015 से इस पर काम शुरू कर दिया था जबकि मोदी सरकार ने कानून 2021 में बनाया।