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ऑटो कल-पुर्जा उद्योग में 1 लाख कर्मचारी बेरोज़गार, रियायतों के बावजूद मंदी 

सत्तारूढ़ दल के सांसद भले ही यह कहें कि सड़कों पर लगा जाम इस बात का सबूत है कि ऑटो उद्योग में कोई गड़बड़ी नहीं है और सबकुछ बिल्कुल ठीक है, पर सच यह है कि ऑटो उद्योग की तो बात छोड़िए, उसके कल-पुर्जे बनाने वाले उद्योग की स्थिति भी खस्ताहाल है। कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनियों की शीर्ष संस्था ऑटोमोटिव कम्पोनेंट मैन्युफ़ैक्चरर्स एसोशिएसन ने अपनी रिपोर्ट में शुक्रवार को कह है कि हाल के महीनों में कम से कम 1 लाख लोगों की नौकरी चली गई है।
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मंदी में नहीं है ऑटो उद्योग?

बलिया से बीजेपी सांसद वीरेंद्र सिंह ‘मस्त’ ने यह कह कर सबको चौंका दिया कि यदि ऑटो उद्योग में मंदी रहता तो सड़कों पर इतनी गाड़ियाँ नहीं चल रही होतीं और इस तरह चौराहों पर जाम नहीं लगा रहता। उनके कहने का मतलब यह है कि ऑटो उद्योग में मंदी नहीं है।

लेकिन शुक्रवार को जारी एसीएमए रिपोर्ट में जो आँकड़े दिए गए हैं, वे यही साबित करते हैं कि पूरे ऑटो उद्योग की स्थिति ख़राब है। इसके मुताबिक़, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक यानी सिर्फ़ 6 महीने में एक लाख लोगों की नौकरी जा चुकी है। ये अस्थायी कर्मचारी थे, जो कल-पुर्जे बनाने वाली सैकड़ों छोटी-मोटी कंपनियों में काम करते थे। 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अप्रैल-सितंबर की छमाही में कल-पुर्जे बनाने वाले उद्योग के कामकाज में 10.1 प्रतिशत की गिरावट आ गई है। इस दौरान कारोबार 1.99 लाख करोड़ रुपये से गिर कर 1.79 लाख करोड़ रुपये तक आ गया है।

निवेश में कमी

एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि इस दौरान पूंजी निवेश में कम से कम 2 अरब डॉलर यानी लगभग 140 अरब रुपये की कमी हुई है। रिपोर्ट से यह भी साफ़ है कि इस दौरान कारोबार की स्थिति इससे भी बदतर होती, लेकिन बढ़े हुए निर्यात से कुछ राहत मिली है। कल-पुर्जों के निर्यात में 2.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, यानी 51,397 करोड़ रुपये के कल-पुर्जे का निर्यात किया गया है। 

एसीएमए अध्यक्ष दीपक जैन ने लाइवमिंट से कहा, ‘ऑटोमोटिव उद्योग लंबे समय से मंदी में चल रहा है। हर क्षेत्र में गाड़ियों की बिक्री पिछले एक साल में गिरी है।’ 

उन्होंने यह भी कहा कि पूरे ऑटो सेक्टर के कामकाज में लगभग 15-20 प्रतिशत की गिरावट हुई है और इसका असर कल-पुर्जा उद्योग पर भी पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऑटो उद्योग में 10 प्रतिशत की वृद्धि होती तो लगभग 6 अरब डॉलर का राजस्व बढ़ता और इससे कम से कम 2 अरब डॉलर का निवेश होता।

भारी निवेश के बावजूद मंदी

एसीएमए अध्यक्ष ने यह भी कहा है कि सिर्फ़ बीएस-6 के अनुरूप गाड़ियों को ढालने में ही ऑटो उद्योग ने लगभग 80,000 से 90,000 करोड़ रुपए का निवेश किया। इसमें कल-पुर्जे उद्योग ने भी 30,000 से 35,000 करोड़ रुपये का निवेश किया। 

यह तो बिल्कुल साफ़ है कि ऑटो उद्योग मंदी की चपेट में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अगस्त में कई महत्वपूर्ण रियायतों का एलान किया था। लेकिन इसके बावजूद मंदी बरक़रार है। यानी, इन रियायतों से भी कोई फ़ायदा नहीं हुआ है। 

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